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Harmeet Dhillon: कौन हैं हरमीत ढिल्लों, जिन्होंने रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन में की अरदास, जानें सबकुछ

Tue, 16 Jul 2024 09:58 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: काव्या मिश्रा Updated Tue, 16 Jul 2024 09:58 AM IST
सार

डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में रिपब्लिकन पार्टी की नेता ढिल्लों ने सिर पर दुपट्टा रख अरदास की।आइए जानते हैं इनके बारे में।

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Republican leader Harmeet Dhillon offers Ardas at Republican National Convention, know about it
हरमीत ढिल्लों - फोटो : एएनआई

विस्तार

हरमीत ढिल्लों का नाम इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है। दरअसल, अमेरिकी राज्य मिल्वौकी में रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन हो रहा है। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप को रिपब्लिकन की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर चुना गया। वहीं, ट्रंप की मौजूदगी में नागरिक अधिकार वकील और रिपब्लिकन पार्टी की नेता ढिल्लों ने एक खास इच्छा रखी। उन्होंने कहा कि वह अरदास करना चाहती हैं और उन्होंने सिर पर दुपट्टा रख अरदास की। 

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आइए जानते हैं कि आखिर कौन हैं हरमीत ढिल्लों-

हरमीत ढिल्लों का जन्म भारत के चंडीगढ़ में हुआ। वह एक सिख चिकित्सक की बेटी और भारतीय वायु सेना में एक चार सितारा जनरल की पोती हैं। फिलहाल, ढिल्लों कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को में रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख के रूप में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। 

व्यक्तिगत रूप से एक सामाजिक रूढ़िवादी ढिल्लों ने कुछ विवादास्पद रुख अपनाए हैं। उन्होंने समलैंगिक विवाह और गर्भपाक जैसे मुद्दों पर खुलकर अपने विचार रखे हैं। उनका कहना है कि सरकार को किसी के निजी फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

पहले लंदन फिर गईं अमेरिका
हरमीत का जन्म भारत में हुआ था, लेकिन वह वहां लंबे समय तक नहीं रहीं। उनका परिवार पहले लंदन और फिर संयुक्त राज्य अमेरिका में बस गया। इसके पीछे का कारण यह था कि उनके पिता एक आर्थोपेडिक सर्जन थे और उन्हें अपना प्रशिक्षण पूरा करना था। ढिल्लों ने अपनी स्कूली शिक्षा न्यूयॉर्क में पूरी की। इसके बाद वे उत्तरी कैरोलिना के स्मिथफील्ड के छोटे दक्षिणी शहर में रहने चले गए, जहां बहुत कम एशियाई थे और यहां तक कि कम सिख भी थे। 

ढिल्लों का कहना है कि लगातार शहर बदलने से सांस्कृतिक बदलाव की आदत पड़ने में कुछ समय लगा। उन्होंने एक बार इंटरव्यू में कहा, 'बहुत से आप्रवासियों को अपना जीवन शुरू से शुरू करना पड़ता है। जहां में पली बढ़ी वहां पूरे काउंटी में एक आर्थोपेडिक सर्जन नहीं था। गोरे थे और अश्वेत थे और वे शहर के विभिन्न हिस्सों में रहते थे और वास्तव में अलग-अलग पृष्ठभूमि के बहुत लोग नहीं थे।'

भेदभाव का करना पड़ा सामना
उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन, मैं उस समय करीब छह या सात साल की थी। इसलिए आप जानते हैं जब आप एक बच्चे होते हैं तो आप वास्तव में चीजों का बहुत सावधानी से विश्लेषण नहीं करते हैं। लेकिन उस छोटे से शहर में रहने के दौरान हमें निश्चित रूप से कुछ भेदभाव का सामना करना पड़ा।'

ढिल्लों ने उत्तरी कैरोलिना स्कूल ऑफ साइंस एंड मैथमेटिक्स में भाग लिया। 16 साल की उम्र में स्नातक किया। उनकी मां ने यह भी सुनिश्चित किया कि हरमीत और उनके भाई सिख धर्म के बारे में जाने और अपने दादा-दादी के साथ जुड़े रहें, इसलिए गर्मियों की छुट्टी में उन्हें भारत भेजते थे। हरमीत ने डार्टमाउथ कॉलेज में दाखिला लिया, जहां उन्होंने रूढ़िवादी डार्टमाउथ रिव्यू का संपादन किया। काफी मुकदमेबाजी का सामना करना पड़ा। 

परिवार की पसंद से की थी शादी
पढ़ाई पूरी करने के बाद हरमीत ने परिवार की पसंद से शादी की थी, लेकिन ज्यादा समय तक नहीं चली। रिश्ता तब खत्म हुआ जब उनके पति ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। ढिल्लों ने बताया था कि उन्होंने डार्टमाउथ से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और स्नातक होने के एक हफ्ते बाद भारत के एक डॉक्टर से शादी कर ली। बाद में घरेलू हिंसा की शिकार हुई और एक साल बाद तलाक ले लिया। 


दूसरी शादी भी नहीं चली 
बाद में उन्होंने वर्जीनिया विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की और बाद में एक रूढ़िवादी सिख चिकित्सक से शादी कर ली। मगर बाद में यह शादी भी नहीं चली और 2003 में अलग हो गए। 

मां को स्तन कैंसर होने पर वह वापस अपनी मां के पास उत्तरी कैरोलिना चली गईं। 2006 में वहां अपनी खुद की लॉ फर्म शुरू की। बाद में, जनवरी 2011 में राजनीतिक करियर की शुरुआत की। वह सैन फ्रांसिस्को रिपब्लिकन पार्टी की प्रमुख बनीं।

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