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जजों ने किया हड़ताल का आहवान
Updated Sun, 25 Nov 2012 03:00 PM IST
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मिस्र में न्यायाधीशों ने राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के उस आदेश के विरोध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है जिसके तहत राष्ट्रपति को नई शक्तियां मिली हैं।
आपात बैटक के बाद न्यायाधीशों की यूनियन ने राष्ट्रपति से मांग की है कि वो नए आदेश को वापस लें। यूनियन के अनुसार यह आदेश न्यायपालिका पर ‘‘ अप्रत्याशित हमला’’ है।
हालांकि मुर्सी का कहना है कि वो क्रांति को बचाए रखना चाहते हैं।
राष्ट्रपति के नए अधिकारों के तहत उनके फैसलों को न्यायालय नहीं बदल सकेगा।
मिस्र में पिछले कुछ समय से नए संविधान का मसौदा तैयार हो रहा है लेकिन मसौदा तैयार करने वाली असेंबली में किसको शामिल किया गया इसे लेकर का़नूनी शिकायतें भी हो रही हैं।
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पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक का शांतिपूर्वक तख्तापलट होने के बाद के साल भर बाद जून में मुर्सी देश के राष्ट्रपति बने हैं।
मुस्लिम ब्रदरहुड ने मुर्सी की फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी को समर्थन दिया था। अब ब्रदरहुड ने भी रविवार को पूरे देश में प्रदर्शनों का आहवान किया है।
इससे पहले मुर्सी के समर्थन में प्रदर्शनकारियों ने जजों की मीटिंग में उपद्रव किया था। विपक्ष जजों का समर्थन कर रहा है।
प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का भी प्रयोग किया है।
विपक्ष के नेता मोहम्मद अल बारादेई का कहना है कि जब तक यह आदेश वापस नहीं लिया जाता तब तक मुर्सी से बातचीत नहीं हो सकती।
गुरुवार को राष्ट्रपति ने नए आदेश जारी किए थे जिसके बाद प्रदर्शन शुरु हो गए जिसमें फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी के कार्यालयों पर हमले भी हुए हैं।
जजों की यूनियन ने आपात बैठक के बाद आह्वान किया है कि देश भर की सभी अदालतों में काम काज ठप्प कर दिया जाए।
इससे पहले एक बयान में मिस्र के सर्वोच्च न्यायिक आयोग ने बयान जारी कर मुर्सी के आदेश को न्यायपालिका की आज़ादी और उसके फैसलों पर ‘अप्रत्याशित हमला’ करार दिया।
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आपात बैटक के बाद न्यायाधीशों की यूनियन ने राष्ट्रपति से मांग की है कि वो नए आदेश को वापस लें। यूनियन के अनुसार यह आदेश न्यायपालिका पर ‘‘ अप्रत्याशित हमला’’ है।
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हालांकि मुर्सी का कहना है कि वो क्रांति को बचाए रखना चाहते हैं।
राष्ट्रपति के नए अधिकारों के तहत उनके फैसलों को न्यायालय नहीं बदल सकेगा।
मिस्र में पिछले कुछ समय से नए संविधान का मसौदा तैयार हो रहा है लेकिन मसौदा तैयार करने वाली असेंबली में किसको शामिल किया गया इसे लेकर का़नूनी शिकायतें भी हो रही हैं।
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पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक का शांतिपूर्वक तख्तापलट होने के बाद के साल भर बाद जून में मुर्सी देश के राष्ट्रपति बने हैं।
मुस्लिम ब्रदरहुड ने मुर्सी की फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी को समर्थन दिया था। अब ब्रदरहुड ने भी रविवार को पूरे देश में प्रदर्शनों का आहवान किया है।
इससे पहले मुर्सी के समर्थन में प्रदर्शनकारियों ने जजों की मीटिंग में उपद्रव किया था। विपक्ष जजों का समर्थन कर रहा है।
प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का भी प्रयोग किया है।
विपक्ष के नेता मोहम्मद अल बारादेई का कहना है कि जब तक यह आदेश वापस नहीं लिया जाता तब तक मुर्सी से बातचीत नहीं हो सकती।
गुरुवार को राष्ट्रपति ने नए आदेश जारी किए थे जिसके बाद प्रदर्शन शुरु हो गए जिसमें फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी के कार्यालयों पर हमले भी हुए हैं।
जजों की यूनियन ने आपात बैठक के बाद आह्वान किया है कि देश भर की सभी अदालतों में काम काज ठप्प कर दिया जाए।
इससे पहले एक बयान में मिस्र के सर्वोच्च न्यायिक आयोग ने बयान जारी कर मुर्सी के आदेश को न्यायपालिका की आज़ादी और उसके फैसलों पर ‘अप्रत्याशित हमला’ करार दिया।