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मलेशिया में फेक न्यूज को लेकर बिल पास, झूठी खबर देने पर होगी छह साल की सजा
एजेंसी, नई दिल्ली/पेरिस
Updated Wed, 04 Apr 2018 04:35 AM IST
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FAKE NEWS
- फोटो : SELF
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वैश्विक मीडिया अधिकार समूह रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने झूठी खबरों को ऑनलाइन फैलने से रोकने के लिए दिशानिर्देश तय करने की खातिर मंगलवार से 18 महीने चलने वाली एक परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। यह पहल ऐसे समय में हुई है जब भारत सरकार को फेक न्यूज को लेकर जारी विवादास्पद दिशानिर्देश को वापस लेना पड़ा है।
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एक दिन पहले ही मलेशिया ने फेक न्यूज को लेकर एक कड़ा बिल पास किया है। इसमें झूठी खबरों के प्रकाशन पर छह साल की सजा का प्रावधान किया गया है। पहले इसमें दस साल की सजा की व्यवस्था की गई थी लेकिन विरोध के चलते इसे घटाकर छह साल कर दिया गया। फेक न्यूज को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मीडिया पर निशाना साधते रहे हैं। हाल के दिनों में भारत में भी सोशल मीडिया पर फेक न्यूज का चलन बढ़ा है।
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आरएसएफ के महासचिव क्रिस्टोफ डेलोयर ने कहा, नई सार्वजनिक प्रणाली में गलत सूचनाएं सही खबरों की तुलना में ज्यादा तेजी से फैलती हैं। इसके लिए ऐसे प्रयास की जरूरत है, जिससे इस ट्रेंड को रोका जा सके। इसमें ऐसे लोगों को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है, जो मजबूती से समाचार और सूचनाओं का संकलन करते हैं, भले ही उनकी स्थिति कुछ भी हो।
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इसके लिए आरएसएफ की ओर से जर्नलिस्ट ट्रस्ट इनिशिएटिव की शुरुआत की गई है, ताकि भरोसे और पारदर्शी मानकों का एक निर्धारित तरीका विकसित और लागू किया जा सके। आरएसएफ के नवीनतम सर्वे के मुताबिक, प्रेस की आजादी के मामले में भारत 180 देशों में 136वें पायदान पर काबिज है। 2017 में उसकी स्थिति में तीन पायदान की गिरावट आई है।