नक्शों से स्वस्तिक के चिह्न को हटा सकता है जापान
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टोक्यो ओलंपिक की तैयारी में जुटा जापान इस समय एक अजीब सांस्कृतिक कशमकश से गुजर रहा है। उसके सामने यह संकट परंपरागत मांजी और नाजी स्वस्तिक चिह्न में समानता की वजह से पैदा हुआ है। इसे देखते हुए जापान बौद्ध मंदिरों के लिए मांजी चिह्न का इस्तेमाल बंद भी कर सकता है।
जापान में 2020 में ओलंपिक होने हैं। दुनिया भर से लाखों विदेशी दर्शक और पर्यटक इस दौरान जापान आएंगे। ऐसे में मांजी ने जापान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
दरअसल हिंदुओं और बौद्धों में सदियों से इस चिह्न का इस्तेमाल होता रहा है। इसे खुशी और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। जापान में नक्शों पर बौद्ध मंदिरों को दर्शाने के लिए इसी चिह्न का इस्तेमाल किया जाता है।
ओलंपिक के दौरान हो सकती है दिक्कत
अब परेशानी यह है कि बहुत से पश्चिमी पर्यटकों की नजर में मांजी और नाजी चिह्न एक ही है। वे नाजी चिह्न को यहूदियों के खिलाफ अत्याचार का प्रतीक मानते हैं।
ऐसे में मांजी को लेकर उनमें भ्रम पैदा हो सकता है। इस बात को समझते हुए एक सरकारी पैनल ने पिछले हफ्ते जारी रिपोर्ट में स्वस्तिक की जगह दूसरा चिह्न सुझाया था। जनता की राय के बाद इस पर मार्च अंत में निर्णय होगा।