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मिस्र के राष्ट्रपति ने कहा- मस्जिद पर हुए हमले का बदला लिया जाएगा
बीबीसी,हिंदी
Updated Sat, 25 Nov 2017 03:08 PM IST
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राष्ट्रपति अल-सीसी
- फोटो : File
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मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल-सीसी ने शुक्रवार को सिनाई में हुए हमले का बदला लेने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि अब मिस्र के लोग पहले से भी जयादा मजबूती से आतंकवाद का मुकाबला करेंगे।
शुक्रवार को मिस्र में उत्तरी प्रांत सिनाई में करीब 40 बंदूकधारियों ने एक मस्जिद में नमाज अदा कर रहे लोगों पर हमला कर दिया था। जिसने भी बाहर निकलने की कोशिश की, जीपों पर सवार होकर आए बंदूकधारियों ने उसे गोली मार दी।
मिस्र के सरकारी टीवी चैनल के मुताबिक इस हमले में कम से कम 235 लोगों की मौत हो गई है और 130 अन्य घायल हुए हैं। मिस्र में तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है।
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मिस्र के राष्ट्रपति के कड़े तेवर
घटना के बाद मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल सीसी ने टीवी पर दिए संबोधन में इस हमले में मारे गए और जख्मी हुए लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना का बदला लिया जाएगा।
ये भी पढ़ेंः मिस्र में ISIS लड़ाकों के साथ मुठभेड़ में 55 पुलिसकर्मी मारे गए : सूत्र
मिस्र के राष्ट्रपति ने कहा, "सेना और पुलिस हमारे शहीदों का बदला लेगी। आने वाले वक्त में सुरक्षा और स्थिरता स्थापित करने के लिए पूरा जोर लगाया जाएगा।" मिस्र सेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस हमले की जवाबी कार्यवाही में वायुसेना ने जेट से उन जगहों पर बम गिराए हैं जहां चरमपंथियों ने हथियार और गोला बारूद सुरक्षित कर रखा था।
अधिकारियों के अनुसार हमले में इस्तेमाल किए गए बहुत से वाहनों की पहचान कर उन्हें नष्ट किया जा चुका है। अल-आरिश के क़रीब अल-रावदा में जिस मस्जिद पर हमला हुआ है, वह सूफी मत मानने वालों के बीच लोकप्रिय थी।
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शुक्रवार को मिस्र में उत्तरी प्रांत सिनाई में करीब 40 बंदूकधारियों ने एक मस्जिद में नमाज अदा कर रहे लोगों पर हमला कर दिया था। जिसने भी बाहर निकलने की कोशिश की, जीपों पर सवार होकर आए बंदूकधारियों ने उसे गोली मार दी।
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मिस्र के सरकारी टीवी चैनल के मुताबिक इस हमले में कम से कम 235 लोगों की मौत हो गई है और 130 अन्य घायल हुए हैं। मिस्र में तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है।
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मिस्र के राष्ट्रपति के कड़े तेवर
घटना के बाद मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल सीसी ने टीवी पर दिए संबोधन में इस हमले में मारे गए और जख्मी हुए लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना का बदला लिया जाएगा।
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मिस्र के राष्ट्रपति ने कहा, "सेना और पुलिस हमारे शहीदों का बदला लेगी। आने वाले वक्त में सुरक्षा और स्थिरता स्थापित करने के लिए पूरा जोर लगाया जाएगा।" मिस्र सेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस हमले की जवाबी कार्यवाही में वायुसेना ने जेट से उन जगहों पर बम गिराए हैं जहां चरमपंथियों ने हथियार और गोला बारूद सुरक्षित कर रखा था।
अधिकारियों के अनुसार हमले में इस्तेमाल किए गए बहुत से वाहनों की पहचान कर उन्हें नष्ट किया जा चुका है। अल-आरिश के क़रीब अल-रावदा में जिस मस्जिद पर हमला हुआ है, वह सूफी मत मानने वालों के बीच लोकप्रिय थी।
कैसे किया गया हमला?
