{"_id":"6abb22c4b5582c6b22098d53","slug":"red-planet-china-to-create-a-new-geological-map-of-mars-by-2028-ai-to-reveal-history-of-billions-of-years-2026-09-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"लाल ग्रह को समझने की कवायद: 2028 तक मंगल का नया भूगर्भीय नक्शा बनाएगा चीन, एआई बताएगा अरबों साल पुराना इतिहास","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
लाल ग्रह को समझने की कवायद: 2028 तक मंगल का नया भूगर्भीय नक्शा बनाएगा चीन, एआई बताएगा अरबों साल पुराना इतिहास
Tue, 29 Sep 2026 08:07 AM IST
पवन पांडेय
अमर उजाला नेटवर्क, बीजिंग
अमर उजाला नेटवर्क, बीजिंग
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 29 Sep 2026 08:07 AM IST
सार
चीन 2028 के अंत तक मंगल का नई पीढ़ी का भूगर्भीय नक्शा तैयार करेगा। इसमें मंगल के प्राचीन जल, जलवायु और भूगर्भीय इतिहास का अध्ययन होगा। तियानवेन-1 समेत अमेरिका और यूरोप के मिशनों के आंकड़ों व एआई का इस्तेमाल किया जाएगा। चीन मंगल के भूगर्भीय कालखंडों के लिए नई वैज्ञानिक प्रणाली भी विकसित करेगा।
विज्ञापन
लाल ग्रह का नया भूगर्भीय नक्शा बनाएगा चीन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
चीन 2028 के अंत तक मंगल का नई पीढ़ी का भूगर्भीय नक्शा तैयार करने की योजना बना रहा है। इसका उद्देश्य लाल ग्रह के अरबों साल पुराने जल और जलवायु इतिहास को समझना है। इसके साथ ही चीन मंगल के भूगर्भीय इतिहास को अलग-अलग कालखंडों में बांटने के लिए अपनी वैज्ञानिक प्रणाली भी विकसित करेगा। चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार चीनी विज्ञान अकादमी के शिक्षाविद और तियानवेन-3 मंगल नमूना वापसी मिशन के मुख्य वैज्ञानिक हौ जेंगछ्येन ने इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने यह बात चीनी भूवैज्ञानिक विज्ञान अकादमी के भूविज्ञान संस्थान में आयोजित एक संगोष्ठी में कही।
झुरोंग रोवर ने दिए मंगल के पानी के संकेत
चीन का झुरोंग रोवर 2021 में तियानवेन-1 मिशन के तहत मंगल की सतह पर उतरा था। इससे मिले आंकड़ों ने मंगल के प्राचीन जल इतिहास को समझने में नई जानकारी दी है। चीनी वैज्ञानिकों के अनुसार मंगल पर करीब 3.5 अरब साल पहले तक एक विशाल प्राचीन महासागर मौजूद रहा हो सकता है। इसके अलावा करीब 1.6 अरब साल पहले अल्प अवधि की बाढ़ आने के संकेत भी मिले हैं। इन संकेतों को मंगल की जलवायु के विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए भूगर्भीय नक्शे में इन निष्कर्षों को भी शामिल किया जाएगा।
यह भी पढ़ें- ट्रंप प्रशासन को झटका: अदालत ने राज्यों से चुनाव संबंधी फंडिंग रोकने पर लगाई रोक, संघीय न्यायाधीश क्या बोले?
