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महंगाई की मार, सवा सौ रुपए में एक नींबू

Mon, 25 Feb 2013 12:40 PM IST
मैडेलिन मॉरिस, बीबीसी न्यूज़, ऑस्ट्रेलिया
मैडेलिन मॉरिस, बीबीसी न्यूज़, ऑस्ट्रेलिया Updated Mon, 25 Feb 2013 12:40 PM IST
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inflation hitting lemon prices in australia

भारत में इससे कम रकम में कई लोग दिन का गुजारा कर लेते हैं पर आपको यकीन करने में मुश्किल होगा कि दुनिया में एक जगह ऐसी भी है जहां महज एक नींबू के लिए सवा सौ रुपए कीमत चुकानी पड़ती है।

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ऑस्ट्रेलिया ने भले ही वैश्विक आर्थिक संकट से बिना मंदी की चपेट में आए खुद को किसी तरह बचा लिया हो लेकिन अब ऑस्ट्रेलिया में जिंदगी जीना मंहगा होता जा रहा है।
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सागर किनारे बसे अपने गांव के एक सुपरमार्केट में मैं उस वक्त हैरत में पड़ गई जब मैंने देखा कि वहां नींबू सवा सौ रुपए पीस की दर से मिल रहा था।

यह कीमत झोले भर नींबू की भी नहीं थी। एक नींबू की कीमत करीब 150 रुपए है। वह भी तब जबकि पास में ही नींबू के कई बाग थे। मैं बिना नींबू खरीदे दुकान से बाहर आ गई।
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उस रात खाना खाने के दौरान मैंने अपने मम्मी-पापा से कहा भी,“इस देश को क्या हो गया है। यहां लोग अपने खाने का खर्च कैसे उठाते होंगे?”

मेरे पिता का जवाब था,“अपने आस-पास देखो। यहां लोगों के पास बहुत पैसा है। हम अविश्वसनीय रूप से एक समृद्ध देश में रह रहे हैं।”

और वह सही कह रहे थे। पिछले 12 सालों ऑस्ट्रेलिया बहुत हद तक बदल गया है। यह शुरू से एक खुशनसीब देश रहा है।

अमीर ऑस्ट्रेलिया
इसे कुदरत ने उपजाऊ जमीन और बेपनाह धूप और ढेर सारा प्राकृतिक संसाधन बख्शा है। अब ऑस्ट्रेलिया और भी अमीर हो चुका है। एक नींबू के लिए सवा सौ रुपए चुकाते वक्त किसी की पलक तक नहीं झपकती।

एशिया में कई पड़ोसी देशों को लोग रोजाना इतना ही कमा पाते हैं।

दस साल पहले ऑस्ट्रेलिया का एक भी शहर रहने के लिहाज से दुनिया के 50 मंहगे शहरों में नहीं आता था लेकिन आज उसके तीन शहर टॉप 15 की सूची में शुमार होते हैं।

अपने आस-पास नजर घुमाकर आप यह आप महसूस भी कर सकते हैं।

खूबसूरत देश
मसलन सड़कों पर, गलियों में आप कहीं भी कचरा नहीं देखेंगे। मैंने अभी तक एक भी जगह ऐसी नहीं देखी जहां करीने से घास न कटी हो, झाड़ियों की खूबसूरत छंटाई न की गई हो।

यह चलन कारों के मामले में भी झलकता है। सड़क पर एक भी गाड़ी ऐसी न होगी जो आठ साल से ज्यादा पुरानी हों। वे साफ सुथरी और सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह से खरी उतरती हैं।

खाने-पीने की चीजों के लिए भी ऑस्ट्रेलिया में गजब का दीवानापन दिखाई देता है। औसत परिवारों में भी यूरोपीय साज-सज्जा वाली डिजाइनर किचन का होना आम बात है।

बेशक ऑस्ट्रेलिया में गरीबी भी है। अमीर और गरीब के बीच का फासला भी बढ़ रहा है।

खनन क्षेत्र
ऑस्ट्रेलिया उन गिने-चुने देशों में से है जो वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान मंदी की मार झेले बिना इससे बच गया था।

इसका श्रेय तत्कालीन सरकार की समझदारी भरे आर्थिक प्रबंधन को जाता है लेकिन देश में तकरीबन एक दशक से फलते-फूलते खनन क्षेत्र के सिर भी इसका सेहरा बंधता है।


एक देश के तौर पर ऑस्ट्रेलिया पहले से ज्यादा अमीर हैं। 20 साल पहले यहां तक कि 10 साल पहले तक भी इसके बारे में सोचा नहीं था।

लेकिन लोग फिक्रमंद भी हैं। उस दिन क्या होगा जब खनन क्षेत्र की चमक फीकी पड़ जाएगी।

और मैं खास तौर पर इस बात के लिए परेशान हूं कि मेरे नए नींबू के पौधे पक्के तौर पर बड़े हो जाएं क्योंकि मैं यकीनन इसे किसी सुपरमार्केट में नहीं खरीदना चाहूंगा।

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