मिस्र हमला
- फोटो : File
शुक्रवार को दर्जनों बंदूकधारी सिनाई स्थित एक मस्जिद के बाहर आए और नमाज अदा कर रहे लोगों पर गोलियां बरसाने लगे। जिस किसी ने भी बचकर निकलने की कोशिश की बंदूकधारियों ने उस पर गोली मार दी।
ऐसा बताया गया जा रहा है कि हमलावरों ने मस्जिद के बाहर खड़े वाहनों पर आग लगा दी थी, जिससे लोगों को बाहर निकलने से रोका जा सके। उन्होंने पीड़ितों की मदद करने की कोशिश कर रही एम्बुलेंस पर भी गोलियां चलाई। आधुनिक मिस्र के इतिहास में यह अभी तक का सबसे खतरनाक चरमपंथी हमला है।
किसने किया इतना बड़ा हमला?
अभी इस हमले की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है मगर तहरीर इंस्टिट्यूट ऑफ मिडल ईस्ट पॉलिसी में शोधार्थी टिमोथी कैलदस मानते हैं कि इसके पीछे इस्लामिक स्टेट का हाथ हो सकता है। थिमोथी कैलदस ने कहा, "ऐसा लगता है कि इसके पीछे आईएसआईएस हो सकता है। पिछले साल से वो आम लोगों को निशाना बना रहे हैं और खासकर ईसाइयों को।"
उन्होंने कहा, "ये एक सूफी मस्जिद थी, जिसे आईएसआईएस अपने धर्म के खिलाफ मानता है। उत्तरी सिनाई में बहुत से लोग आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई में सरकार की मदद भी कर रहे थे। ऐसे में हमले की एक वजह ये भी हो सकती है।"
माना जा रहा है कि मिस्र अब उत्तरी सिनाई में कड़ी कार्रवाई कर सकता है। पिछले दिनों यहां हुए हमले में 18 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। साथ ही, इस इलाके में रहने वाले बद्दू कबायली अपने ऊपर हुए इस हमले के बाद और खुलकर सरकार की मदद कर सकते हैं।
क्या सीसी इस विद्रोह को रोक सकते हैं?
मिस्र की सरकार के सामने यह एक बहुत बड़ी चुनौती है। अगर इस हमले के पीछे आईएस का हाथ है, तो यह बड़े क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि पिछले कुछ वक्त से आईएस ने इराक और सीरिया में अपनी पकड़ गंवाई है। हो सकता है इस तरह के हमले को अंजाम देकर आईएस अपने समर्थकों तक यह संदेश पहुंचाना चाह रहा हो कि वह अभी भी सक्रिय है और अपने दुश्मनों से लड़ रहा है।
मिस्र के राष्ट्रपति सीसी ने पहले से ही चरमपंथ के खिलाफ सख्त रुख अपनाया हुआ है। पिछले कई सालों से सिनाई प्रायद्वीप में ज़बरदस्त सैन्य कार्रवाई जारी है। हालांकि अभी तक इस कार्रवाई का कोई बेहतर नतीजा देखने को नहीं मिला है। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि वे इस जिद्दी इस्लामिक विद्रोह से निपटने के लिए कुछ नए क़दमों पर विचार कर रहे हैं या नहीं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अरब लीग के प्रमुख अहमद अबुल घेत ने इस हमले की निंदा की है। उन्होंने कहा, ''यह भयानक अपराध बताता है कि कट्टर चरमपंथी विचारधारा को मानने वालों के लिए इस्लाम बहुत ही मामूल सी चीज है।'' इसके साथ ही ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, रूस, इसराइल, ईरान, सऊदी अरब सहित कई देशों ने इस नरसंहार की निंदा की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया, ''मैं जल्दी ही मिस्र के राष्ट्रपति से बात करूंगा और इस बड़े चरमपंथी हमले पर चर्चा करूंगा, जिसमें इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। हमें और अधिक सख्त और चालाक होने की जरूरत है, और हम होकर भी रहेंगे।''
ऐसा बताया गया जा रहा है कि हमलावरों ने मस्जिद के बाहर खड़े वाहनों पर आग लगा दी थी, जिससे लोगों को बाहर निकलने से रोका जा सके। उन्होंने पीड़ितों की मदद करने की कोशिश कर रही एम्बुलेंस पर भी गोलियां चलाई। आधुनिक मिस्र के इतिहास में यह अभी तक का सबसे खतरनाक चरमपंथी हमला है।
किसने किया इतना बड़ा हमला?
