नेपाल: नेपाली कांग्रेस में प्रधानमंत्री देउबा के खिलाफ तेज हुए बगावत के सुर
वरिष्ठ नेता शेखर कोइराला ने एक बयान जारी कर देउबा पर नेपाली कांग्रेस के कई नेताओँ और कार्यकर्ताओं की ‘राजनीतिक हत्या’ कर देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा- पार्टी मशीनरी का दुरुपयोग कर कई नेताओं के राजनीतिक जीवन को खत्म करने की साजिश रची गई है...
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स्थानीय चुनावों में सीटों के तालमेल और उम्मीदवारों के चयन के सवाल पर सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस में बगावत जैसी स्थिति बन गई है। जिन नेताओं ने सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा पर हमला बोला है, उनमें वरिष्ठ नेता शेखर कोइराला भी हैं। अनेक नेताओं ने आरोप लगाया है कि देउबा ने सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों को तुष्ट करने के चक्कर में अपनी पार्टी के हितों की बलि चढ़ा दी है। इसके अलावा पार्टी उम्मीदवारों के चयन के लिए अपनाई गई कसौटियों पर भी खुल कर सवाल उठाए जा रहे हैं। नेपाल में स्थानीय चुनावों के लिए मतदान 13 मई को होगा।
बीते हफ्ते वरिष्ठ नेता शेखर कोइराला ने एक बयान जारी कर देउबा पर नेपाली कांग्रेस के कई नेताओँ और कार्यकर्ताओं की ‘राजनीतिक हत्या’ कर देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा- पार्टी मशीनरी का दुरुपयोग कर कई नेताओं के राजनीतिक जीवन को खत्म करने की साजिश रची गई है। कोइराला जैसे वरिष्ठ नेता के खुल कर ऐसा कहने के बाद राष्ट्रीय से स्थानीय स्तरों तक पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बयान देने वाले नेताओं की कतार लग गई। नेपाली कांग्रेस के कोइराला खेमे की राय है कि देउबा ने उम्मीदवारों के चयन में एकतरफा ढंग से फैसला किया।
कोइराला जैसी ही नाराजगी भरी प्रतिक्रिया नेपाल स्टूडेंट्स यूनियन के पूर्व अध्यक्ष गुरुराज घिमिरे ने भी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पार्टी नेतृत्व ने प्रांतीय कमेटियों की पूरी अनदेखी करते हुए ऊपर से अपने फैसले थोपे हैं। खास कर ऐसा मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए उम्मीदवार चुनने में किया गया है।
नेपाली कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ने के समर्थन में थे नेता
पर्यवेक्षकों के मुताबिक नेपाली कांग्रेस में बहुमत की राय यह थी कि स्थानीय चुनावों में नेपाली कांग्रेस अकेले उतरे। लेकिन इस राय को नजरअंदाज करते हुए प्रधानमंत्री देउबा ने राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन में शामिल सहयोगी दलों के लिए सीटें छोड़ने का फैसला कर लिया। आरोप है कि देउबा ने ऐसा प्रधानमंत्री की अपनी कुर्सी बचाने के लिए किया। जबकि इस फैसले से स्थानीय स्तर पर नेपाली कांग्रेस को नुकसान होगा।
बताया जाता है कि नेपाली कांग्रेस में खास तौर पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के लिए सीटें छोड़ने को लेकर नाराजगी है। इस कारण कई जगहों पर स्थानीय नेताओं ने पांच दलों के सत्ताधारी गठबंधन के औपचारिक उम्मीदवारों के खिलाफ अपने प्रत्याशी खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कई जिलों में पार्टी में बड़े पैमाने पर बगावत हुई है।
नेपाली कांग्रेस के कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि उम्मीदवार तय करते वक्त पार्टी चार्टर का खुलेआम उल्लंघन किया गया। पार्टी नेता प्रदीप पौडेल ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘पार्टी चार्टर में इस बात का स्पष्ट प्रावधान है कि उम्मीदवार का चयन कौन करेगा। जबकि जिन लोगों की नेतृत्व से निकटता है, उन्हें मौका दिया गया। इससे उम्मीदवार की चयन की प्रक्रिया बदतर रूप में सामने आई है।’
टीकाकारों का कहना है कि नेपाली कांग्रेस में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार जिस तरह खुलेआम नेतृत्व की आलोचना हुई है, वैसा पहले नहीं होता था। इसे इस बात संकेत समझा गया है कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।