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आंखों पर पट्टी बांधकर लड़के ने 'पोप' चुना

Sun, 04 Nov 2012 07:45 PM IST
बीबीसी हिन्दी
बीबीसी हिन्दी Updated Sun, 04 Nov 2012 07:45 PM IST
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bishop tawadros new pope of egypt coptic christians

मिस्र में रविवार को अल्पसंख्यक कॉप्ट ईसाई ने अपने नए पोप का चयन एक अलग सी प्रकिया के तहत किया। इस प्रक्रिया के तहत 59 वर्षीय बिशप तावाद्रोस नए पोप चुने गए हैं। काहिरा की सेंट मार्क केथेड्रल में आंख पर पट्टी बांधे एक लड़के ने तीन उम्मीदवारों में से एक को समुदाय का 118वां नेता चुना।

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कॉप्ट ईसाई मध्य पूर्व में ईसाई अल्पसंख्यकों का सबसे बड़ा गुट है। मिस्र में इस समुदाय की संख्या लगभग 11 लाख है और इन पर हमले बढ़ रहे हैं। उम्मीदवारों में बिशप तावाद्रोस समेत दो बिशप और एक 'मंक' यानी भिक्षु थे। ये चुनाव पोप शिनॉदा के मार्च में निधन के बाद हुआ है। बिशप तावाद्रोस पोप शिनॉदा के सहायक रह चुके हैं।
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नए पोप की रिश्ते बनाने में अहम भूमिका
कॉप्ट ईसाइयों में हाल में देश में सत्ता में आए इस्लामी नेताओं की मंशा के बारे में डर है। पोप शिनॉदा चार दशक का चर्च का नेतृत्व कर रहे थे और वे बार-बार अधिकारियों से कॉप्ट ईसाइयों की चिंताओं का समाधान खोजने की अपील करते रहते थे।
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नया पोप चुनने की प्रक्रिया कुछ ऐसे है कि उम्मीदवारों के नाम कागज की पर्चियों पर लिखकर एक क्रिस्टल बॉल में डाले जाते हैं और उसे सील कर दिया जाता है। फिर जिन 250 लड़कों ने चयन करने के लिए अपनी रजामंदी दी हो, उनमें से शॉर्टलिस्ट किए गए एक लड़के को आंखों पर पट्टी बांधकर एक पर्ची निकालने को कहा जाता है।

इस समुदाय का मानना है कि इस प्रक्रिया से इसमें भगवान की शिरकत रहती है। बिशप तावाद्रोस 18 नवंबर से अपना कार्यभार संभालेंगे। रॉयटर्स ने एलेक्साड्रिया चर्च के उप प्रमुख रॉस मॉरकॉस के हवाले से कहा है, "ये चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि चर्च के प्रमुख को चुनना आसान काम नहीं है। ये सभी मिस्रवासियों, मुसलमानों और ईसाइयों के लिए महत्वपूर्ण है।


पोप किस तरह से ईसाइयों की जरूरतों का ध्यान रखेंगे और पोप शिनॉदा की परंपरा को आगे ले जाएंगे, ये गंभीर बात है। अन्य गुटों और मुसलमान भाइयों और सरकार से वे किस तरह का रिश्ता रखेंगे, ये भी अहम है।" काहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता जॉन लेएन का कहना है कि किसी को नए पोप से ऐसी उम्मीद नहीं है कि वे रूढ़ीवादी चर्च में कोई क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे।

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