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घुटने में बार-बार चोट लगने से भी गठिया होने का खतरा

Mon, 30 Dec 2019 03:24 AM IST
आसिम खान वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: आसिम खान Updated Mon, 30 Dec 2019 03:24 AM IST
सार

  • भारत में 15 करोड़ से अधिक लोग घुटने में गठिया की समस्या से पीड़ित हैं
  • 4 करोड़ लोगों को इस दर्द से राहत के लिए घुटना प्रत्यारोपण की जरूरत
  • 50 वर्ष की महिलाओं और 60 वर्ष के पुरुषों में अधिक मामले
  • 90 फीसदी महिलाओं को विटामिन डी की कमी है
  • 80 फीसदी लोग जिन्हें गठिया हैं उन्हें चलने-फिरने में तकलीफ है
  • 25 फीसदी लोगों को दैनिक जीवन का काम करने में समस्या है
  • 22 से 39 फीसदी आबादी घुटने में गठिया की समस्या से ग्रसित है

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Repeated knee injury is also prone to arthritis says in a research in Sweden
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

गठिया रोग केवल बढ़ती उम्र और अधिक वजन के कारण नहीं होता है। युवावस्था में घुटने पर लगी चोट उम्र के बीच पड़ाव पर पहुंचने के साथ गठिया का रूप ले सकती है। इसकी आशंका तब और बढ़ जाती है जब संबंधित व्यक्ति की हड्डी टूटी हो या उसके उत्तकों को कभी नुकसान हुआ हो। स्वीडन के लुंद यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता प्रो. बरबरा स्नोएकर का कहना है कि घुटने के जोड़ पर बार-बार चोट लगने से उसके काम करने और भार सहन करने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके कारण जोड़ों में दर्द होता है। 

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ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में प्रकाशित शोध के अनुसार 25 से 34 साल के डेढ़ लाख लोगों पर ये अध्ययन किया गया। इसमें 5,200 वे लोग शामिल थे जिनको दो दशक से घुटने में चोट की शिकायत थी। इनकी तुलना उन लोगों से की गई जिनको कभी घुटने में चोट नहीं लगी। इसमें पाया गया कि जिनको कभी घुटने में चोट लगी उनको घुटने का गठिया होने की छह गुना अधिक संभावना थी।
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ऐसी स्थिति में गठिया का अधिक खतरा
थाईबोन और शिनबोन (घुटने के नीचे पैर की हड्डी) को जोड़ने वाले लिगामेंट और उत्तकों में चोट लगने के कारण घुटने की आर्थराइटिस होने का खतरा 19.6 फीसदी बढ़ जाता है। इसी तरह इन दोनों हड्डियों को जोड़ने वाले कार्टिलेज को चोट से नुकसान होने के कारण गठिया का खतरा 10.5 फीसदी रहता है। शिनबोन जो घुटने या घुटने की कटोरी से जुड़ी होती है उसमें फ्रैक्चर के कारण आर्थराइटिस का खतरा 6.6 फीसदी बढ़ जाता है।
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चोट से घुटने के भीतर असंतुलन
प्रो. स्नोएकर का कहना है कि घुटने पर चोट के चलते घुटने के भीतर दबाव की प्रक्रिया में असंतुलन हो जाता है। जोड़ों पर अधिक दबाव पड़ने से कार्टिलेज को नुकसान होता है जिसके कारण समस्या शुरू होती है। घुटने के बाहरी जोड़ों पर लगी चोट से ऐसी समस्या नहीं होती है।


अलग-अलग तरह की घुटने की चोट
शोध में शामिल दो तिहाई लोग जिनको घुटने में चोट की शिकायत थी वे पुरुष थे। 19 साल तक लगातार निगरानी के बाद देखा गया कि 422 लोग करीब 11.3 फीसदी लोगों को गठिया की समस्या हो गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि घुटने पर चोट भी अलग-अलग तरह की थी। 22 फीसदी लोगों को घुटने पर गहरी चोट थी। 18 फीसदी को कटने और घुटने के भीतर के उत्तकों के टूटने की समस्या जबकि 18 फीसदी में उत्तकों के टूटने की तकलीफ थी।

इन लक्षणों को पहचानें

  • अचानक से घुटनों में दर्द शुरू हो जाना
  • सीढ़ी चढ़ने, बैठते, सोते वक्त दर्द रहना
  • घुटनों का अकड़ जाना, घूमने में तकलीफ
  • घुटनों से कट-कट की आवाज आना
  • घुटनों के पास की मांसपेशी का कमजोर होना
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