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मिस्र : राष्ट्रपति का विचित्र फरमान, काहिरा की इमारतों को मटमैले-नीले रंग से नहीं रंगने पर होगी सजा
Thu, 24 Jan 2019 02:04 PM IST
अमर शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 24 Jan 2019 02:04 PM IST
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मिस्र की राजधानी काहिरा
- फोटो : Pixabay
ममी और पिरामिड... इन शब्दों को सुनते ही मिस्र का ध्यान आ जाता है। प्राचीन इतिहास और सभ्यता को संजोए रखे इस देश के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने एक विचित्र फरमान जारी किया है। अल-सिसी का आदेश है कि नील नदी के किनारे बसे राजधानी काहिरा की सभी इमारतें मटमैले रंग की दिखनी चाहिए। और नदी के किनारे बसे इलाकों में इलारतें नीले रंग की होनी चाहिए। यही नहीं इमारतों के रंग-रोगन काम भी मार्च महीने तक हो जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों और मकान मालिकों को सजा दी जाएगी।
लोगों को करनी पड़ेगी जेब ढीली
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी के आदेश के मुताबिक काहिरा के लोगों को इस काम के लिए अपनी जेब ढीली करनी होगी। इस काम के लिए सरकार किसी को कोई फंड नहीं देगी। राष्ट्रपति के फरमान के बाद लोगों के बीच हड़कंप मच गया है। लोग अपने रोज के काम को छोड़कर अपने घरों और इमारतों को रंगने में जुट गए हैं। काहिरा शहर का बड़ा हिस्सा नील नदी के किनारे पर बसा है।
इमारतों को रंगना राष्ट्रीय परियोजना का हिस्सा
राष्ट्रपति अल-सिसी का मानना है कि काहिरा में एक रंग की इमारतें होने से शहर में एकरूपता आएगी। इससे शहर की बनावट एक जैसी लगेगी और एक अलग पहचान बनेगी। अभी शहर की इमारतें बहुत ही बेतरतीब दिखाई देती हैं।
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राष्ट्रपति की राय का प्रधानमंत्री मोस्तफा मेडबोली ने मंत्रिमंडल की बैठक में समर्थन करते हुए कहा, "सभी इमारतों का रंग मटमैला होना चाहिए। अगर मार्च के महीने तक ऐसा नहीं हुआ, तो मकान के मालिक को सजा जरूर दी जाएगी।"
सरकार ने लिए हैं कई अजीबोगरीब फैसले
मिस्र की सरकार कड़े फैसले लेने के लिए काफी बदनाम है। देश में जरूरी चीजों पर सब्सिडी में कटौती की जा चुकी है। सरकार ने मौन विरोध जताने वाले हजारों लोगों को गिरफ्तार किया था। गरीबों को शहरों से बाहर करने के फैसला से भी सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। गरीबों को शहर से बाहर भेजने का काम अभी भी जारी है। सरकार के इन फैसलों की वजह से लोग पहले से ही गुस्से में हैं।
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लोगों को करनी पड़ेगी जेब ढीली
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी के आदेश के मुताबिक काहिरा के लोगों को इस काम के लिए अपनी जेब ढीली करनी होगी। इस काम के लिए सरकार किसी को कोई फंड नहीं देगी। राष्ट्रपति के फरमान के बाद लोगों के बीच हड़कंप मच गया है। लोग अपने रोज के काम को छोड़कर अपने घरों और इमारतों को रंगने में जुट गए हैं। काहिरा शहर का बड़ा हिस्सा नील नदी के किनारे पर बसा है।
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इमारतों को रंगना राष्ट्रीय परियोजना का हिस्सा
राष्ट्रपति अल-सिसी का मानना है कि काहिरा में एक रंग की इमारतें होने से शहर में एकरूपता आएगी। इससे शहर की बनावट एक जैसी लगेगी और एक अलग पहचान बनेगी। अभी शहर की इमारतें बहुत ही बेतरतीब दिखाई देती हैं।
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राष्ट्रपति की राय का प्रधानमंत्री मोस्तफा मेडबोली ने मंत्रिमंडल की बैठक में समर्थन करते हुए कहा, "सभी इमारतों का रंग मटमैला होना चाहिए। अगर मार्च के महीने तक ऐसा नहीं हुआ, तो मकान के मालिक को सजा जरूर दी जाएगी।"
सरकार ने लिए हैं कई अजीबोगरीब फैसले
मिस्र की सरकार कड़े फैसले लेने के लिए काफी बदनाम है। देश में जरूरी चीजों पर सब्सिडी में कटौती की जा चुकी है। सरकार ने मौन विरोध जताने वाले हजारों लोगों को गिरफ्तार किया था। गरीबों को शहरों से बाहर करने के फैसला से भी सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। गरीबों को शहर से बाहर भेजने का काम अभी भी जारी है। सरकार के इन फैसलों की वजह से लोग पहले से ही गुस्से में हैं।