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ब्रिटेन में रहने के लिए संघर्ष कर रहा 9 साल का भारतीय शतरंज खिलाड़ी

Mon, 23 Apr 2018 05:37 AM IST
एजेंसी, लंदन
एजेंसी, लंदन Updated Mon, 23 Apr 2018 05:37 AM IST
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9-year-old Indian chess player struggling to stay in Britain
श्रेयस
भारत का 9 साल का श्रेयस रॉयल शतरंज में अपने से 10 साल बड़े खिलाड़ियों को चुटकियों में हरा देता है। अपने शानदार खेल के कारण वह ब्रिटेन में जाना-माना नाम है। अब श्रेयस, उसका परिवार और इंग्लिश शतरंज संघ उसके ब्रिटेन में बसे रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 
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श्रेयस के पिता जितेंद्र सिंह टाटा समूह में आईटी प्रोजेक्ट मैनेजर हैं। टाटा समूह ने उन्हें सीमित समय के लिए कंपनी के ब्रिटेन कार्यालय में नियुक्त किया था। उनका परिवार 2012 में बंगलूरू से लंदन आया था। उस समय श्रेयस तीन साल का था। जितेंद्र का वर्क वीजा 10 सितंबर, 2018 को खत्म हो रहा है। श्रेयस की मां अंजु सिंह का कहना है कि उन्होंने भारत में जीवन का बड़ा हिस्सा गुजारा है, लेकिन अगर श्रेयस को भारत लौटना पड़ा तो वह शतरंज खेलना जारी नहीं रख पाएगा। 
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जितेंद्र सिंह का कहना है कि वह इस देश की धरोहर है। इसी आधार पर श्रेयस के परिवार ने दो इंग्लिश ग्रांडमास्टर्स के कोच रहे जूलियन सिंपोल और इंग्लिश शतरंज संघ के अध्यक्ष डॉमनिक लॉसन के सहयोग से ब्रिटेन के गृह विभाग में वहीं बसे रहने के लिए अपील की है।
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श्रेयस के पास होता है हर सवाल का जवाब : सिंपोल

सिंपोल का कहना है कि उन्होंने ऐसा बच्चा कभी नहीं देखा। वह हर प्रतियोगिता जीतता है। वह भविष्य का चैंपियन है। सिंपोल चाहते हैं कि वह ब्रिटेन के लिए चैंपियन बने। सिंपोल श्रेयस को नौ हफ्ते से शतरंज सिखा रहे हैं। उनके मुताबिक उसके पास हर सवाल का जवाब होता है। अब वह उसे सोवियत पद्घति से खेलना सिखा रहे हैं। श्रेयस का कहना है कि उसे ये इसलिए पसंद है क्योंकि इसमें शारीरिक ताकत के बजाय दिमाग लगाना होता है।  


एक माह में मिला युवा उम्मीदवार मास्टर का खिताब

वह दक्षिण लंदन के प्वाइंटर स्कूल में पढ़ता है। इसके लिए उसे पूर्ण छात्रवृत्ति मिलती है। उसने पांच साल की उम्र में शतरंज खेलना सीखा। इसके एक माह के भीतर उसे विश्व के सबसे युवा उम्मीदवार मास्टर का खिताब मिल गया था। वह तीन साल से पेशेवर शतरंज खेल रहा है। श्रेयस के मुताबिक रूस के खिलाड़ियों के खिलाफ खेलना सबसे मुश्किल होता है।
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