विज्ञापन
मंगल के इतिहास को नए तरीके से बांटेगा चीन
फिलहाल मंगल के भूगर्भीय इतिहास को मुख्य रूप से तीन बड़े कालखंडों में बांटा जाता है नोआकियन, हेस्पेरियन और अमेजोनियन। इन कालखंडों की पहचान मुख्य रूप से मंगल की सतह पर दिखाई देने वाले उल्कापिंडों के गड्ढों की संख्या और उनकी घनत्व के आधार पर की गई है। इनकी सटीक अवधि को लेकर वैज्ञानिकों के बीच अध्ययन जारी है। चीन अब मंगल के भूगर्भीय समय को विभाजित करने के लिए अपनी नई प्रणाली विकसित करना चाहता है। चीनी वैज्ञानिकों का लक्ष्य इस प्रणाली को भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य मानक बनाने का है।
अमेरिका और यूरोप के आंकड़े भी होंगे शामिल
नए नक्शे के निर्माण में मुख्य रूप से चीन के तियानवेन-1 मिशन से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ अमेरिका और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मंगल अभियानों से मिले आंकड़ों को भी शामिल किया जाएगा। वैज्ञानिक मंगल की तस्वीरों के अलावा उसकी सतह से जुड़े स्पेक्ट्रम, रडार, गुरुत्वाकर्षण और चुंबकीय क्षेत्र से संबंधित आंकड़ों को एक साथ जोड़ेंगे। इससे मंगल की सतह और उसके नीचे मौजूद भूगर्भीय संरचनाओं की अधिक व्यापक तस्वीर तैयार करने की कोशिश होगी।
एआई करेगा अरबों आंकड़ों का विश्लेषण
इस परियोजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वैज्ञानिकों के भूगर्भीय अनुभव और नियमों को एआई आधारित बड़े मॉडलों में शामिल किया जाएगा, ताकि मशीन द्वारा निकाले गए निष्कर्षों को समझना और उनकी वैज्ञानिक व्याख्या करना संभव हो। तकनीक का इस्तेमाल छोटे स्तर पर मौजूद खनिजों की पहचान से लेकर बड़े स्तर पर मंगल की भूगर्भीय और टेक्टोनिक संरचनाओं को समझने तक किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि एआई केवल मंगल की तस्वीरों को पहचानने का काम नहीं करेगा, बल्कि अलग-अलग प्रकार के वैज्ञानिक आंकड़ों को जोड़कर यह समझने में भी मदद करेगा कि मंगल की सतह समय के साथ कैसे बदली।
बनेगा मंगल का विस्तृत वैश्विक नक्शा
परियोजना के तहत 2028 के अंत तक 1:50 लाख पैमाने का मंगल का भूगर्भीय नक्शा तैयार करने का लक्ष्य है। इसके अलावा लैंडिंग क्षेत्र का 1:50,000 पैमाने का अधिक विस्तृत नक्शा और अलग- अलग विषयों पर आधारित कई एटलस तैयार किए जाएंगे। शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार इस परियोजना के तहत मंगल का दुनिया का पहला इंटेलिजेंट जियोलॉजिकल मैप भी जारी किया जाएगा। चीन का कहना है कि भविष्य में इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल चंद्रमा, शुक्र और क्षुद्रग्रहों के भूगर्भीय नक्शे तैयार करने में किया जा सकता है।
यह भी पढ़ें- स्पेसएक्स स्टारशिप: कक्षा तक पहली बार भरी उड़ान, स्टारलिंक के उपग्रह पहुंचाए; सुरक्षा के कारण अवधि छोटी की गई
क्यों महत्वपूर्ण है मंगल का भूगर्भीय नक्शा?
मंगल का भूगर्भीय नक्शा सिर्फ उसकी सतह का नक्शा नहीं होगा। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि मंगल पर पानी कहां मौजूद था, उसकी सतह पर किस तरह के भूगर्भीय बदलाव हुए और ग्रह की जलवायु अरबों वर्षों में कैसे बदली। चीन के भूवैज्ञानिक विज्ञान अकादमी के निदेशक यांग झिमिंग के अनुसार, संस्थान पिछले 70 वर्षों से भूगर्भीय मानचित्र तैयार करने का काम कर रहा है। यह काम क्षेत्रीय और राष्ट्रीय नक्शों से आगे बढ़कर चंद्रमा और अब मंगल तक पहुंच चुका है। उनके मुताबिक ऐसे नक्शे ग्रहों पर भविष्य में कहां जाना है, क्या तलाशना है और किन वैज्ञानिक सवालों के जवाब खोजने हैं, यह तय करने में आधार प्रदान करते हैं।
विज्ञापन
झुरोंग रोवर ने दिए मंगल के पानी के संकेत
चीन का झुरोंग रोवर 2021 में तियानवेन-1 मिशन के तहत मंगल की सतह पर उतरा था। इससे मिले आंकड़ों ने मंगल के प्राचीन जल इतिहास को समझने में नई जानकारी दी है। चीनी वैज्ञानिकों के अनुसार मंगल पर करीब 3.5 अरब साल पहले तक एक विशाल प्राचीन महासागर मौजूद रहा हो सकता है। इसके अलावा करीब 1.6 अरब साल पहले अल्प अवधि की बाढ़ आने के संकेत भी मिले हैं। इन संकेतों को मंगल की जलवायु के विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए भूगर्भीय नक्शे में इन निष्कर्षों को भी शामिल किया जाएगा।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें- ट्रंप प्रशासन को झटका: अदालत ने राज्यों से चुनाव संबंधी फंडिंग रोकने पर लगाई रोक, संघीय न्यायाधीश क्या बोले?
