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मालदीव में आपातकाल 30 दिनों के लिए बढ़ा, संसदीय कमेटी ने किया राष्ट्रपति का समर्थन

Tue, 20 Feb 2018 06:08 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो/माले
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो/माले Updated Tue, 20 Feb 2018 06:08 AM IST
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Emergency increased in Maldives for 30 days, parliamentary committee support Abdulla Yameen

मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन के आग्रह पर संसदीय कमेटी ने देश में आपातकाल को 30 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। इसके साथ ही राष्ट्रपति को अपनी शक्ति सुदृढ़ करने की अनुमति मिल गई है। पीपुल्स मजलिस की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की असाधारण बैठक के दौरान संसद ने राष्ट्रपति यमीन को आपातकाल की अवधि बढ़ाने की मंजूरी दी। 

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मालदीव की संसद पीपुल्स मजलिस के डिप्टी स्पीकर सांसद मूसा मानिक ने सोमवार को बैठक के दौरान संसदीय कमेटी द्वारा आपातकाल बढ़ाने की मंजूरी पत्र मिलने की पुष्टि की है। इसके साथ ही देश में 30 दिनों के लिए आपातकाल को बढ़ा दिया गया है। आपातकाल की अवधि को बढ़ाने के फैसले को 85 सदस्यीय संसद में सोमवार देर रात मतदान के बाद स्वीकार कर लिया गया। 
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फैसले के पक्ष में 38 सांसदों ने मतदान किया। इसके बाद इस फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा समिति को क्रियान्वयन के लिए आगे बढ़ा दिया गया। वहीं, सभी विपक्षी सांसदों ने मतदान का बहिष्कार किया। आपातकाल बढ़ाने का प्रस्ताव जब पारित हो रहा था तब मजलिस में 43 सांसद मौजूद थे। 
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सनद रहे सुप्रीम कोर्ट द्वारा 9 विपक्षी नेताओं की रिहाई के आदेश के बाद यामीन ने 5 फरवरी को 15 दिनों के लिए आपातकाल की घोषणा की थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिहा किए गए नेताओं में पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद भी शामिल थे। आपातकाल की घोषणा के तुरंत बाद सुप्रीम कोर्ट की अन्य पीठ द्वारा पहले के फैसले को रद्द कर दिया गया। इसके साथ ही मालदीव के लोकतंत्र में एक काला अध्याय जुड़ गया।

राष्ट्रपति यमीन के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं नशीद 

मोहम्मद नशीद मालदीव के मौजूदा राष्ट्रपति यमीन के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं। दुनिया में नशीद को एक पत्रकार और राजनेता के तौर पर जाना जाता है। वर्ष 1990 में नशीद की पत्रिका पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और उन्हें नजरबंद कर दिया गया था। वर्ष 1992 और 1993 के बीच भी उन्हें कैद कर लिया गया था। 


लोकतांत्रिक सुधारों के बाद वर्ष 2008 में चुनाव जीतकर नशीद मालदीव के राष्ट्रपति बने थे। लेकिन वर्ष 2012 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। तब मोहम्मद नशीद ने यह आरोप लगाया था कि उन पर सेना और पुलिस के जरिये दबाव बनाकर इस्तीफा दिलवाया गया। नशीद ने इसे तख्तापलट कहा था।

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