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अबू धाबी के भारतीय दुकानदारों का दर्द

Fri, 08 Feb 2013 08:42 AM IST
Updated Fri, 08 Feb 2013 08:42 AM IST
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indian shoppers pain in abu dhabi

अबू धाबी में छोटी किराना दुकानों के जरिए अपनी जिंदगी बनाने वाले भारतीय अब वहां से लौटने को मजबूर हो रहे हैं।

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दरअसल यूएई की हुकूमत सभी किराना दुकानों को एक मानक रूप देना चाहती है, यानि साफ-सफाई, माप-तोल, सुरक्षा वगैरह का एक ऊंचा स्तर। मगर इसकी मार छोटे दुकानदारों पर पड़ रही है जिसमें ज्यादातर भारतीय मूल के लोग हैं।

पहली जनवरी से खाद्य विभाग के ये नए नियम लागू हुए और कुछ दुकानदारों ने इनके मुताबिक बदलाव भी किए। मगर हर दुकानकार के पास या तो इतने पैसे नहीं हैं या उनकी दुकान इतनी बड़ी नहीं है।
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ऐसे लोगों के लिए दुकान के दरवाजे ही बंद नहीं हुए बल्कि यूएई में रहने का विकल्प भी खत्म हो गया है क्योंकि वहां के कानून के हिसाब से कारोबार बंद होने के बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ेगा।
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सभी दुकानों का ऊंचा स्तर
अबू धाबी के टैंकर माई के छोटे से इलाक़े में किराने की 20 दुकानें बंद हो चुकी हैं।

भारत से बीस साल पहले अबूधाबी गए सुलेमान की दुकान भी इनमें से एक है। उन्हें अपनी दुकान को नए कानून के मुताबिक बनाने के लिए लगभग साढ़े बारह लाख रुपए चाहिए जो उनके पास नहीं हैं।

सुलेमान कहते हैं कि नया क़ानून आ गया है, नए कानून के मुताबिक हमें नई छत डालनी होगी, अपने तराजू और काउंटर बदलने होंगे, यहां तक कि शेल्फ भी बदलना होगा, वे चाहते हैं कि सब कुछ अच्छा दिखे और हर दुकान का स्टैंडर्ड एक जैसा हो। वहीं अबू धाबी फूड कंट्रोल अथॉरिटी का कहना है कि ये बदलाव बहुत जरूरी हैं।

मोहम्मद जलाल अल रायसी ने बीबीसी को बताया कि यह बदलाव खाने के सामान को साफ सुथरा और सुरक्षित बनाने के लिए है। यह सारे बदलाव उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं। हर दुकान में सुरक्षा, सफाई, माप-तौल और रख-रखाव के स्तर अलग-अलग हैं जिनमें हम एकरूपता लाना चाहते हैं।


उपभोक्ताओं के लिए?
केरल से यूएई पहुंचे मोहम्मद बरसों से किराना दुकान चला रहे हैं, उन्होंने अपनी दुकान नए कानून के मुताबिक बना ली है। मोहम्मद कहते हैं कि पहले मुझे पूरा यकीन नहीं था, फूड कंट्रोल अथॉरिटी ने सब कुछ समझाया फिर मैंने बदलाव करने का फैसला किया, बदलाव के बाद से बिक्री बढ़ी है और ग्राहक भी खुश हैं।

मगर स्थानीय निवासी, जिनमें से तकरीबन पचास प्रतिशत भारतीय हैं, इस बदलाव से खुश नहीं, क्योंकि उनके आसपास की ज्यादातर किराना दुकानें बंद हो गई हैं।

लोगों के मुताबिक अब अगर टेलीफोन कार्ड जैसी छोटी सी चीज भी खरीदनी हो तो बहुत दूर जाना होता है जिसमें पेट्रोल और समय का भी हर्जाना होता है।

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