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बार्सिलोना हमला: वो खौफनाक मंजर जिसे देखकर नर्स भी कांप उठा
बीबीसी, हिंदी
Updated Sat, 19 Aug 2017 01:29 PM IST
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बार्सिलोना में एक अस्पताल के इमरजेंसी एरिया में बतौर नर्स काम करने वाले अल्बर्ट टॉर्ट को मालूम है कि जिन लोगों के मरने का खतरा होता है, उन्हें अटेंड करना कितना मुश्किल है। लेकिन गुरुवार दोपहर रमब्लास में उन्होंने जो देखा वह बेहद खतरनाक था।
बता दें कि एक वैन के जरिए किए गए हमले में घायल लोगों की मदद करने के लिए वह मौके पर गए हुए थे। हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा घायल हो गए। प्रशासन ने इसे आतंकी हमला बताया है। कथित इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
''ऐसा लग रहा था कि उसे दौरे आ रहे थे''
करीब 300 मीटर के दायरे में टॉर्ट ने देखा कि दर्जनों लोग घायल पड़े हैं और कई लोग पहले ही मर चुके हैं। ये देखकर वह कांप उठे। बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, ''मैं तब पहुंचा जब इलाके की घेराबंदी कर दी गई थी। मैंने एक पुलिसकर्मी को बताया कि मैं नर्स हूं और उन्होंने मुझे अंदर जाने दिया।''
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वह करीब 50 मीटर तक आगे बढ़े जहां उन्होंने जमीन पर पड़े एक शख्स को देखा। उन्होंने बताया, ''ऐसा लग रहा था कि उसे दौरे आ रहे थे।'' उस शख्स की हालत से पता चल रहा था कि उनको तुरंत डीफिब्रिलैटर लगाने की जरूरत है, जो वहां मौजूद फायर ब्रिगेड के लोगों के पास मिल सकता था।
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बता दें कि एक वैन के जरिए किए गए हमले में घायल लोगों की मदद करने के लिए वह मौके पर गए हुए थे। हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा घायल हो गए। प्रशासन ने इसे आतंकी हमला बताया है। कथित इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
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''ऐसा लग रहा था कि उसे दौरे आ रहे थे''
करीब 300 मीटर के दायरे में टॉर्ट ने देखा कि दर्जनों लोग घायल पड़े हैं और कई लोग पहले ही मर चुके हैं। ये देखकर वह कांप उठे। बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, ''मैं तब पहुंचा जब इलाके की घेराबंदी कर दी गई थी। मैंने एक पुलिसकर्मी को बताया कि मैं नर्स हूं और उन्होंने मुझे अंदर जाने दिया।''
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वह करीब 50 मीटर तक आगे बढ़े जहां उन्होंने जमीन पर पड़े एक शख्स को देखा। उन्होंने बताया, ''ऐसा लग रहा था कि उसे दौरे आ रहे थे।'' उस शख्स की हालत से पता चल रहा था कि उनको तुरंत डीफिब्रिलैटर लगाने की जरूरत है, जो वहां मौजूद फायर ब्रिगेड के लोगों के पास मिल सकता था।
30 मिनट तक करते रहे बचाने की कोशिश
अल्बर्ट टॉर्ट
टॉर्ट ने दुखी मन से कहा, ''हम करीब 30 मिनट तक इटली के उस शख्स को ठीक करने की कोशिश करते रहे। उनकी उम्र 41 साल थी और उनकी मौत हो गई।'' अपने अनुभव की वजह से कॉलेज ऑफ नर्सेज और नर्सेज ऑफ बार्सिलोना के अध्यक्ष पद तक पहुंचे अल्बर्ट टॉर्ट ने रमब्लास में राहत कार्य जारी रखा।
इटली वाले शख्स की मौत की घटना से वह बाहर निकले पाते उसके पहले ही उन्होंने रास्ते में जो देखा वह बेहद निराशाजनक था। उन्होंने कहा, ''जैसे-जैसे मैं आगे बढ़ा, मैंने देखा कि वहां लोगों के शरीर ढंक दिए गए थे। क्योंकि हेल्थ सर्विस कुछ कर पाती उससे पहले ही उन लोगों की जान जा चुकी थी।'' आपातकालीन सेवाओं के सहयोग के बावजूद वहां कुछ मीटर के दायरे में काफी लोग गंभीर रूप से घायल हालत में पड़े थे।
बहुत खौफनाक थी वहां की स्थिति
टॉर्ट ने कहा, ''उस लड़के के साथ, जिसे बचाने की हम कोशिश कर रहे थे, वहां और भी कई शरीर पड़े थे लेकिन उनके साथ हम कुछ कर नहीं सके।'' जिस जगह पर वैन ने हमला शुरू किया था, वहां घायलों और मरने वालों की संख्या ज्यादा थी। उन्होंने कहा, ''हमने वो सब किया जो कर सकते थे लेकिन यह बेहद भावुक कर देने वाली स्थिति थी और इसे भूलना मुश्किल है क्योंकि स्थिति बहुत खौफनाक थी।''
टॉर्ट कहते हैं, ''मैं अस्पताल में जो देखता हूं यह उससे कहीं ज्यादा मुश्किल था मेरे लिए।'' उन्होंने कहा, ''जब आप मदद के लिए जाते हैं तो सारी ताकत लगा देते हैं। कई ऐसे मौके रहे हैं जब आप खुद भावुक होने लगते हैं और वहां रह पाना मुश्किल होने लगता है।''
इटली वाले शख्स की मौत की घटना से वह बाहर निकले पाते उसके पहले ही उन्होंने रास्ते में जो देखा वह बेहद निराशाजनक था। उन्होंने कहा, ''जैसे-जैसे मैं आगे बढ़ा, मैंने देखा कि वहां लोगों के शरीर ढंक दिए गए थे। क्योंकि हेल्थ सर्विस कुछ कर पाती उससे पहले ही उन लोगों की जान जा चुकी थी।'' आपातकालीन सेवाओं के सहयोग के बावजूद वहां कुछ मीटर के दायरे में काफी लोग गंभीर रूप से घायल हालत में पड़े थे।
बहुत खौफनाक थी वहां की स्थिति
टॉर्ट ने कहा, ''उस लड़के के साथ, जिसे बचाने की हम कोशिश कर रहे थे, वहां और भी कई शरीर पड़े थे लेकिन उनके साथ हम कुछ कर नहीं सके।'' जिस जगह पर वैन ने हमला शुरू किया था, वहां घायलों और मरने वालों की संख्या ज्यादा थी। उन्होंने कहा, ''हमने वो सब किया जो कर सकते थे लेकिन यह बेहद भावुक कर देने वाली स्थिति थी और इसे भूलना मुश्किल है क्योंकि स्थिति बहुत खौफनाक थी।''
टॉर्ट कहते हैं, ''मैं अस्पताल में जो देखता हूं यह उससे कहीं ज्यादा मुश्किल था मेरे लिए।'' उन्होंने कहा, ''जब आप मदद के लिए जाते हैं तो सारी ताकत लगा देते हैं। कई ऐसे मौके रहे हैं जब आप खुद भावुक होने लगते हैं और वहां रह पाना मुश्किल होने लगता है।''