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चीन का सबसे लंबा अंतरिक्ष अभियान शुरु

Wed, 12 Jun 2013 07:58 AM IST
Updated Wed, 12 Jun 2013 07:58 AM IST
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china space mission

अंतरिक्ष स्टेशन के विकास की ओर कदम बढ़ाते हुए चीन ने अपने नए अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण किया है। शनजो-10 नाम का यह अंतरिक्ष यान एक मानवयुक्त यान है।

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शनजो-10 में एक महिला समेत तीन अंतरिक्ष यात्री मौजूद हैं। ये यात्री मंगोलिया के जिउक्वान सेटेलाइट सेंटर से लॉंग मार्च 2एफ रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजे गए हैं। चीन के समयानुसार वह वक्त था 17:38 (09:38 जीएमटी)।
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चीन का यह अंतरिक्ष अभियान 15 दिन का है। इन 15 दिनों में शनजो-10 एक खास अंतरिक्ष प्रयोगशाला से जुड़ेगा।

इस मिशन की कमान नेई हेईशेंग के हाथों में है। उनके अलावा चालक दल में वांग येपिंग और झांग जियायोगुआंग शामिल हैं। योजना के अनुसार ये तीनों यात्री तियानगोंग अंतरिक्ष प्रयोगशाल में दो हफ्ते बिताएंगे।
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वांग येपिंग अंतरिक्ष में जाने वाली दूसरी चीनी महिला अंतरिक्ष यात्री हैं। वे अंतरिक्ष से पृथ्वी पर मौजूद बच्चों को अंतरिक्ष से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देंगी। ऐसा चीन में पहली बार होगा।

सबसे लंबा अभियान
china space mission












अंतरिक्ष में चीन का मानवयुक्त यान भेजने का यह पांचवां और सबसे लंबा अभियान है। इसे शनजो-10 का नाम दिया गया है।

पृथ्वी से ऊपर एक स्थानीय और मानवयुक्त अंतरिक्ष स्टेशन विकसित करने की चीन की योजना की ओर यह सबसे महत्वपूर्ण और ताज़ा कदम है।

तियानगोंग एक अंतरिक्ष प्रयोगशाला है। इसे अंतरिक्ष में 2011 में भेजा गया था। इसे रिमोट कंट्रोल से संचालित किया गया था।

शनजो-9 चीन का चौथा अंतरिक्ष अभियान था, जिसमें इंसानों को अंतरिक्ष में भेजा गया।

शनजो-9

china space mission












शनजो-9 के चालक दल में चीन की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री ल्यू यांग शामिल थीं। यह यान जून 2012 में करीब 10 दिनों तक अपने मॉड्यूल से जुड़ा रहा था।

नेई और उनकी टीम की योजना इस बार अंतरिक्ष में 10 से ज्यादा दिन बिताने की है। और शनजो-9 की ही तरह इस अभियान के दौरान ऑटोमेटिक और मैनुअल दोंनो तरह के वाकिंग की भी योजना है।

चीन को उम्मीद है कि वह इस दशक के अंत तक पूरी तरह से विकसित अंतरिक्ष स्टेशन का प्रक्षेपण कर सकेगा।

अनुमान लगाया जा रहा है कि इसका भार (द्रव्यमान) 60 टन है और इसमें कई इंटरलॉकिंग मॉड्यूल मौजूद हैं।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की ही तरह इसमें सबसे लंबे समय तक रहने वाले यात्री होंगे। इन यात्रियों तक जरूरी चीजें रोबोट पहुंचाएंगे।

जोनाथन अमोस/विज्ञान संवाददाता, बीबीसी

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