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दक्षिणी सूडान की राजधानी जूबा में फंसे एक भारतीय की आपबीती
बीबीसी
Updated Mon, 11 Jul 2016 02:09 PM IST
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वीर दाधिया
- फोटो : bbc
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मेरा नाम वीर दाधिया है। मैं अपने बडे भाई हिमेश दाधिया के साथ दक्षिणी सूडान की राजधानी जूबा में एक भारतीय होटल जूबा राहा में हूं और जल्द से जल्द यहां से निकलना चाहता हूं। हमारा दवाओं का व्यापार है। जूबा की मेरी ये पहली यात्रा है। कल रविवार को हमारी फ्लाइट थी लेकिन शुक्रवार से ही यहां हवाईअड्डा बंद है। यहां बहुत जगह बम गिराए जा रहे हैं। पुलिस काफी सक्रिय हैं।
मैं मुंबई का रहने वाला हूं। जितना मेरी समझ में आ रहा है। यहां करीब तीन सौ भारतीय होंगे। कल शाम को जब हम होटल के भीतर थे तो बहुत जोर से बम फटने की आवाज आई थी। बाद में पता चला कि पेट्रोल पंप को ही उडा दिया गया था। गोलियों की तो लगातार आवाज आ रही है। उसकी तो गिनती ही नहीं है। अभी होटल के नजदीक से ही बम फटने की आवाज आई है।
यहां खाने की अभी तक तो कोई समस्या नहीं है और भगवान की दया से इंटरनेट भी चालू है इसलिए हम परिवार के साथ बातचीत कर पा रहे हैं और ट्वीट भी कर पा रहे हैं। लेकिन आगे क्या होगा पता नहीं।
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बस एक ही चिंता है कि मेरे बड़े भाई टाइप-वन डाइबिटिक हैं। हमारे पास सिर्फ तीन दिन का इंस्युलिन है। वो सबसे बडा टेंशन है। सारी दुकानें बंद हैं। दूतावास ने हमें बाहर न निकलने को कहा है।
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मैं मुंबई का रहने वाला हूं। जितना मेरी समझ में आ रहा है। यहां करीब तीन सौ भारतीय होंगे। कल शाम को जब हम होटल के भीतर थे तो बहुत जोर से बम फटने की आवाज आई थी। बाद में पता चला कि पेट्रोल पंप को ही उडा दिया गया था। गोलियों की तो लगातार आवाज आ रही है। उसकी तो गिनती ही नहीं है। अभी होटल के नजदीक से ही बम फटने की आवाज आई है।
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यहां खाने की अभी तक तो कोई समस्या नहीं है और भगवान की दया से इंटरनेट भी चालू है इसलिए हम परिवार के साथ बातचीत कर पा रहे हैं और ट्वीट भी कर पा रहे हैं। लेकिन आगे क्या होगा पता नहीं।
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बस एक ही चिंता है कि मेरे बड़े भाई टाइप-वन डाइबिटिक हैं। हमारे पास सिर्फ तीन दिन का इंस्युलिन है। वो सबसे बडा टेंशन है। सारी दुकानें बंद हैं। दूतावास ने हमें बाहर न निकलने को कहा है।
'भारतीय दूतावास ने एक वाट्सग्रुप बनाया है'
sudan
- फोटो : reuters
अभी तक मिले समाचारों के मुताबिक लड़ाई में 300 से ज्यादा लोगों के मरने की खबर है। मेरी भाभी ने सुषमा स्वराज जी को ट्वीट किया था। मैंने भी ट्वीट किया था। जवाब आया कि भारतीय दूतावास उन्हें रिपोर्ट करेगा। मुझे फोन भी आया। दूतावास ने एक वाट्सग्रुप बनाया है।
इस ग्रुप से हमें ये तो पता चल पा रहा है कि कहां कहां हिंसा हो रही है लेकिन हम ये नहीं समझ पा रहे हैं कि हम यहां से कब निकल पाएंगे। आगे क्या होगा, ये समझ नहीं आ रहा है। कुछ जगहों में शांति है लेकिन कुछ जगहों में दोबारा फायरिंग शुरू हो गई है।
इस ग्रुप से हमें ये तो पता चल पा रहा है कि कहां कहां हिंसा हो रही है लेकिन हम ये नहीं समझ पा रहे हैं कि हम यहां से कब निकल पाएंगे। आगे क्या होगा, ये समझ नहीं आ रहा है। कुछ जगहों में शांति है लेकिन कुछ जगहों में दोबारा फायरिंग शुरू हो गई है।