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ईरान के परमाणु कार्यक्रम से यूरोपीय यूनियन खुश
Updated Sat, 11 Jan 2014 02:45 PM IST
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यूरोपीय संघ ने कहा है कि ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर हुए समझौते को लागू करने की दिशा में "बहुत अच्छी प्रगति" हो रही है।
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यूरोपीय संघ की विदेश मामलों पर काम करने वाली सेवा ने कहा है, "यह मामला अब राजधानियों में राजनीतिक स्तर पर वैधता दिए जाने के चरण पर है।"
इससे पहले ईरान के उप विदेश मंत्री का ईरान के सरकारी मीडिया में बयान छपा था कि सभी मह्त्वपूर्ण मुद्दे सुलझा लिए गए हैं।
पिछले साल नवंबर में ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम रोकने को तैयार हुआ था। बदले में ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी गई थी।
बारीकियों पर चर्चा
हाल ही के हफ़्तों में वार्ताकार क्लिक करें पी5 समूह (अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन, रूस और जर्मनी) के प्रतिनिधियों से समझौता लागू करवाने की तकनीकी बारीकियों पर चर्चा के लिए मिल रहे हैं।
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ ईरान के उप विदेशमंत्री ने इससे पहले सरकारी टीवी चैनल से कहा था, "हमने उन सभी बातों का हल निकाल लिया है, जिन पर असहमति थी।"
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हालांकि उन्होंने यह भी कहा, "राजधानियों से अंतिम सत्यापन" मिलने पर ही इस समझौते का लागू होना निर्भर करता है।
उन्होंने बताया कि अभी विशेषज्ञ स्तर पर किसी बैठक की योजना नहीं है।
अमरीकी विदेश मंत्रालय का भी कहना है कि उनकी तरफ से भी "अच्छी प्रगति" हुई है।
'अंतिम निर्णय'
ईरान परमाणु समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ विदेश मंत्रालय प्रवक्ता प्रवक्ता जेन साकी ने कहा, "कुछ अहम मुद्दे रहे हैं, पर इस वक़्त सभी बातों पर अंतिम निर्णय लेने की ख़बरें ग़लत हैं।"
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पश्चिमी देश अरसे से ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश करने के आरोप लगते आए हैं, लेकिन ईरान कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
ईरान के साथ अमेरिका और पांच अन्य वैश्विक ताक़तों के समझौते से भारत को चौतरफ़ा फ़ायदा हो सकता है।
कुछ साल पहले भारत ईरान से ख़ासी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता था।
'भारत को फ़ायदा'
भारत में जो तेल आयात होता था, उसमें बड़ा हिस्सा ईरान से आने वाले तेल का था, जबकि ईरान के तेल निर्यात में भारत को बड़ा हिस्सा मिलता था।
साऊथ एशिया क्लियरिंग के ज़रिए डॉलर रहित व्यापार भारत के लिए काफ़ी आकर्षक था।
मगर पूरे विश्व पर ईरान से तेल निर्यात न करने के अमरीकी दबाव के कारण भारत की इस तेल व्यापार में भागीदारी ख़ासी घट गई है।
ईरान और अमेरिका के नेतृत्व में वैश्विक ताक़तों से हुए समझौते के तहत ईरान पांच प्रतिशत शुद्धता से ज़्यादा यूरेनियम का संवर्द्धन रोक देगा और 20 फ़ीसदी या अधिक संवर्द्धित यूरेनियम नष्ट कर देगा।
इसके बाद ईरान के तेल और उससे हुई कमाई पर लगे प्रतिबंधों में संभावित ढील से भारत की ईरान से तेल आयात करने की संभावना को बल मिला है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा मध्य पूर्व और दुनिया के लिए भी अहम है।