मिस्र में संवैधानिक मसौदे पर जनमत संग्रह

बीबीसी हिंदी Updated Sat, 15 Dec 2012 06:51 PM IST
divided egypt votes on proposed new constitution
मिस्र में संविधान के उस मसौदे पर रविवार को जनमत संग्रह हो रहा है, जिसने देश को दो हिस्सों में बांट दिया है और जिसे लेकर हिंसात्मक घटनाएं हुई हैं। राष्ट्रपति मोहम्मद मोरसी और उनकी पार्टी मुस्लिम ब्रदरहुड ने संविधान के पक्ष में जमकर प्रचार किया है।

जबकि विरोधियों का कहना है कि संविधान का मसौदा ठीक से तैयार नहीं किया गया है और प्रकृति में ये अत्यधिक इस्लामी है। संविधान के इस मसौदे पर रविवार को राजधानी काहिरा, एलेक्जेंड्रिया और आठ अन्य प्रांतों में वोटिंग हो रही है।

देश के बाकी हिस्सों में एक हफ्ते बाद संविधान पर मतदान करेंगे। इस जनमत संग्रह के लिए मतदान वाले क्षेत्रों में क़रीब 2,50,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। संविधान के मसौदे पर मतदान के लिए पांच करोड़ 10 लाख से ज़्यादा मतदाताओं को रजिस्टर किया गया है।

मतदान को दो हिस्सों में विभाजित करने की वजह ये रही कि कुछ जजों ने जनमत संग्रह का निरीक्षण करने इच्छा जताई थी। मानवाधिकार समूहों ने आशंका जताई है कि पहले चरण के मतदान के नतीजों का असर दुसरे चरण के जनमत संग्रह पर पड़ सकता है।

समर्थन और विरोध
इस जनमत संग्रह में लोगों से पूछा गया है कि वो अगले साल होनेवाले चुनाव से पहले अनिवार्य संविधान के मूल ढांचे में बदलाव का समर्थन करते हैं या नहीं। काहिरा में बीबीसी संवाददाता जॉन लेन का कहना है कि संविधान के विरोधियों का तर्क है कि ये इस्लामिक क़ानून लागू करने की ओर अत्यधिक झुका हुआ है।

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उलझे सांविधानिक प्रावधानों पर जनमत संग्रह दरअसल मतदान से कहीं अधिक है। इससे मिस्र के भविष्य की दिशा तय होनी है कि उसे इस्लामिक राष्ट्र होना चाहिए या फिर धर्मनिरपेक्ष। काहिरा के ज़मालक जिले में मतदान के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे एक बैंककर्मी एस्साम एल गुइन्डी ने कहा, "खामोश रहने का वक्त अब चला गया है। मैं इस संविधान से खुश नहीं हूं। मोरसी को देश को इस तरह बांटना नहीं चाहिए था।"

लेकिन 53 वर्षीय मतदाता अब्दुल इमाम ने न्यूज एजेंसी रॉयटर को बताया," शेखों ने हमें संविधान के पक्ष में मतदान करने को कहा है। मैंने संविधान पढ़ा है और मुझे उसके प्रावधान पसंद हैं। राष्ट्रपति के अधिकार पहले से कम हैं। वो तानाशाह नहीं हो सकते।"

हिंसक झड़पें
संविधान के विरोधी और समर्थक पक्षों ने शुक्रवार को जमकर रैलियां कीं। उत्तरी बंदरगाह नगर एलेक्जेंड्रिया में दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं जहां विरोधी पक्षों ने भाले, पत्थर और दूसरे हथियारों से एक-दूसरे पर हमला किया।

इन घटनाओं में कई कारों में आग लगा दी गई और कम से कम 15 लोग ज़ख़्मी हो गए। हिंसा की घटना तब शुरू हुई जब एक धार्मिक नेता ने मस्जिद में श्रद्धालुओं से संविधान के पक्ष में मतदान करने की अपील की।

राष्ट्रपति मोरसी ने हिंसा की संभावना को देखते हुए सेना को नागरिकों को गिरफ्तार करने का अधिकार भी दे दिया है। विपक्षी गठबंधन नेशनल साल्वेशन फ्रंट ने इस जनमत संग्रह का कड़े शब्दों में विरोध किया है लेकिन अपने समर्थकों से कहा है कि वो मतदान में ज़रूर हिस्सा लें और संविधान के खिलाफ वोटिंग करें।

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