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जिस सुई को ब्रिटेन ने असुरक्षित घोषित किया, वही भारत में हो रही इस्तेमाल

Mon, 09 Jul 2018 03:06 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर अजाल
वर्ल्ड डेस्क, अमर अजाल Updated Mon, 09 Jul 2018 03:06 PM IST
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Britain declared graseby syringe driver unsafe but Indian hospitals are using it

भारत में सरकार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। ऐसे में लोगों को भी लगता है कि जिन उपकरणों का इस्तेमाल अस्पतालों में हो रहा है वह उनके लिए सुरक्षित हैं। लेकिन क्या वाकई में ऐसा है? एक रिपोर्ट के मुताबिक तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्रिटेन में जिन सुई (सिरिंज) को असुरक्षित घोषित किया गया है, वही भारत के कुछ अस्पतालों में पहुंच रही हैं।

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ऐसा हो सकता है कि देश के कई अस्पतालों में आज भी इनका प्रयोग हो रहा है। इनका नाम है ग्रीस बाय सिरिंज ड्राइवर। 'द संडे टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक इन सिरिंज को ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस ने असुरक्षित घोषित किया था। लेकिन बावजूद इसके आज भी ये सिरिंज भारत, नेपाल और दक्षिण अफ्रीका जैसे अस्पतालों और चिकित्सक संगठनों में भेजे जा रहे हैं। सुरक्षा चेतावनियों के बाद इन्हें असुक्षित बताया गया था, यह चेतावनियां साल 1995 में जारी की गई थीं।
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इसमें हैरान करने वाली बात है अखबार को जांच में मिला एक नोटिस। यह नोटिस आईएसल ऑफ वाइट एनएचएस ट्रस्ट द्वारा दिसंबर 2011 में जारी किया गया था। इसी में ग्रीस बाय एमएस 16 और एमएस 26 सिरिंज ड्राइवर्स को हटाने के बारे में कहा गया है।
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इसके साथ ही इस नोटिस में यह भी लिखा है कि इन सिरिंज को विकासशील देशों के धर्मार्थ संगठनों को दान कर दिया जाएगा। यानि यह सिरिंज बेहद ही खतरनाक हैं, जिनके बारे में आम नागरिकों को कोई जानकारी नहीं है। उनके लिए तो वक्त पर इलाज मिल जाना ही काफी होता है।

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