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मैक्सिको ने भी किया एनएसजी सदस्यता के लिए भारत का समर्थन
एजेंसी/ मैक्सिको
Updated Thu, 09 Jun 2016 11:29 PM IST
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एनएसजी की सदस्यता के समर्थन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैक्सिको के राष्ट्रपति के प्रति जताया आभार
- फोटो : PTI
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न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की सदस्यता के लिए मैक्सिको ने भी अपना समर्थन दिया है। वियना में होने वाली 48 देशों वाली न्यूक्लियर ट्रेडिंग ब्लॉक की अहम बैठक से पहले भारत दुनिया के प्रमुख देशों का समर्थन हासिल करने का आक्रामक प्रयास कर रहा है।
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मैक्सिको के राष्ट्रपति एनरिक पेना नीतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विस्तृत बातचीत के बाद एनएसजी में भारत की सदस्यता की दावेदारी के समर्थन का एलान किया। दोनों नेताओं की बातचीत मुख्य रूप से कारोबार एवं निवेश, सूचना प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और अंतरिक्ष सहित कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित रही।
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मोदी के साथ मीडिया से रूबरू होते हुए नीतो ने कहा, ‘मैक्सिको एनएसजी के लिए भारत के प्रयास को स्वीकारता है। परमाणु हथियारों के अप्रसार और निरस्तीकरण के अंतरराष्ट्रीय एजेंडा के प्रति प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता को स्वीकारते हुए हम भारत के आग्रह का सकारात्मक और रचनात्मक रूप से समर्थन करने जा रहे हैं।’
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प्रधानमंत्री मोदी ने मैक्सिको के राष्ट्रपति के प्रति इस समर्थन के लिए आभार प्रकट किया और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए मैक्सिको को एक अहम साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदलने करने के लिए ‘ठोस नतीजों की रूपरेखा’ को विकसित करने और इस पर काम करने को लेकर सहमति जताई है। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की।
क्या है न्यूक्लियर स्पलायर्स ग्रुप
एनएसजी परमाणु क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को देखता है और इसके सदस्यों को परमाणु तकनीक के कारोबार और निर्यात की इजाजत है। बृहस्पतिवार को वियना में एनएसजी की बैठक हुई जिसमें भारत की सदस्यता के आवेदन पर विचार किया गया। इसके बाद एनएसजी की अगली बैठक 24 जून को सियोल में होगी। एनएसजी सर्व सम्मति के सिद्धांत पर काम करता है और अगर एक भी देश भारत के विरोध में वोट करता है तो भारत इसका सदस्य नहीं बन पाएगा। भारत ने 12 मई को एनएसजी की सदस्यता के लिए आवेदन किया था।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है एनएसजी की सदस्यता?
- इसकी सदस्यता से भारत को एनएसजी से दवाइयों से लेकर परमाणु रिएक्टरों तक की तकनीक हासिल करने में आसानी होगी।
- भारत धीरे-धीरे जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता घटाना चाहता है और स्वच्छ ऊर्जा के लिए परमाणु ऊर्जा क्षमता का विस्तार करने की जरूरत है। एनएसजी की सदस्यता इसलिए भी महत्वपूर्ण है।
- एनएसजी की सदस्यता मिलने के बाद भारत को उच्च स्तरीय मिसाइल की तकनीक प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
- नवीनतम तकनीक तक पहुंच के बाद भारत परमाणु ऊर्जा उपकरणों का उत्पादन कर उनकी बिक्री भी कर सकता है। इससे भारत में नई खोजों के अलावा भारत में विनिर्माण में मदद मिलेगी जिससे आर्थिक और रणनीतिक लाभ प्राप्त होंगे।
- अगर भारत को एनएसजी की सदस्यता मिल जाती है तो पाकिस्तान को इसकी सदस्यता भारत नहीं लेने देगा क्योंकि एनएसजी की सदस्यता सर्व सम्मति से मिलती है।
छह देश भारत की एनएसजी सदस्यता के विरोध में, अमेरिका सहित कई देशों का है समर्थन
चीन सहित न्यूजीलैंड, आयरलैंड, तुर्की, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रिया एनएसजी में भारत के शामिल होने का विरोध कर रहे हैं। चीन का तर्क है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। दूसरी तरफ, भारत एनएसजी के सदस्यों से अपनी सदस्यता के लिए समर्थन की बात कर रहा है। भारत के परमाणु अप्रसार के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए अमेरिका एनएसजी सदस्यता के लिए भारत का समर्थन कर रहा है और उसने एनएसजी के अन्य सदस्यों से भी भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने को कहा है। परमाणु प्रसार को लेकर गहरी चिंता जताने वाले यूरोपीय देश स्विटजरलैंड ने परमाणु व्यापार क्लब में शामिल होने के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन करने की घोषणा की थी। भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के आधार पर चीन के न चाहने के बावजूद, भारत के मामले का समर्थन करने के बाद एनएसजी ने असैन्य परमाणु प्रौद्योगिकी तक पहुंच के लिए वर्ष 2008 में भारत को विशेष छूट दी थी।
राष्ट्रपति खुद कार चलाकर मोदी को ले गए
पांच देशों की यात्रा के अंतिम पड़ाव मैक्सिको में जब पीएम मोदी पहुंचे, तो उनका शानदार स्वागत हुआ। आधिकारिक मुलाकात के बाद मैक्सिको के राष्ट्रपति एनरिक पेना नीटो ने मोदी को अपनी कार में बिठाया और खुद ड्राइव कर एक रेस्टोरेंट ले गए। यहां दोनों ने वेज डिनर किया। इसके बाद मोदी को नीटो अपने घर भी ले गए।
एनएसजी में सदस्यता के मायने
यदि भारत एनएसजी सदस्य बन जाता है तो वह परमाणु तकनीकी का व्यापार और निर्यात कर सकेगा। सदस्यता मिलने के बाद अपने ऊर्जा क्षेत्र को विस्तार देने में भारत को सहूलियत होगी। कुल मिलाकर एनएसजी सदस्या का संबंध परोक्ष रूप से देश के विकास से जुड़ा है। यही वजह है कि चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान और चीन भारतीय सदस्यता का विरोध कर रहे हैं। न्यूक्लियर नॉन प्रोलिफेरेशन ट्रिटी (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं करने को मुद्दा बनाकर भरतीय सदस्यता का चीन विरोध कर रहा है। हालांकि अमेरिका समेत कई एनसीजी सदस्य भारत के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए सदस्यता देने के पक्ष में हैं।
पाक की बढ़ी छटपटाहट
एनएसजी में भारतीय सदस्यता को मिल रहे समर्थन से पाकिस्तान की छटपटाहट बढ़ गई है। भारतीय सदस्यता का अब तक विरोध कर रहे पाकिस्तान ने अब खुद की भी सदस्यता के लिए हाथ-पैर मारना शुरू कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी पीएम के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने तीन देशों के विदेश मंत्री को फोन करके पाक के लिए समर्थन मांगा। वहीं, यूएस में पाक राजदूत ने एक सीनेट कमेटी को पत्र लिखा है। यही नहीं पाक विदेश मंत्रालय ने तीन देशों के राजदूतों को अपनी बात समझाने के लिए भी बुलाया। पाक अखबार ‘द डॉन’ की खबर के मुताबिक अजीज ने रूस, न्यूजीलैंड और साउथ कोरिया के विदेश मंत्रियों से फोन पर बातचीत की। पाकिस्तान का तर्क है कि एनएसजी में केवल भारत की सदस्यता से दक्षिण एशिया में रणनीतिक स्थिरता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।