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नक्शों से स्वस्तिक के चिह्न को हटा सकता है जापान

Sat, 06 Feb 2016 05:06 AM IST
Updated Sat, 06 Feb 2016 05:06 AM IST
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Japan may removed swastika symbol from the map

टोक्यो ओलंपिक की तैयारी में जुटा जापान इस समय एक अजीब सांस्कृतिक कशमकश से गुजर रहा है। उसके सामने यह संकट परंपरागत मांजी और नाजी स्वस्तिक चिह्न में समानता की वजह से पैदा हुआ है। इसे देखते हुए जापान बौद्ध मंदिरों के लिए मांजी चिह्न का इस्तेमाल बंद भी कर सकता है।

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जापान में 2020 में ओलंपिक होने हैं। दुनिया भर से लाखों विदेशी दर्शक और पर्यटक इस दौरान जापान आएंगे। ऐसे में मांजी ने जापान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

दरअसल हिंदुओं और बौद्धों में सदियों से इस चिह्न का इस्तेमाल होता रहा है। इसे खुशी और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। जापान में नक्शों पर बौद्ध मंदिरों को दर्शाने के लिए इसी चिह्न का इस्तेमाल किया जाता है।
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ओलंपिक के दौरान हो सकती है दिक्कत

Japan may removed swastika symbol from the map

अब परेशानी यह है कि बहुत से पश्चिमी पर्यटकों की नजर में मांजी और नाजी चिह्न एक ही है। वे नाजी चिह्न को यहूदियों के खिलाफ अत्याचार का प्रतीक मानते हैं।

ऐसे में मांजी को लेकर उनमें भ्रम पैदा हो सकता है। इस बात को समझते हुए एक सरकारी पैनल ने पिछले हफ्ते जारी रिपोर्ट में स्वस्तिक की जगह दूसरा चिह्न सुझाया था। जनता की राय के बाद इस पर मार्च अंत में निर्णय होगा।

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