फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   Hitler, the pioneer in making of fighter jets

उड़न तश्तरी की तरह विमान बनाना चाहता था हिटलर

Sat, 06 Feb 2016 05:56 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 06 Feb 2016 05:56 PM IST
विज्ञापन
Hitler, the pioneer in making of fighter jets

अपने जमाने का मशहूर जर्मन चांसलर अडॉल्फ हिटलर उड़न तश्तरी की तरह विमान बनाना चाहता था। उसने दूसरे विश्व युद्द के समय इसका एक प्रोटोटाइप का निर्माण कर सफल उड़ान भी भर ली थी। लेकिन इससे पहले की वह इस योजना में कामयाब हो पाता और दुनिया को ये विमान दे पाता दुनिया से रुखसत हो गया। हालांकि उसके इस प्रोटोटाइप का बनाना ये दर्शाता है कि उसकी सोच आज के डिजाइनर्स से कितने आगे की थी।

विज्ञापन


उसके इसी प्रोटोटाइप पर शोध करते हुए पिछले वर्ष दिसंबर 2015 में यूएस की एयरक्राफ्ट कंपनी नॉर्थरोप ग्रुम्मन ने भविष्य के लड़ाकू विमान का एक क्रांतिकारी डिजाइन पेश किया है। इस विमान को ऐसे डिजाइन किया गया है कि जो सैद्धांतिक रूप से आने वाले वर्षों में वॉर जोन प्रवेश कर सकेंगे।
विज्ञापन


इस कांसेप्ट के अनुसार ये विमान फाइटर जहाज न दिखकर एक उड़न तश्तरी की तरह नजर आएंगे। एक एविएशन एक्सपर्ट के अनुसार इसे 'फ्लाईंग विंग' कहा जा रहा है क्योंकि इसमें फिन ( विमान का वो पिछला हिस्सा जो हवा का दबाव और दिशा को नियंत्रित करता) नहीं लगा है जिससे इस विमान का आकार कम हो रहा है और दुश्मन के राडार इसे आसानी से कैच नहीं कर सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

'होर्टन हो 229' के एयरोडायनमिक्स को समझना आसान नहीं

Hitler, the pioneer in making of fighter jets

लेकिन क्या आप जानते हैं कि नाजियों के द्वारा दूसरे विश्व युद्द के दौरान विकसित विमान 'होर्टन हो 229' आज के आधुनिक विमान टेक्नॉलोजी से कहीं आगे थी। उसके एयरोडायनमिक्स को समझना इतना आसान नहीं है और इस पर नासा के वैज्ञानिक लगातार कार्य कर रहे हैं।

होर्टन भाइयों ने इसकी डिजाइनिंग का कार्य 1930 में शुरू किया था जब जर्मनी पर प्रथम विश्व युद्द की एक ट्रीटी के अनुसार एयरफोर्स फ्लीट रखने पर पाबंदी थी। इससे बचने के लिए होर्टन भाइयों ने स्पोर्टिंग क्लब हो ज्वाइन किया और उन लोगों ने इस प्रकार जर्मन एयरफोर्स लुफ्टवेफ की नीव रखी। इसके बाद दोनों ने मिलकर 'होर्टन हो IV ग्लाइडर' को बनाया। जब तक 'होर्टन हो IV ग्लाइडर ' को टेस्‍ट किया गया वॉल्टर होर्टन लुफ्टवेफ के फाइटर पायलट के तौर पर ब्रिटेन में युद्द कर चुके थे।

इस युद्द में जर्मन सेना की हार हो गयी और ये वह समय था जब वॉल्टर ने जर्मनी के लिए कुछ नया करने की सोची। इसके बाद लुफ्टवेफ के हेड ने एक नए टाइप के विमान का निर्माण करने की बात कही जो 1,000 किलो बम, 1600 किलोमीटर, 1,000 किमी / घंटे की रफ्तार से ले जाने की क्षमता रखता हो और इसी को डिजाइन करते हुए 'होर्टन हो 229' को बनाने में होर्टन भाई कामयाब हुए।

उन्होंने तीन डिजाइन तैयार किए। पहला बिना इंजन वाला सिर्फ ग्लाइडर था, दूसरे में जेट इंजन लगाया था और इसने दो फरवरी 1945 को सफल उड़ान भरी थी, लेकिन दूसरी उड़ान सफल नहीं रही थी और ये क्रैश हो गया था जिसमें पायलट की मौत हो गयी थी। ली कहते है इस उड़ान से ये साफ हो गया था कि प्लेन का डिजाइन ठीक है क्योंकि विमान टेक ऑफ कर सकता था, उड़ सकता था और लैंड कर सकता था। ली को इस विमान के बारे में खासी जानकारी है क्योंकि वह ही है जिन्होंने 'होर्टन हो 229 V3'के प्रोटोटाइप हो संभाल कर रखा हुआ है।

राडार को चकमा दे सकेगा 'फ्लाईंग विंग'

Hitler, the pioneer in making of fighter jets

अब जो 'फ्लाईंग विंग' का निर्माण किया जा रहा है उसे बनाने में डिजाइनर्स को छीकें आ रही हैं क्योंकि जरूरी नहीं की जो कागज में आसानी से बन जाए असलियत में भी वह तैयार किया जा सके।

ये विमान आज के विमानों से ‌भिन्न है क्योंकि बिना फिन के विमान को हवा में बनाए रखना काफी मुश्‍किल कार्य है क्योंकि फिन हवा के दबाव को नियंत्रित करने में उपयोगी होता है जिससे विमान सीध में उड़ता रहता है।

वहीं ये टैक्नीक कारगर हो जाती है तो इसके फायदे भी हैं, जैसे पहले तो ये राडार की पकड़ में नहीं आएगा। क्योंकि जब फिन नहीं होगी तो राडार की वेव बाउंस बैक नहीं हो सकेगी जिससे वह राडार की नजर से बच सकेगा। दूसरा वह सपाट आकार के चलते कम जगह लेते हैं और ज्यादा माइलेज देते हैं। तीसरा हल्का होने के कारण वह तेज गति से चल सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed