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चीन का बजेगा डंका लेकिन कब...

Wed, 12 Dec 2012 03:17 PM IST
Updated Wed, 12 Dec 2012 03:17 PM IST
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china will be lead world but when

दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका के एक अध्ययन के मुताबिक अगले दो दश्कों में चीन अमेरिका को पछाड़कर विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन जाएगा।

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इस रिपोर्ट के अनुसार 2030 आते-आते दुनिया में एशिया की ताकत अमेरिका और यूरोप की मिलीजुली शक्ति से भी ज़्यादा होगी।

ये रिपोर्ट अमेरिकाकी नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल (एनआईसी) ने तैयार की है।

पूर्वानुमान करती इस रिपोर्ट में आगाह भी किया गया है कि उम्रदराज़ लोगों से भरे विकसित देशों में विकास की दर धीमी हो जाएगी और जीवनस्तर भी गिरने लगेगा।

ग्लोबल ट्रेंड्स 2030 नाम की इस रिपोर्ट का मकसद सामरिक सोच को बढ़ावा देना है और दुनिया में बदलाव लाने वाले बड़े रूझानों को समझना है। ये रिपोर्ट हर चार साल बाद प्रकाशित की जाती है।
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बदलते रूझान

नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल ने संकेत दिए हैं कि जनसंख्या, जीडीपी, सैन्य खर्च और तकनीक में निवेश को अगर मापदंड बनाया जाए तो 2030 तक एशिया की ताकत अमेरिका और यूरोप की साझा ताकत से ज़्यादा हो।
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एनआईसी के मुताबिक यूरोप, जापान और रूस की अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट जारी रहेगी।

हालांकि संस्था की रिपोर्ट का ये भी कहना है कि वो ये नहीं देख रही कि चीन अमेरिका की तर्ज पर सुपरपावर बनेगा या नहीं।

नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल के उच्च अधिकारी ने बताया, “दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनना अहम है। लेकिन ये ज़रूरी नहीं कि सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति वाला देश ही हमेशा सुपरपावर बने।”

जिन बड़े ग्लोबल रूझानों की रिपोर्ट में बात की गई है उसमें निजी स्तर पर सशक्तिकरण और पश्चिमों देशों के बजाए ताकत पूरब और दक्षिण के देशों के हाथों में जाना शामिल है।


समाज में बुज़ुर्गों की बढ़ती संख्या, बढ़ता मध्यम वर्ग और कम होते प्राकृतिक संसाधन इस रिपोर्ट के मुख्य ग्लोबल थीम हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका अगले दो दशकों में ऊर्जा के हिसाब से स्वावलंबी हो जाएगा।

साथ ही ये भी कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सवाल, नई तकनीकें और भविष्य में अमेरिका की भूमिका जैसे मुद्दों का वैश्विक परिदृश्य पर अगले 20 सालों में गहरा असर पड़ेगा। ये अध्ययन पांचवी बार किया गया है। पिछली रिपोर्ट 2008 में आई थी।

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