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मुर्सी समर्थकों को हटाने की तैयारी

Mon, 12 Aug 2013 05:52 PM IST
Updated Mon, 12 Aug 2013 05:52 PM IST
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government is preparing to crackdown morsi supports

मिस्र से आ रही खबरों के मुताबिक वहां के अंतरिम प्रशासन ने अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के समर्थकों को हटाने की योजना बनाई है।

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गृह मंत्रालय के एक सूत्र ने बीबीसी को बताया कि प्रदर्शन शिविरों को खाली कराने के लिए सुबह होने से पहले ही अभियान चलाया जाएगा।

सुरक्षा बल शुरूआत में प्रदर्शनकारियों को पूर्वी काहिरा में राबा अल-अदाविया मस्जिद और पश्चिम में नाहदा चौक पर जमा होने से रोकेंगे।

दूसरी ओर मुर्सी की पार्टी मुस्लिम ब्रदरहुड ने खूनखराबा होने की चेतावनी दी है।

मुर्सी के इस्तीफे को लेकर व्यापक प्रदर्शन के बाद तीन जुलाई को सेना ने मिस्र के पहले लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए नेता को अपदस्थ कर दिया था। उसके बाद हुए संघर्ष में 250 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें से ज्यादातर मुर्सी समर्थक हैं।
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सेना की घेराबंदी
आंतरिक मामलों के मंत्रालय के सूत्रों ने बताया है कि सुबह होने से पहले ही दो विरोध-प्रदर्शन शिविरों को बिखेरने के लिए अभियान चलाया जाएगा। काहिरा से बीबीसी की कैरोलीन व्याट ने यह जानकारी दी।
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इन इलाकों में आवाजाही रोकने के लिए सुरक्षा बल आसपास के इलाकों की घेराबंदी कर सकते हैं।

राबा अल-अदाविया मस्जि़द के पास स्थित शिविर सैनिक स्थलों से घिरा हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने रेत के बोरों और बड़े पत्थरों से इलाके की घेराबंदी कर दी है।

प्रदर्शनकारियों ने छापे की आशंका को देखते हुऐ हेलमेट पहने हुए और हाथों में लाठी लिए हुए लोगों को तैनात किया है।

मुस्तफा अल-खतीब पर एक प्रदर्शनकारी ने समाचार एजेंसी रायटर को बताया कि, “हम डटे हुए हैं और मानसिक रूप से किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं, और हमने प्रदर्शन स्थल और वहां आने जाने के रास्ते को सुरक्षित बना दिया है।”

प्रदर्शनकारी डटे
बीबीसी संवाददाता के मुताबिक अभी यह साफ नहीं है कि क्या यह चेतावनी कुछ प्रदर्शनकारियों को मैदान छोड़ने के लिए मन बनाने को लेकर है। ऐसे में मुस्लिम ब्रदरहुड ने कमर कस ली है।


वरिष्ठ मुस्लिम ब्रदरहुड नेता फरीद इस्लाम ने कहा, “हम सैन्य नेताओं को एक संदेश देना चाहते हैं। मिस्र के लोगों का जोर क्रांति को जारी रखने पर है... और लोग सभी चौकों पर जमा होने की कोशिश करेंगे।”

इससे पहले रविवार को मुर्सी समर्थकों ने नए सिरे से सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने का ऐलान किया था।

काहिरा में मार्च के दौरान कई महिलाएँ सेना प्रमुख जनरल अब्दुल फतह अल-सीसी के विरोध में नारे लगा रही थीं।

बीबीसी संवाददाता ने बताया है कि टकराव की स्थिति पैदा हो गई है और कई लोगों और अधिक खूनखराबा होने का भय है।

इसबीच ब्रदरहुड की फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी (एफजेपी) ने बीबीसी से कहा कि वह किसी भी मध्यस्थ के साथ किसी भी तरह की बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने शीर्ष मौलवी शेख अहमद अल-तायेब की निष्पक्षता पर संदेह जताया है।

शीर्ष मौलवी ने मुर्सी को हटाने के लिए सैन्य हस्तक्षेप का समर्थन किया है।

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