विज्ञापन
मंगल के इतिहास को नए तरीके से बांटेगा चीन
फिलहाल मंगल के भूगर्भीय इतिहास को मुख्य रूप से तीन बड़े कालखंडों में बांटा जाता है नोआकियन, हेस्पेरियन और अमेजोनियन। इन कालखंडों की पहचान मुख्य रूप से मंगल की सतह पर दिखाई देने वाले उल्कापिंडों के गड्ढों की संख्या और उनकी घनत्व के आधार पर की गई है। इनकी सटीक अवधि को लेकर वैज्ञानिकों के बीच अध्ययन जारी है। चीन अब मंगल के भूगर्भीय समय को विभाजित करने के लिए अपनी नई प्रणाली विकसित करना चाहता है। चीनी वैज्ञानिकों का लक्ष्य इस प्रणाली को भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य मानक बनाने का है।
अमेरिका और यूरोप के आंकड़े भी होंगे शामिल
नए नक्शे के निर्माण में मुख्य रूप से चीन के तियानवेन-1 मिशन से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ अमेरिका और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मंगल अभियानों से मिले आंकड़ों को भी शामिल किया जाएगा। वैज्ञानिक मंगल की तस्वीरों के अलावा उसकी सतह से जुड़े स्पेक्ट्रम, रडार, गुरुत्वाकर्षण और चुंबकीय क्षेत्र से संबंधित आंकड़ों को एक साथ जोड़ेंगे। इससे मंगल की सतह और उसके नीचे मौजूद भूगर्भीय संरचनाओं की अधिक व्यापक तस्वीर तैयार करने की कोशिश होगी।
एआई करेगा अरबों आंकड़ों का विश्लेषण
इस परियोजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वैज्ञानिकों के भूगर्भीय अनुभव और नियमों को एआई आधारित बड़े मॉडलों में शामिल किया जाएगा, ताकि मशीन द्वारा निकाले गए निष्कर्षों को समझना और उनकी वैज्ञानिक व्याख्या करना संभव हो। तकनीक का इस्तेमाल छोटे स्तर पर मौजूद खनिजों की पहचान से लेकर बड़े स्तर पर मंगल की भूगर्भीय और टेक्टोनिक संरचनाओं को समझने तक किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि एआई केवल मंगल की तस्वीरों को पहचानने का काम नहीं करेगा, बल्कि अलग-अलग प्रकार के वैज्ञानिक आंकड़ों को जोड़कर यह समझने में भी मदद करेगा कि मंगल की सतह समय के साथ कैसे बदली।
बनेगा मंगल का विस्तृत वैश्विक नक्शा
परियोजना के तहत 2028 के अंत तक 1:50 लाख पैमाने का मंगल का भूगर्भीय नक्शा तैयार करने का लक्ष्य है। इसके अलावा लैंडिंग क्षेत्र का 1:50,000 पैमाने का अधिक विस्तृत नक्शा और अलग- अलग विषयों पर आधारित कई एटलस तैयार किए जाएंगे। शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार इस परियोजना के तहत मंगल का दुनिया का पहला इंटेलिजेंट जियोलॉजिकल मैप भी जारी किया जाएगा। चीन का कहना है कि भविष्य में इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल चंद्रमा, शुक्र और क्षुद्रग्रहों के भूगर्भीय नक्शे तैयार करने में किया जा सकता है।
यह भी पढ़ें- स्पेसएक्स स्टारशिप: कक्षा तक पहली बार भरी उड़ान, स्टारलिंक के उपग्रह पहुंचाए; सुरक्षा के कारण अवधि छोटी की गई
क्यों महत्वपूर्ण है मंगल का भूगर्भीय नक्शा?
मंगल का भूगर्भीय नक्शा सिर्फ उसकी सतह का नक्शा नहीं होगा। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि मंगल पर पानी कहां मौजूद था, उसकी सतह पर किस तरह के भूगर्भीय बदलाव हुए और ग्रह की जलवायु अरबों वर्षों में कैसे बदली। चीन के भूवैज्ञानिक विज्ञान अकादमी के निदेशक यांग झिमिंग के अनुसार, संस्थान पिछले 70 वर्षों से भूगर्भीय मानचित्र तैयार करने का काम कर रहा है। यह काम क्षेत्रीय और राष्ट्रीय नक्शों से आगे बढ़कर चंद्रमा और अब मंगल तक पहुंच चुका है। उनके मुताबिक ऐसे नक्शे ग्रहों पर भविष्य में कहां जाना है, क्या तलाशना है और किन वैज्ञानिक सवालों के जवाब खोजने हैं, यह तय करने में आधार प्रदान करते हैं।