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मलेशिया : महिलाओं को कोड़े मारने पर मानवाधिकार संगठनों ने जताया एतराज

Thu, 06 Sep 2018 03:31 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 06 Sep 2018 03:31 AM IST
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Malaysia: Human rights organizations have expressed their disinterest in whipping women

मुस्लिम बहुल मलेशिया में दो महिलाओं को शरई कानून के मुताबिक सिर्फ इसलिए कोड़े बरसाने की सजा सुनाई गई क्योंकि उन्होंने आपस में समलैंगिक रिश्ते बनाए थे। शरिया अदालत द्वारा सार्वजनिक रूप से दी गई इस सजा पर मानवाधिकार संगठनों ने सख्त एतराज जताया है। इन दोनों लेस्बियन महिलाओं को तीन सितंबर को सौ लोगों के सामने छह-छह कोड़े मारने की सजा सुनाई गई। ये कोड़े उनके शरीर के नाजुक स्थान पर मारे गए। 

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इस सजा को त्रिंगानु राज्य की शरिया अदालत के बाहर अंजाम दिया गया। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे भयानक दिन कहा। समूह की मलयेशियाई शोधकर्ता रशेल शोआ-हावर्ड के मुताबिक, सहमति से संबंध बनाने वाले दो लोगों पर ऐसी क्रूर सजा को थोपना सरकार द्वारा मानवाधिकारों को बेहतर करने की कोशिशों पर बड़ा झटका है। मलयेशिया में महिलाओं के समूह ‘जस्टिस फॉर सिस्टर्स एंड सिस्टर्स इन इस्लाम’ ने कानून की समीक्षा की मांग की है जिसमें महिलाओं को कोड़ों से मारने की इजाजत दी जाती है।
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समूह का कहना है, ‘जो सजा दी गई है, वह न्याय की हत्या है।’ हाल ही के दिनों में देश के भीतर ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं। अगस्त में एक ट्रांसजेंडर महिला को एक समूह ने पीट-पीटकर मार डाला था। जबकि कुछ हफ्ते पहले समलैंगिक कार्यकर्ताओं की तस्वीरों को प्रदर्शनी से हटा दिया गया था। धार्मिक मामलों के मंत्री मुजाहिद युसुफ रवा ने इसे सही करार दिया।
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इस्लामिक कानून के दायरे में मिली है सजा की इजाजत

मलेशिया में न्याय प्रणाली की दोहरी व्यवस्था है। मुसलमानों से संबंधित मामलों की सुनवाई इस्लामिक अदालतों में होती है, जबकि अन्य विवादों के निपटारे के लिए सिविल अदालतों की व्यवस्था है। महिलाओं को कोड़े मारना सिविल अदालत में प्रतिबंधित है, लेकिन कुछ राज्यों में इस्लामिक कानून के दायरे में इजाजत मिली है।

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