बच्ची ने कुरान याद कर शरणार्थियों की मदद की
- पांच साल की उम्र में ही कुरान याद करना शुरू किया
- बच्ची ने चंदे में जमा किए 3500 पाउंड
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मिलिए हाफिजा मारिया असलम से जिन्होंने पांच साल की उम्र में ही कुरान याद करना शुरू किया था। बस दो-तीन सालों में, उन्हें कुरान याद हो गया। इसकी बदौलत उन्होंने सीरिया से यूरोप आये शरणार्थियों के लिए साढ़े तीन लाख रुपए भी जमा किए।
बीबीसी ने मरिया से मुलाकात की। फेसबुक पर लगभग पांच हजार लोग उनके फॉलोअर हैं। मारिया अपने आस-पड़ोस में काफी लोकप्रिय हैं। वो लंदन के पास लूटन में रहती हैं। जब मारिया पांच साल की थीं तब उन्होंने कुरान पढ़ना शुरू किया, देखते ही देखते उन्हें पहले तीस अध्याय याद हो गए और उसके बाद उन्होंने कुरान की पढ़ाई जारी रखी।
उन्होंने बीबीसी को बताया, "एक मुस्लिम होने के नाते कुरान पढ़ना मेरी जिम्मेदारी है। लेकिन पढ़ते-पढ़ते मुझे धीरे-धीरे कुरान याद हो गया।"
पांच साल की बच्ची ने चंदे में जमा किए 3500 पाउंड
उनकी माँ शबनम ने बताया कि इसकी शुरुआत सीरिया से आए शरणार्थियों के लिए पैसे जुटाने से हुई। शबनम ने कहा, "मैंने मारिया से पूछा कि क्या वो कुरान का एक अध्यय याद करने के लिए तैयार है।
मैंने उससे कहा कि अगर वो ऐसा करती है तो स्पॉन्सरशिप से चंदा इकट्ठा किया जा सकता है और क्या आप यकीन कर सकते हैं कि पांच साल की बच्ची ने 3500 पाउंड जमा कर लिए। तभी मुझे लगा कि इस लड़की में याद करने की बहुत क्षमता है।"
दूसरे बच्चों को भी प्रेरणा मिले इसलिए मारिया ने फेसबुक पर अपना पेज सेटअप किया है। सैकड़ों लोगों ने मारिया और उसके परिवार से संपर्क किया है। कुरान में 114 अध्याय हैं और 75 हजार शब्द हैं, और दो साल की कड़ी मेहनत के बाद मारिया असलम इसे पूरी तरह से याद करने में कामयाब हुईं।