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मान गए ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड: दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने का रास्ता साफ

Fri, 05 Nov 2021 07:14 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 05 Nov 2021 07:14 PM IST
सार

आरसीईपी क्षेत्र में व्यापार और निवेश के एक जैसे नियम लागू होंगे। जानकारों का कहना है कि उससे कारोबार में स्थिरता आएगी। इससे सदस्य देशों के उत्पाद को पूरे क्षेत्र का बाजार निर्बाध रूप से मिलेगा। इसके अलावा सरकारी खरीदारी, प्रतिस्पर्धा नीति और इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य के बारे में तमाम सदस्य देशों में साझा नियम लागू होंगे...

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Regional Comprehensive Economic Cooperation Agreement has been cleared for implementation from January 1
क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता (आरसीईपी) के अगले एक जनवरी से लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने इस मुक्त व्यापार समझौते का अनुमोदन कर दिया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है। ऑस्ट्रेलिया ने बीते मंगलवार और न्यूजीलैंड ने बुधवार को इसका औपचारिक अनुमोदन किया। न्यूजीलैंड में इसका एलान करते हुए वहां के व्यापार और निर्यात मंत्री फिर टायफॉर्ड ने कहा कि नए समझौते के लागू होने से कोविड-19 महामारी के कारण पैदा हुई आर्थिक दिक्कतों से उबरने में मदद मिलेगी।

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इन दोनों देशों के अलावा आरसीईपी का अब तक ब्रूनेई, कंबोडिया, लाओस, सिंगापुर, थाइलैंड, वियतनाम, जापान और चीन अनुमोदन कर चुके हैं। इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपीन्स और दक्षिण कोरिया ने अब तक इसका अनुमोदन नहीं किया है। समझौते में यह शर्त रखी गई थी कि कम से कम छह देशों के अनुमोदन के 60 दिन बाद इस पर अमल शुरू होगा। ये शर्त अब पूरी हो गई है।
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आरसीईपी क्षेत्र में व्यापार और निवेश के एक जैसे नियम लागू होंगे। जानकारों का कहना है कि उससे कारोबार में स्थिरता आएगी। इससे सदस्य देशों के उत्पाद को पूरे क्षेत्र का बाजार निर्बाध रूप से मिलेगा। इसके अलावा सरकारी खरीदारी, प्रतिस्पर्धा नीति और इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य के बारे में तमाम सदस्य देशों में साझा नियम लागू होंगे।
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टोक्यो स्थित लाइटस्ट्रीम रिसर्च संस्था के विश्लेषक स्कॉट फॉस्टर ने कहा है- “जो लोग एशिया-प्रशांत क्षेत्र में व्यापार को अमेरिका- चीन प्रतिस्पर्धा की निगाह से देखने के आदती हो गए हैं, वे इस समझौते को चीन के नेतृत्व वाली पहल मान रहे हैं। उनका कहना है कि इस समझौते के जरिए चीन अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नियम फिर से लिखने की कोशिश कर रहा है। वे लोग इस समझौते को चीन के लिए फायदेमंद बताते हैँ। लेकिन सच्चाई इसके उलट है।”

विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि जापान ने इस साल जून में ही इस समझौते का अनुमोदन कर दिया था। तब वहां के आर्थिक मामलों के मंत्री हिरोशी काजियामा ने कहा था कि इस समझौते से जापान के एशिया-प्रशांत क्षेत्र से संबंध मजबूत होंगे। उन्होंने कहा था कि यही इलाका पर विश्व में आर्थिक विकास का केंद्र है। जापान को उम्मीद है कि ये समझौता लागू होने के बाद उसकी आर्थिक वृद्धि दर को उससे काफी बल मिलेगा।

वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक आरसीईपी क्षेत्र में विश्व अर्थव्यवस्था का लगभग 30 फीसदी हिस्सा शामिल होगा। यह पहला ऐसा व्यापार समझौता है, जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया और चीन तीनों शामिल हैं। अनुमान है कि समझौता लागू होने के बाद सदस्य देशों में लगभग 90 फीसदी वस्तुओं का आयात-निर्यात बिना किसी शुल्क के होगा। साथ ही पूरे इलाके में कस्टम, निवेश, बौद्धिक संपदा संरक्षण और ई-कॉमर्स के समान नियम लागू हो जाएंगे।


लेकिन कुछ अमेरिकी विश्लेषकों ने इसए एक स्तरहीन समझौता बताया है। उनका कहना है कि इसमें शामिल होने वाले देशों को सीमित लाभ ही होगा। अमेरिका ने इसके अलावा कॉम्प्रिहेंसिव एंड प्रोग्रेसिव एग्रीमेंट फॉर ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप (सीपीटीपीपी) में शामिल होने से भी इनकार कर दिया है। जबकि अब चीन ने इसकी सदस्यता ग्रहण करने के लिए अर्जी दी है। इस समझौते में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के अलावा कुछ यूरोपीय और लैटिन अमेरिकी देश भी शामिल हैँ।

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