मलेशिया विमान हादसा: जांच में आड़े आ रहे विद्रोही
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अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की टीम का कहना है कि पूर्वी यूक्रेन में विद्रोहियों ने मलेशिया एयरलाइन के विमान के मलबे तक पहुंचने के लिए उन्हें 'पूरी छूट नहीं' दी जा रही है।
यूरोपीय सुरक्षा और सहयोग संगठन (ओएससीई) के एक प्रवक्ता का कहना है कि मलबा जहां गिरा है उसके आस-पास हथियारबंद लडाके खडे हैं जिनमें से एक ने हवा में गोलियां भी दागीं।
ऐसा माना जा रहा है कि मलेशिया के विमान को विद्रोहियों के इलाके से दागी गई एक मिसाइल से मार गिराया गया था। गुरुवार को हुए इस हादसे में विमान में सवार सभी 298 लोग मारे गए थे।
ओएससीई की स्थायी परिषद के चेयरमैन थॉमस ग्रेमिंगर ने बीबीसी से कहा कि संस्था हादसे की अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए काम करती रहेगी।
'यूक्रेन की भूमिका की भी जांच हो'
वहीं संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत विटाली चुरकिन ने कहा है कि इस मामले में होनेवाली जांच पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला जाना चाहिए जिससे कि उसके नतीजे प्रभावित हों।
रूसी राजदूत का ये भी कहना था कि दुर्घटना में यूक्रेन के विमानन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
लेकिन मलेशिया के परिवहन मंत्री लियो तियुंग लाई ने कहा है कि विमान जिस रास्ते पर गया वो स्वीकृत था और कुछ ही घंटे पहले एक दूसरा विमान उसी रास्ते से गुजर चुका था।
हालांकि यूरोप के एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट यूरोकंट्रोल के प्रवक्ता ब्रायन फ्लिन ने कहा कि विमानों को कुछ इलाकों से नीची उडानें भरने के लिए मना किया गया था।
हादसे के लिए जिम्मेदार कौन?
कुछ एयरलाइंस कंपनियों ने यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्र से जाने वाली अपनी उडानों के रास्तों में कुछ हफ्तों से बदलाव कर दिया था। इनमें ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की कंपनियां शामिल हैं। कुछ कंपनियों ने हादसे के बाद रूट बदल दिए है।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र की नागरिक विमानन संस्था ने दुनिया भर के उडान रास्तों को लेकर अपनी भूमिका साफ की है।
इंटरनेशनल सिविल एवियेशन ऑर्गेनाइजेशन यानी इकाओ के प्रवक्ता ने कहा है कि किसी रूट की सुरक्षा या असुरक्षा को लेकर सलाह देने की जिम्मेदारी सरकारों की होती है।
इकाओ मलेशिया के इस दावे पर अपना रूख साफ कर रहा था जिसमें ये कहा गया था कि फ्लाइट एमएच-17 ने जो रूट लिया था वो इकाओ के जरिये स्वीकृत किया हुआ था।