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Washington: बुजुर्गों का सम्मान तो दिमागी कमजोरी में ज्यादा सुधार, एमसीआई- लक्षण और मुश्किलें
Mon, 17 Apr 2023 06:19 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Mon, 17 Apr 2023 06:19 AM IST
सार
अब तक यह माना जाता रहा है कि उम्र बढ़ने पर इस दिमागी कमजोरी से पीड़ित सभी लोग ठीक नहीं हो पाते। लेकिन, अब अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा है कि जिस संस्कृति में बुढ़ापे को सकारात्मक ढंग से लिया जाता है, बुजुर्गों के प्रति अच्छा नजरिया रखा जाता है, वहां एमसीआई के पीड़ितों में सुधार होता है।
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बुजुर्ग
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विस्तार
हमारे आसपास हमने कई ऐसे बुजुर्गों को देखा होगा, जो बढ़ती उम्र के साथ-साथ कमजोर होती याद्दाश्त के िशकार होते हैं। खासतौर पर 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों में यह समस्या अधिक पाई जाती है। मेडिकल क्षेत्र की भाषा में इसे माइल्ड कॉग्निटिव इंपेयरमेंट (एमसीआई) कहा जाता है। इससे पीड़ित लोग चीजों को भूलने लगते हैं, परिचितों को पहचानना भी मुश्किल हो जाता है।
अब तक यह माना जाता रहा है कि उम्र बढ़ने पर इस दिमागी कमजोरी से पीड़ित सभी लोग ठीक नहीं हो पाते। लेकिन, अब अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा है कि जिस संस्कृति में बुढ़ापे को सकारात्मक ढंग से लिया जाता है, बुजुर्गों के प्रति अच्छा नजरिया रखा जाता है, वहां एमसीआई के पीड़ितों में सुधार होता है। अध्ययन के अनुसार ऐसी संस्कृतियों में सुधार की संभावना अन्य के मुकाबले 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। एजेंसी
आधे मामलों में सुधार संभव
अध्ययन की प्रमुख लेखिका व येल स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में मनोचिकित्सक बेका लीवी के अनुसार, बढ़ती उम्र को सकारात्मक ढंग से देखने से पीड़ितों को तनाव कम होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और दिमागी क्षमता पर विश्वास भी बेहतर होता है। येल के शोधार्थी मार्टिन स्लेड के अनुसार यह अध्ययन पहली बार दिमाग के प्रदर्शन पर संस्कृति के असर की बात करता है।
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एमसीआई : लक्षण और मुश्किलें
याददाश्त : उम्र बढ़ने के साथ चीजें रखकर भूलना, नाम, तारीख, शब्द याद न कर पाना।
समझ : चीजें देखकर भी समझने में परेशानी।
उलझन : दिमाग अक्सर उलझन में रहता है। छोटे-मोटे दैनिक निर्णय लेने में भी दिक्कत।
पहचान : परिचित, मित्र या रिश्तेदार को भूलना। घर के रास्ते भी याद नहीं रख पाते।
अवसाद : परेशानियां अवसादग्रस्त, गुस्सैल या चिड़चिड़ा भी बना सकती हैं।
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अब तक यह माना जाता रहा है कि उम्र बढ़ने पर इस दिमागी कमजोरी से पीड़ित सभी लोग ठीक नहीं हो पाते। लेकिन, अब अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा है कि जिस संस्कृति में बुढ़ापे को सकारात्मक ढंग से लिया जाता है, बुजुर्गों के प्रति अच्छा नजरिया रखा जाता है, वहां एमसीआई के पीड़ितों में सुधार होता है। अध्ययन के अनुसार ऐसी संस्कृतियों में सुधार की संभावना अन्य के मुकाबले 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। एजेंसी
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आधे मामलों में सुधार संभव
अध्ययन की प्रमुख लेखिका व येल स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में मनोचिकित्सक बेका लीवी के अनुसार, बढ़ती उम्र को सकारात्मक ढंग से देखने से पीड़ितों को तनाव कम होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और दिमागी क्षमता पर विश्वास भी बेहतर होता है। येल के शोधार्थी मार्टिन स्लेड के अनुसार यह अध्ययन पहली बार दिमाग के प्रदर्शन पर संस्कृति के असर की बात करता है।
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एमसीआई : लक्षण और मुश्किलें
याददाश्त : उम्र बढ़ने के साथ चीजें रखकर भूलना, नाम, तारीख, शब्द याद न कर पाना।
समझ : चीजें देखकर भी समझने में परेशानी।
उलझन : दिमाग अक्सर उलझन में रहता है। छोटे-मोटे दैनिक निर्णय लेने में भी दिक्कत।
पहचान : परिचित, मित्र या रिश्तेदार को भूलना। घर के रास्ते भी याद नहीं रख पाते।
अवसाद : परेशानियां अवसादग्रस्त, गुस्सैल या चिड़चिड़ा भी बना सकती हैं।