यमन सरकार और हौसी बागियों में समझौता
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यमन सरकार और शिया हौसी विद्रोहियों ने संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में एक समझौते पर दस्तखत किए हैं जिसमें देश में जारी राजनीतिक संकट को खत्म करने का प्रयास किया गया है।
इस समझौते के मुताबिक़, एक नई सरकार का गठन किया जाएगा। इसमें हौसी विद्रोहियों को प्रधानमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार पेश करने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है।
यमन के प्रधानमंत्री मोहम्मद सलीम बसिंदवा के इस्तीफे के कुछ ही घंटों के बाद इस समझौते पर दस्तखत हुए हैं। हौसी विद्रोही नई सरकार के गठन और ईंधन पर रियायत बहाल करने की मांग कर रहे थे।
इस समझौते से हौसी विद्रोहियों को यमन सरकार में अप्रत्याशित भूमिका मिल जाएगी।
राष्ट्रपति को देना पड़ा इस्तीफा
यमन की राजधानी सना में हौसी विद्रोहियों ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण कई जगहों पर नियंत्रण कर लिया था।
यमन में 2011 में सरकार विरोधी व्यापक प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह को पद छोड़ना पड़ा था। तभी से यमन स्थिर नहीं हो पाया है।
हौसी विद्रोही वर्ष 2004 से ही समय-समय पर सरकार के खिलाफ बगावत करते रहे हैं। वो सना प्रांत में अपने लिए व्यापक स्वायत्तता चाहते हैं।
बीबीसी की अरब मामलों के संपादक सेब्सिटियन अशर का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए इस समझौते से यमन में जारी संकट का फ़ौरी तौर पर समाधान हो गया है।
हौसी विद्रोहियों की मांगें मान ली गई हैं और अब देश में एक नई सरकार होगी। ये हौसी विद्रोहियों की जीत है, लेकिन किसी को नहीं पता कि उनकी महत्वाकांक्षा, आगे कहां तक जाएगी।