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डिब्बाबंद भोजन, नई कार भ्रूण के लिए खतरनाक?

Thu, 06 Jun 2013 12:44 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Thu, 06 Jun 2013 12:44 PM IST
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canned food and new car is dangerous to fetus

क्या डिब्बाबंद भोजन, शॉवर जेल या नई कारें गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए रासायनिक तौर पर ख़तरनाक साबित हो सकते हैं। असल में ये चीज़ें उस सूची का हिस्सा हैं जिनसे गर्भवती महिलाओं को परहेज़ रखने की सलाह दी गई है।

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अब ये लिस्ट मुहैया कराने वाली रॉयल कॉलेज ऑफ ऑब्सटेट्रीशियन एंड गायनेकॉल्जिस्ट (आरसीओजी) की एक रिपोर्ट की चौतरफा आलोचना हो रही है।

आरसीओजी की रिपोर्ट में गर्भवती महिलाओं को आगाह किया गया था और कुछ घरेलू उत्पादों में मौजूद केमिकल से परहेज़ रखने को कहा गया था। इनमें डिब्बाबंद भोजन, पहले से तैयार भोजन, शॉवर जेल और नई कारें तक शामिल हैं।
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हालांकि रिपोर्ट ये भी कहती है कि सौंदर्य प्रसाधनों और डिब्बाबंद खाने-पीने की चीज़ों से भ्रूण पर होने वाले केमिकल असर के ख़तरे के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है।
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इस बारे में आलोचकों का कहना है कि ज़्यादातर सलाह गर्भवती महिलाओं के लिए मददगार नहीं हैं, या वो ग़लत हैं या फिर उनमें डर पैदा करेंगी।

उधर, आरसीओजी का कहना है कि उनके शोधपत्र में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सिर्फ जानकारी मुहैया कराई गई है क्योंकि अभी तक इस बारे में कहीं कोई जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

रिपोर्ट के लेखक मानते हैं कि ऐसा नहीं है कि सभी रसायन शिशुओं के लिए नुकसानदेह ही होंगे और अभी तक मौजूद सुबूतों को देखते हुए इसका सही-सही आंकलन कर पाना भी मुश्किल है।

उनका कहना है कि महिलाओं को इस बारे में चुनाव करते सचेत रहना चाहिए। पर उन्हें किसी "सुरक्षा खोल" में छिपने की ज़रूरत नहीं है।

'कई रसायनों का ख़तरा'
रिपोर्ट के मुताबिक गर्भवती महिलाएं अपने भोजन और रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजों के इस्तेमाल की वजह से सैकड़ों तरह के रसायनों के संपर्क में आ सकती हैं।

डॉ। मिशेल बेलिंगघम और प्रोफेसर रिचर्ड शार्प का कहना है कि बिसफेनॉल-ए और थैलेट्स जैसे रसायन खाद्य पदार्थों के डिब्बों, पेय पदार्थों और प्लास्टिक पन्नियों में लिपटे रेडीमेड खाने-पीने की चीज़ों में घुले-मिले हो सकते हैं।

शोध पत्र में कुछ ऐसी चेतावनियां भी हैं
:- सौंदर्य प्रसाधन और शौचालयों में इस्तेमाल होने वाले प्रसाधनों जैसे मॉइश्चराइज़रों, शॉवर जेल और सनस्क्रीन खतरनाक हो सकते हैं।
:- सफाई में इस्तेमाल होने वाले सामान एयर फ्रेशनर और नानस्टिक बर्तनों को भी खतरनाक चीज़ों में शामिल किया जा सकता है।
:- नवजात बच्चे का कमरा सजाने की तमन्ना रखने वाली महिलाएं ताज़ा पेंट की गंध से बचें क्योंकि इसे सूंघने से नुकसान हो सकता है।

हर्बल प्रोडक्ट भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं
रिपोर्ट में प्राकृतिक, हर्बल प्रोडक्ट्स और उनके इस्तेमाल को भी क्लीन चिट नहीं दी गई है।

प्रोफेसर शार्प कहते हैं: ''ज्यादातर प्राकृतिक रसायनों के बारे में भी हमें नहीं पता कि वो बच्चों पर कोई असर डालते हैं या नहीं। और इस बारे में कोई ठोस जानकारी पाने में लंबा वक्त लगेगा।

''यह शोधपत्र उन गर्भवती महिलाओं को एक व्यावहारिक नज़रिया देता है जो अपने बच्चे को रसायनों के असर से बचाना चाहती हैं।

साथ ही उनका कहना है कि महिलाओं को डरने की जरूरत नहीं। इनसे ज़्यादा नुकसान की आशंका नहीं है।

डॉ। बैलिंघम ने कहा कि इस शोधपत्र का मक़सद महिलाओं को स्वस्थ प्रसव की सलाह देने वाले स्वास्थ्यक्षेत्र से जुड़े लोगों को जानकारी देना है।

''हम महिलाओं को सक्षम बनाना चाहते हैं, उन्हें डराना नहीं चाहते। फिलहाल इस तरह के रसायनों के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।''

'सवालों का जवाब नहीं शोधपत्र में'
मगर इसके बावजूद कई विशेषज्ञ संस्थानों ने आरसीओजी के शोधपत्र की तुरंत आलोचना कर दी।

सेंस अबाउट साइंस की ट्रेसी ब्राउन का कहना था, ''गर्भावस्था के दौरान लोग अपना ढेर सारा समय और पैसा इस पर खर्च देते हैं कि वो कौन सी सलाह मानें, कौन से उत्पाद खरीदें या किससे बचें। ज्यादातर माता-पिता सिर्फ एक सवाल का जवाब पाना चाहते हैं कि 'क्या उन्हें चिंतित होना चाहिए'

''हम चाहते हैं कि केमिकलों और गर्भावस्था के बारे में निर्णायक बहस हो पर आरसीओजी के शोधपत्र ने इस मामले को गड़बड़ कर दिया है।''

'परेशान होने की ज़रूरत नहीं'
पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड्स सेंटर फॉर रेडिएशन, केमिकल एंड एनवायरमेंट हैज़ार्ड के निदेशक डॉ। जॉन हैरिसन ने कहा, ''हम इस बात से सहमत हैं कि गर्भवती महिलाओं को कीटनाशक या फंफूदनाशक या ऐसे ही अन्य हानिकारक रसायनों से बचना चाहिए।


हमारे पास ऐसा कोई प्रमाण नहीं जो इशारा करता हो कि निजी इस्तेमाल के प्रसाधनों में मिलने वाले रसायनों से लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है।''

कॉस्मेटिक, टायलेट्री एंड पर्फफ्यूमरी एशोसिएशन की डॉ। क्रिस फ्लावर के अनुसार ''गर्भवती महिलाएं हों या कोई और किसी को परेशान होने की ज़रूरत नहीं है।''

आरसीओजी के मुताबिक़ बाज़ार में आने से पहले हर सौंदर्य प्रसाधन और उसमें शामिल रसायनों की जांच की जाती है। कानूनन किसी भी पदार्थ के पैकेट पर उसमें शामिल रसायनों की पूरी सूचना होनी चाहिए।

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