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विनाशकारी सुनामी के बाद बंद हुए परमाणु संयंत्रों को फिर शुरू करेगा जापान

Sat, 07 Oct 2017 04:39 PM IST
एजेंसी/ टोकियो
एजेंसी/ टोकियो Updated Sat, 07 Oct 2017 04:39 PM IST
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after tsunami demolished nuclear plant japan going to open soon
फुकुशिमा का परमाणु संयंत्र
जापान में 2011 में आए विनाशकारी सुनामी में तबाह हुआ फुकुशिमा का परमाणु संयंत्र अब दोबारा शुरू होने की स्थिति में आ गया है। पिछले छह साल से बंद पड़ा यह संयंत्र सुरक्षा मानकों की सभी बाधाओं को पार कर चुका है, जिसकी पुष्टि परमाणु नियामक प्रधिकरण ने कर दी है। इसी के साथ जापान में फुकुशिमा संयंत्र को दोबारा चालू करने का विरोध भी शुरू हो गया है। 
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प्राधिकरण ने पुष्टि की है कि उत्तरी जापान तट पर काशिवाजकी-कारिवा क्षेत्र में 6 से 7 रिएक्टरों का परिचालन शुरू किया जा सकता है जिनके सुरक्षा मानक फुकुशिमा संकट के बाद तय किए गए मानकों पर खरे उतरते हैं। 
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यह पहला मौका है जब टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (टेपको) को ऊर्जा उत्पादन के साथ आगे बढने की अनुमति मिली है। लेकिन नियामक के इस फैसले की देश भर में आलोचना हो रही है। 
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परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के करीब रहने वाले लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और गैर परमाणु ऊर्जा के समर्थकों का कहना है कि संयंत्र के संचालकों ने साल 2011 की फुकुशिमा त्रासदी से कोई सबक लिए बिना परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दोबारा कदम बढ़ाए हैं।

पढ़ें: ऑफिस में लगातार 159 घंटे ओवरटाइम करने से चली गई जापानी रिपोर्टर की जान

साल 2011 में जापानी तट पर आए भूकंप और सुनामी ने फुकुशिमा त्रासदी को खड़ा कर दिया था, सुरक्षा मानकों की इस अनदेखी के लिए इसी टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (टेपको) की काफी निंदा भी की गई थी।

कंपनी के लिए काशिवाजकी-कारिवा में संयंत्र शुरू करना आसान नहीं है

 जापानी सरकार का अनुमान था कि इस संयंत्र को सुरक्षित और पुख्ता बनाने साथ ही आसपास के क्षेत्र की सफाई में कम से कम से तीन दशक का समय और 176 अरब डॉलर का खर्च होगा। यह अनुमान साल 2013 में टेपको की ओर से दिए गए अनुमानों के मुकाबले दोगुना है।

हालांकि कंपनी के लिए काशिवाजकी-कारिवा में संयंत्र शुरू करना आसान नहीं है। मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली टोक्यो की संस्था न्यूक्लिर इनफॉरमेशन सेंटर की प्रवक्ता कैटलिन स्टोनेल के मुताबिक, "जिन रिएक्टर की बात की जा रही है उनकी डिजाइन फुकुशिमा के रिएक्टरों की ही तरह है और अब तक टेपेको यह नहीं बता सकी है कि फुकुशिमा त्रासदी के क्या कारण थे।" उन्होंने कहा कि जांच नतीजों की अगले तीन सालों में आने की कोई उम्मीद भी नहीं है।

स्टोनेल कहती हैं, "टेपको इन दिनों वित्तीय दवाब से जूझ रही है और इसलिए कंपनी अपने संयंत्रों को दोबारा खोलने के लिए उत्सुक है लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह कोई पर्याप्त कारण है।" 

उन्होंने बताया कि पहले ही एक रिपोर्ट में यह कहा जा चुका है कि परमाणु संयंत्रों वाला काशिवाजकी-कारिवा के क्षेत्र में भूंकप का खतरा है। फुकुशिमा त्रासदी के देश के अन्य परमाणु संयंत्रों को भी बंद कर दिया गया था। 

हालांकि अब सवाल है कि क्या स्थानीय लोग टेपको के साथ है। सामाजिक कार्यकर्ताओं की ही तरह जापानी मीडिया भी यह सवाल उठा रही है कि क्या टेपको के पुराने इतिहास को देखते हुए इस पर विश्वास किया जा सकता है।


 
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