धमाकों के बाद तुर्की में तीन दिन का शोक
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तुर्की के प्रधानमंत्री अहमत दावुतोग्लु ने राजधानी अंकारा में एक शांति रैली के दौरान हुए धमाकों के बाद देश में तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। शनिवार को हुए इन धमाकों में 95 लोग मारे गए जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हैं।
ये तुर्की में इस तरह का अब तक का सबसे घातक हमला है। घटनास्थल की टीवी फुटेज में लोगों को अफरा-तफरी में भागते हुए और कइयों को जमीन पर खून में लथपथ पड़े देखा जा सकता है।
ये धमाके ऐसे समय में हुए हैं जब तीन हफ्ते बाद तुर्की में आम चुनाव हैं। इससे पहले वहां इसी साल जून में भी चुनाव हुए लेकिन खंडित जनादेश के बाद सरकार बनाने की सभी कोशिशें नाकाम रही थीं।
तुर्की के प्रधानमंत्री ने कहा है कि ऐसे सबूत हैं कि इन धमाकों को दो आत्मघाती हमलावरों ने अंजाम दिया है।
कौन है जिम्मेदार?
तुर्की के राष्ट्रपति रैचेप तैयप एर्दोआन ने इन धमाकों को 'आतंकवादी कार्रवाई' बताते हुए अपनी तुर्कमेनिस्तान की प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी है।
धमाके शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन के पास तब हुए जब वहां वामपंथी संगठनों ने एक रैली बुलाई हुई थी। इस रैली में कुर्द अलगाववादी संगठन पीकेके और तुर्की की सरकार के बीच जारी हिंसा को खत्म करने की मांग की जा रही थी।
कुर्द समर्थक पार्टी एचडीपी भी इस रैली में हिस्सा ले रही थी। धमाकों के बाद एक बयान जारी कर पार्टी ने कहा कि उसे लगता है कि धमाकों में उसके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया है। एचडीपी की नेता सेलाहतीन देमीरतास ने इन धमाकों के लिए तुर्की के अधिकारियों को जिम्मेदार बताया है और अपनी सभी चुनावी रैलियां रद्द कर दी हैं।
उन्होंने तुर्की की सरकार को 'हत्यारा' बताते हुए कहा कि उनके हाथ खून से सने हैं। कुर्द अलगाववादी संगठन पीकेके और तुर्की के सरकार के बीच जुलाई में संघर्षविराम टूटने के बाद दोनों पक्षों के बीच हिंसा और तनाव में वृद्धि देखने को मिली है।