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चीन में नेतृत्व परिवर्तन : पड़ोसियों के लिए शायद ही कुछ बदले

Thu, 15 Nov 2012 11:46 AM IST
Updated Thu, 15 Nov 2012 11:46 AM IST
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Leadership change in China: hardly anything change for neighbors

चीन में गुरुवार को नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब बीजिंग में एक नई टीम अस्तित्व में आ गई है। आईए नज़र डालते हैं कि इस परिवर्तन को उसके पड़ोसी देश किस तरह से देख रहे हैं।

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नेपाल, नवीन सिंह खड़का, बीबीसी नेपाली

नेपाल के लिए भारत और चीन के बाच सामंजस्य बैठा पाना सबसे बड़ी चुनौती रही है। खास तौर से उस समय जब दो तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव जमाने के लिए संघर्षरत हैं।
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टीकाकारों का मानना है कि भारत और अमरीका के बीच बढ़ती नजदीकियों ने नेपाल के लिए उलझनें बढ़ा दी हैं। चीन की सबसे बड़ी चिंता चीन प्रशासित तिब्बत से भागने वाले तिब्बती शर्णार्थी हैं जो नेपाल को पार करते हुए भारत जाते हैं जहाँ उनके धार्मिक गुरू दलाई लामा रह रहे हैं।
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चीनी नेताओं ने बार बार तिब्बत के बारे में अपनी संवेदनशीलता नेपाली अधिकारियों और नेताओं से स्पष्ट की है। नेपाल में लंबी राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद, चीन लगभग हर नेपाली सरकार को' एक चीन नीति' अपनाने के लिए मनाने में सफल रहा है।

पर्यवेक्षकों का मानना है कि दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारत के पारंपरिक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए अब नेपाल में चीन की रुचि तिब्बती मामले से आगे जाती दिखाई दे रही है। इसके समर्थन में वह हाल के वर्षों में चीन की तरफ से नेपाल की उच्च स्तरीय यात्राओं में बढ़ोत्तरी का ज़िक्र करते हैं।

बर्मा, मिंत स्वे, बीबीसी बर्मीज

चीन में जहां नया नेतृत्व सत्ता सँभाल रहा है, चीन अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का स्वागत करने की तैयारी कर रहा है। इस यात्रा से संकेत मिल रहे हैं कि बर्मा अमरीका और पश्चिम के साथ अपने संबंधों को बढ़ा रहा है और अपने बड़े पड़ोसी के प्रति उसकी निर्भरता कम हो रही है।

पिछले दशकों में बर्मा राजनीतिक, सैनिक और आर्थिक सहयोग के लिए मुख्य रूप से चीन पर निर्भर रहा है क्योंकि प्रतिबंधों के कारण वह पश्चिमी बाज़ारों से अलग थलग पड़ गया था।

चीन के बर्मा के साथ सामरिक समझौते हैं और उसने ऊर्जा क्षेत्र में बहुत अधिक निवेश किया है। उसने एक बंदरगाह और गैस पाइप लाइन बनाई है ताकि इस क्षेत्र से खनिज तेल का दोहन किया जा सके।

हाँलाकि अब बढ़ते प्रजाताँत्रिक अधिकारों के कारण लोगों ने चीन के बढ़ते प्रभाव के प्रति अपना विरोध जताना शुरू कर दिया है। चीन द्वारा बनाए गए जल ऊर्जा बाँध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। मध्य बर्मा में एक चीनी कंपनी द्वारा चलाई जा रही ताँबे की खदान को बंद करने के लिए भी दबाव बढ़ रहा है।

भारत, रवनी ठाकुर, जामिया मिलिया विश्वविद्यालय, दिल्ली

चीन में नई पीढ़ी के नेताओं के सत्ता संभालने के बीच भारत चीन संबंध बहुत तेजी से सामान्य हुए हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार भी बहुत तेजी से बढ़ा है।

लेकिन सामरिक स्तर पर दोनों देशों के बीच अविश्वास और प्रतिस्पर्धा की भावना अभी भी जारी है। सैनिक रूप से चीन भारत को बहुत बड़ी चुनौती नहीं मानता लेकिन वह यह भी नहीं चाहता कि भारत और अमरीका के बीच नज़दीकियां बढ़ें।

हाँ भारत ज़रूर चीन को एक चुनौती के तौर पर देखता है क्यों कि कई मामलों में वह चीन से पिछड़ा हुआ है। दोनों देशों में दो अलग अलग राजनीतिक व्यवस्थाएं लागू हैं। चीन में एक दलीय राजनीतिक प्रणाली है और कम्युनिस्ट पार्टी का शासन है। जबकि भारत में प्रजातंत्र है लेकिन वह अपने कई अंतर्विरोधों से निपटने का अभी तक कोशिश कर रहा है।

चीन ने जापान और दूसरे पूर्वी एशियाई देशों के खिलाफ कई आक्रामक क्षेत्रीय दावे किए हैं। वह अरुणाचल प्रदेश को लोगों को वीज़ा न देकर भारत को भी अपने क्षेत्रीय दावों की याद दिलाता रहा है।

चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी अब माओ की समतावादी विचारधारा पर निर्भर होने के बजाए राष्ट्रवाद को अधिक महत्व दे रही है।भारत में भी अपने राष्ट्रवादी हैं जो चीन को भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानते हैं।

लेकिन इन दोनों देशों के संबंधों में कोई बहुत बड़ा परिवर्तन होने की संभावना नहीं है। दोनों देश आर्थिक और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर सहयोग करते रहेंगे लेकिन साथ साथ अपने राष्ट्रीय और सामरिक हितों की अनदेखी भी नहीं करेंगे।

बाँग्लादेश, सईदा अख़्तर, बीबीसी बाँग्ला

पर्यवेक्षकों का मानना है कि चीन में नेतृत्व परिवर्तन से चीन बाँगलादेश संबंधों पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ेगा। चीन के लिए बाँगलादेश का सामरिक और आर्थिक महत्व है।

चीन की अपने पड़ोसियों के साथ क्षेत्रीय व्यापार बढ़ाने की नीति रही है।वह समुद्र में और खास तौर से हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में अपनी उपस्थति बढ़ाना चाहता है।


दोनों देशों के बीच व्यापार के अलावा जल संसाधन प्रबंधन, अक्षय ऊर्जा, संचार और बंदरगाह सुविधाओं के क्षेत्र में सहयोग हो सकता है।

बाँगलादेश का अधिकतर आयात चीन से होता है जिसकी वजह से चीन के पक्ष में 40 करोड़ डॉलर का व्यापार असंतुलन हो गया है।

बाँगला देश चीन से मुख्य रूप से कपड़ा, मशीनें, इलेक्ट्रोनिक वस्तुएं, सीमेंट, खाद। सोयाबीन, लोहा इस्पात और गेहूँ आयात करता है जबकि चीन बांगलादेश से चमड़ा, सूती कपड़े और मछलियाँ मंगाता है।

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