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इस्राइली किताबों में भारतीय सैनिकों की कहानी
हैफा/एजेंसी
Updated Sun, 23 Sep 2012 06:11 PM IST
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भले ही उन्हें भारत में कोई नहीं जानता हो, पर उत्तरी इस्राइल के हैफा शहर में कुछ हिंदुस्तानी सैनिकों को लोग अब घर-घर में जानेंगे। वर्ष 1918 में इस शहर को मुक्त कराने के लिए इनका नाम यहां के स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली इतिहास की किताबों में दर्ज किया जाएगा।
खबरों में कहा गया है हैफा नगर पालिका ने इस बाबत काम करना शुरू कर दिया है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इस द्वीपीय शरह की मुक्ति के लिए बहुत से भारतीय सैनिकों ने अपनी जान दी। इनमें से कुछ को यहां के कब्रिस्तानों में ही दफन किया गया है। सैनिकों के इसी अविस्मरणीय योगदान के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जमा भीड़ को संबोधित करते हुए हैफा के डिप्टी मेयर हेडवा अल्मॉन्ग ने कहा कि ‘हैफा नगर पालिका’ का यह कदम शहर के इतिहास और विरासत को सहेजकर रखने की कोशिश का एक हिस्सा है।
हैफा हिस्टोरिकल सोसाइटी ने इस क्षेत्र में भारतीय सैनिकों द्वारा किए गए योगदान के बारे में बेहतरीन शोध किया है। शोध के दौरान उन्होंने पाया कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बड़े पैमाने पर भारतीय सैनिकों ने इस क्षेत्र के लिए अपनी जान दी। इसमें से लगभग 900 भारतीय सैनिकों की कब्र पूरे इस्राइल में आज भी मौजूद है।
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अल्मॉन्ग ने कहा कि 2018 में शहर की आजादी की सौवीं बरसी पर एक शानदार कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा और भारत को भी आमंत्रित किया जाएगा, ताकि कार्यक्रम को सफल बनाया जा सके। तेल अवीव स्थित मिशन की अधिकारी वाणी राव ने इस मामले में सकारात्मक प्रतिक्रिया भी दी है।
भारतीय सेना हर साल 23 सितंबर को ‘हैफा दिवस’ के रूप में मनाती है। और इस दिन बहादुर घुड़सवार रेजीमेंट को श्रद्धांजलि दी जाती है। इसी दिन को हैफा के लोग भी सेलीब्रेट करते हैं और सांस्कृतिक उत्सवों का आयोजन करते हैं।
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खबरों में कहा गया है हैफा नगर पालिका ने इस बाबत काम करना शुरू कर दिया है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इस द्वीपीय शरह की मुक्ति के लिए बहुत से भारतीय सैनिकों ने अपनी जान दी। इनमें से कुछ को यहां के कब्रिस्तानों में ही दफन किया गया है। सैनिकों के इसी अविस्मरणीय योगदान के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जमा भीड़ को संबोधित करते हुए हैफा के डिप्टी मेयर हेडवा अल्मॉन्ग ने कहा कि ‘हैफा नगर पालिका’ का यह कदम शहर के इतिहास और विरासत को सहेजकर रखने की कोशिश का एक हिस्सा है।
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हैफा हिस्टोरिकल सोसाइटी ने इस क्षेत्र में भारतीय सैनिकों द्वारा किए गए योगदान के बारे में बेहतरीन शोध किया है। शोध के दौरान उन्होंने पाया कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बड़े पैमाने पर भारतीय सैनिकों ने इस क्षेत्र के लिए अपनी जान दी। इसमें से लगभग 900 भारतीय सैनिकों की कब्र पूरे इस्राइल में आज भी मौजूद है।
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अल्मॉन्ग ने कहा कि 2018 में शहर की आजादी की सौवीं बरसी पर एक शानदार कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा और भारत को भी आमंत्रित किया जाएगा, ताकि कार्यक्रम को सफल बनाया जा सके। तेल अवीव स्थित मिशन की अधिकारी वाणी राव ने इस मामले में सकारात्मक प्रतिक्रिया भी दी है।
भारतीय सेना हर साल 23 सितंबर को ‘हैफा दिवस’ के रूप में मनाती है। और इस दिन बहादुर घुड़सवार रेजीमेंट को श्रद्धांजलि दी जाती है। इसी दिन को हैफा के लोग भी सेलीब्रेट करते हैं और सांस्कृतिक उत्सवों का आयोजन करते हैं।