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पाकिस्तान: 'मदद नहीं देते तो मत दो, मारो तो मत'

Sun, 29 Sep 2013 10:49 AM IST
Updated Sun, 29 Sep 2013 10:49 AM IST
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if you don't help us, it is right but please don't beat us
पाकिस्तान के प्रांत बलूचिस्तान में पिछले दिनों आए भूकंप से प्रभावित लोगों तक पर्याप्त मदद नहीं पहुंच रही है और मदद की इस कमी के चलते बहुत से लोग खुले आसमान के तले जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं।
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इस भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके आवारान में शुक्रवार को लोगों के सब्र का पैमाना छलक उठा जिसके बाद राहत शिविरों मे रह लोगो ने राहत सामग्री वाले दो ट्रकों को लूट लिया।
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आवारान के डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय में जैसे ही प्रांतीय आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से भेजे गए ट्रक पहुंचे तो भूकंप पीड़ित भी वहां राहत सामग्री मिलने की उम्मीद में जमा होने शुरू हो गए।
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सामग्री बांटी ही जा रही थी कि तभी एक धूल भरी आंधी चली और इस दौरान अचानक गोलियां चलने की आवाजें आईं लेकिन धूल के कारण समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है।

जब धूल हटी तो पता चला कि लोग ट्रकों के ऊपर चढ़े हुए हैं और तंबू उतार रहे है जबकि फायरिंग करने वाले कर्मचारियों पर लोग गुस्सा करते देखे गए।

तंबुओं से भरे दो ट्रक लम्हों में खाली हो गए, जिसके बाद लोग तीसरे ट्रक की तरफ बढ़ने लगे, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया।

'हज़म करना चाहते हैं' कुछ देर में वहां पुलिस वाले पहुंच गए जिन्होंने डिप्टी कमिश्नर ऑफिर के प्रवेश द्वार को बंद कर दिया और लोगों को डंडे दिखाने और मारने लगे।

इस गर्मागर्मी में कुछ लोगों को चोटें आईं। घायलों में अब्दुल हामिद वाहिद भी शामिल हैं। उन्होंने प्रशासन के रवैये को अपमानजनक बताया।

वो कहते हैं, “घर अल्लाह ने गिराया है, अब चाहे दोबारा गिर जाए, तंबू नहीं चाहिए। राहत सामग्री नहीं देते तो न दें, मारें तो नहीं। गाली क्यों दी। हम बलूच ये बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं।”

"सरकार तो लोगों की मदद करना चाहती है लेकिन ये बड़े साहब पीड़ितों की राहत सामग्री को हज़म करना चाहते हैं।"

भूकंप पीड़ित

एक व्यक्ति ने अपनी जख्मी टांग, फटे पुराने कपड़े और पैरों में पुरानी चप्पलें दिखाते हुए सवाल किया कि क्या वो गरीब नहीं है। उन्होंने कहा, “सरकार तो लोगों की मदद करना चाहती है लेकिन ये बड़े साहब उनकी राहत सामग्री को हज़म करना चाहते हैं।”

इस घटना से चंद घंटों पहले एक फर्लांग की दूर पर केंद्रीय गृह मंत्री चौधरी निसार, पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज़ शरीफ, सिंध प्रांत के मुख्यमंत्री सैयद कायम अली शाह और बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री अब्दुल मालिक भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए एक बैठक कर रहे थे।

राहत में बाधा सहायक कमिश्नर मुमताज अहमद ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने कई क्षेत्रों में राहत सामग्री भिजवाई है। उनके मुताबिक वो दूर दराज के इलाकों प्राथमिकता दे रहे हैं और ‘ये जो लूट मार कर रहे हैं, ये शहर के लोग हैं जिनसे सब्र नहीं हो रहा है।’

उन्होंने कहा, “प्रभावित इलाके दूर हैं और रास्ते कच्चे हैं। इसलिए राहत सामग्री पहुंचने में देर हो रही है। इसके अलावा लोग कानून व्यवस्था की ख़राब स्थिति से भी डरे हुए हैं, लेकिन ये कोई इतनी बड़ी समस्या भी नहीं है।”

भूकंप प्रभावित इलाकों में गैर सरकारी संगठनों की गतिविधियां भी सीमित हैं। एक स्थानीय नागरिक डॉक्टर नासिर ने शिकायत करते हुए कहा कि मीडिया का किरदार भी मददगार नही है क्योंकि टीवी चैनल ऐसी रिपोर्टें दिखा रहे हैं जिससे लगता है कि राहत सामग्री लाने वाली टीमों पर हमले हो रहे हैं।


कुछ गैर सरकारी संगठनों का कहना है कि सुरक्षा एजेंसी फ्रंटियर कोर (एफ़सी) उन्हें चौकियों पर तंग कर रही है। एफ़सी का कहना है कि राहत सामग्री उनके हवाले की जाए क्योंकि वहीं उसे बांटेगी।

ऐसे में कई भूकंप प्रभावित इलाकों में अब तक गैर सरकारी संगठन नहीं पहुंच पाए हैं।

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