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काठमांडू में एक गैस सिलेंडर मिल रहा 10 हजार रुपये का

Tue, 01 Dec 2015 09:00 PM IST
Updated Tue, 01 Dec 2015 09:00 PM IST
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10,000 rupee one gas cylinder price in nepal

नेपाल के नये संविधान के विरोध में आंदोलन कर रहे मधेसियों और सरकार के बीच कोई सहमति न बनने का नुकसान आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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मधेसियों ने भारत-पाक सीमा पर नाकेबंदी की है, जिसकी वजह से नेपाल में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की किल्लत बढ़ गई है। इसकी वजह से देश में तस्करी के जरिये ये जरूरी चीजें पहुंच तो रही हैं, लेकिन इनका कीमत इतनी ज्यादा है कि आम लोगों के लिए इन्हें खरीदना मुश्किल हो रहा है। स्थिति ये हो गई है कि राजधानी काठमांडू में एक गैस सिलेंडर 10 हजार रुपये में मिल रहा है। 104 रुपये प्रति लीटर मिलने वाला पेट्रोल 350 और 86 रुपये प्रति लीटर मिलने वाला डीजल 250 रुपये में मिल रहा है।
 
रोजमरा की जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों के चलते आम लोग बिजली के हीटर व चूल्हे जलाकर खाना पकाने के लिए मजबूर हैं। इसकी वजह से बिजली की खपत बढ़ने से सुबह, शाम और रात को बिजली भी बार-बार काटी जा रही है। खाद्य सामग्रियों की कीमतें आसमान छू रही हैं। मधेसियों द्वारा नाकेबंदी किए जाने के बाद राजधानी में दाल, चावल और अन्य जरूरी खाद्यों की कीमत काफी ज्यादा बढ़ गई है।
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सुप्रीम कोर्ट के वकील दीपेंद्र झा बताते हैं कि राज्य द्वारा प्रायोजित तस्करी के कारण राजधानी में पहुंच रहे रोजमरा की जरूरी चीजों की कीमत आसमान छूने लगी है। स्थिति ये हो गई कि हर दिन हजारों लोग काठमांडू पहुंच रहे हैं और बसों व ट्रकों में इंसानों से ज्यादा गैस सिलेंडर व अन्य डीजल-पेट्रोल के गैलन देखने को मिल रहे हैं। यहां तक कि एंबुलेंस में भी पेट्रोल-डीजल ले जाया जा रहा है। झा ने नेपाल सरकार पर तस्करी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।

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रसोई गैस से लेकर पान मसाले तक की तस्करी

10,000 rupee one gas cylinder price in nepal

बिगड़े हालात की वजह से नेपाल में मालवाहक वाहनों की आमद घटी है। इससे आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है। सीमा पार तस्करी का असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा है। ऊंची कीमतों पर जरूरी सामानों को सीमा पार पहुंचाने की होड़ से सोनौली व आसपास के क्षेत्रों में महंगाई आसमान पर है।

दोनों देशों के मुनाफाखोर आवश्यक वस्तुओं को सीमा पार पहुंचाने में जुटे हैं। रसोई गैस से लेकर पान मसाले तक की तस्करी हो रही है। नेपाल से सटे यूपी के बाजारों में ऊंची कीमतों के बावजूद खरीद-बिक्री तेज है। ज्यादा असर सोनौली, ठूठीबारी, बरगदवा, भगवानपुर में देखा जा रहा है। ठूठीबारी के व्यापारी विनोद कश्यप के मुताबिक आंदोलन से पहले 24 घंटे में औसतन 500 गाड़ियां नेपाल पहुंचती थीं लेकिन अब ऐसा नहीं है। भारतीय मालवाहक गाड़ियों को निशाना बनाए जाने के बाद से काफी कम संख्या में ट्रक नेपाल पहुंच रहे हैं।

मिथुल कुमार (प्रभारी कमांडेंट, एसएसबी) ने बताया ‌कि‘तस्करों के खिलाफ अभियान को लेकर एसएसबी ने सख्ती बढ़ा दी है। निगरानी व छापों की वजह से डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस के तस्करी की कोशिशें विफल हुई हैं।’

नेपाली संसद में भारतीय राजदूत के विरुद्ध नारेबाजी
नेपाल मजदूर किसान पार्टी के दो सांसदों ने संसद में मंगलवार को भारतीय राजदूत रंजीत रे के विरुद्ध नारेबाजी की। वर्षों से भारत का विरोध करते आ रहे और कम्युनिस्ट विचारधारा से संचालित किसान पार्टी के सांसद प्रेम सुवाल और अनुराधा थापा मगर ने संसद में नारेबाजी की। इसके बाद संयुक्त लोकतांत्रिक मधेसी मोर्चा के सांसद भी मधेसियों के हक को लेकर नारेबाजी करने लगे। दोनों तरफ से हुई नारेबाजी के बाद संसद को छह दिसंबर तक स्थगित कर दिया गया है। 

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