अभी इस हमले की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है मगर तहरीर इंस्टिट्यूट ऑफ मिडल ईस्ट पॉलिसी में शोधार्थी टिमोथी कैलदस मानते हैं कि इसके पीछे इस्लामिक स्टेट का हाथ हो सकता है। थिमोथी कैलदस ने कहा, "ऐसा लगता है कि इसके पीछे आईएसआईएस हो सकता है। पिछले साल से वो आम लोगों को निशाना बना रहे हैं और खासकर ईसाइयों को।"
उन्होंने कहा, "ये एक सूफी मस्जिद थी, जिसे आईएसआईएस अपने धर्म के खिलाफ मानता है। उत्तरी सिनाई में बहुत से लोग आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई में सरकार की मदद भी कर रहे थे। ऐसे में हमले की एक वजह ये भी हो सकती है।"
माना जा रहा है कि मिस्र अब उत्तरी सिनाई में कड़ी कार्रवाई कर सकता है। पिछले दिनों यहां हुए हमले में 18 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। साथ ही, इस इलाके में रहने वाले बद्दू कबायली अपने ऊपर हुए इस हमले के बाद और खुलकर सरकार की मदद कर सकते हैं।
क्या सीसी इस विद्रोह को रोक सकते हैं?
मिस्र की सरकार के सामने यह एक बहुत बड़ी चुनौती है। अगर इस हमले के पीछे आईएस का हाथ है, तो यह बड़े क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि पिछले कुछ वक्त से आईएस ने इराक और सीरिया में अपनी पकड़ गंवाई है। हो सकता है इस तरह के हमले को अंजाम देकर आईएस अपने समर्थकों तक यह संदेश पहुंचाना चाह रहा हो कि वह अभी भी सक्रिय है और अपने दुश्मनों से लड़ रहा है।
मिस्र के राष्ट्रपति सीसी ने पहले से ही चरमपंथ के खिलाफ सख्त रुख अपनाया हुआ है। पिछले कई सालों से सिनाई प्रायद्वीप में ज़बरदस्त सैन्य कार्रवाई जारी है। हालांकि अभी तक इस कार्रवाई का कोई बेहतर नतीजा देखने को नहीं मिला है। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि वे इस जिद्दी इस्लामिक विद्रोह से निपटने के लिए कुछ नए क़दमों पर विचार कर रहे हैं या नहीं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अरब लीग के प्रमुख अहमद अबुल घेत ने इस हमले की निंदा की है। उन्होंने कहा, ''यह भयानक अपराध बताता है कि कट्टर चरमपंथी विचारधारा को मानने वालों के लिए इस्लाम बहुत ही मामूल सी चीज है।'' इसके साथ ही ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, रूस, इसराइल, ईरान, सऊदी अरब सहित कई देशों ने इस नरसंहार की निंदा की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया, ''मैं जल्दी ही मिस्र के राष्ट्रपति से बात करूंगा और इस बड़े चरमपंथी हमले पर चर्चा करूंगा, जिसमें इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। हमें और अधिक सख्त और चालाक होने की जरूरत है, और हम होकर भी रहेंगे।''