चीन का वह बाजार जहां मिलता है हर प्रकार का मांस, ऐसी ही मंडी से निकला जानलेवा कोरोना
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
जिस कोेरोना वायरस से समूचा विश्व परेशान है, माना जा रहा है कि उसकी शुरुआत चीन के वुहान से हुई। पिछले साल नवंबर में कोविड-19 संक्रमण का पहला केस यहां के मांस बाजार से आता है। वायरस पशुओं के जरिए इंसानों में पहुंचा। करीब दो महीने के लॉकडाउन के बाद 7 अप्रैल को चीन ने कोरोनावायरस पर जीत का जश्न वुहान में मनाया और दोबारा अपना वेट मार्केट पहले की ही तरह शुरू कर दिया।
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
जिस कोेरोना वायरस से समूचा विश्व परेशान है, माना जा रहा है कि उसकी शुरुआत चीन के वुहान से हुई। पिछले साल नवंबर में कोविड-19 संक्रमण का पहला केस यहां के मांस बाजार से आता है। वायरस पशुओं के जरिए इंसानों में पहुंचा। करीब दो महीने के लॉकडाउन के बाद 7 अप्रैल को चीन ने कोरोनावायरस पर जीत का जश्न वुहान में मनाया और दोबारा अपना वेट मार्केट पहले की ही तरह शुरू कर दिया।
लोग एक बार फिर से चमगादड़, सांप और कुत्तों के मांस को खरीदने पहुंचने लगे। जिस जगह से फैला वायरस दुनियाभर में लगभग एक लाख लोगों की मौत का कारण बन चुका है, वो दोबारा कैसे खुल सकता है। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार न तो यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम हैं और न ही सफाई का कोई बंदोबस्त। पशु-पक्षियों के मांस के बीच कुछ गार्ड्स जरूर तैनात हैं, जो लोगों को तस्वीरें क्लिक करने से रोक रहे हैं, जो कटते जानवरों और बिकते मांसों की खबर तक दुनिया तक पहुंचने से रोकना चाहते हैं।
मांस की मंडी को वेट मार्केट क्यों कहते हैं?
वैज्ञानिकों का दांवा है कि चमगादड़ों से कोविड-19 इंसानों में आया। कई शोधकर्ताओं का मानना है कि चमगादड़ से पैंगोलिन नामक जानवर में आया फिर इंसानों तक पहुंचा। सब थ्योरी है, कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO यह मानता है कि कोरोना वायरस का संक्रमण वुहान की मांस मंडी से शुरू हुआ।
इस मंडी को वेट मार्केट कहते हैं, जो अंग्रेजी के शब्द WET को दर्शाता है, जिसका अर्थ होता है गीला। यानी ऐसी जगह जहां चारों ओर पानी ही पानी नजर आता है। ऐसा कुछ मरे हुए जानवरों को सुरक्षित रखने के लिए रखी गई बर्फ से होता है तो कुछ जानवरों के खून से भर चुकी दुकानों और गलियों को साफ करने से।
मांस की इस मंडी में तंग गलियारों के बीच, खुले आसमान के नीचे जिंदा या मुर्दा चमगादड़, कुत्ते, ऊंट, कोआला, भेड़िये का बच्चा, झींगुर, बिच्छू, चूहा, गिलहरी, लोमड़ी, सीविट, सैलमैन्डर, कछुए घड़ियाल और कई संरक्षित जानवर अवैध रूप से बिकने के लिए पिंजरों में बंद मिलते हैं।
गंदगी, खून और रखरखाव में सफाई की कमी की वजह से ही पशु जन्य रोग, वायरस-बैक्टीरिया इंसानों में स्थानांतरित होते हैं। ऐसे में बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू, इबोला और सार्स जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि वुहान और इसके आस-पास के वेट मार्केट को बंद कर दिया गया था।
कहां से लाए जाते हैं ये जानवर?
जहां बड़ी शौक से लोग इन जानवरों के मांस को खरीदने पहुंचते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही उठता है कि ये जानवर इन मंडियों तक पहुंचते कैसे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक जिस तरह हिंदुस्तान में मुर्गियों का पोल्ट्री फॉर्म होता है ठीक उसी तरह चीन में कुत्तों को भी एकसाथ एक जगह रखा जाता है। बड़े होने पर इन्हें मंडी पहुंचा दिया जाता है।
चीन में तो हर साल 'डॉग मीट फेस्टिवल' भी होता है। जहां कुत्ते का मांस खाने के लिए लोग एकजुट होते हैं। इस दौरान हजारों की संख्या में कुत्ते और बिल्ली कांटे जाते हैं। दुनियाभर में इसका विरोध होता है। वहां के लोगों का कहना है कि चीन में कुत्ते का मांस खाने की प्राचीन परंपरा रही है। एचएसआई रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन में कुत्ते का मांस खाने के लिए हर साल 20 लाख से ज्यादा कुत्ते मारे जाते हैं।
चमगादड़ का भूखमरी कनेक्शन
दरअसल, माओ से-तुंग की अगुवाई वाली कम्यूनिस्ट सरकार ने 'फोर पेस्ट कैंपेन' कैंपेन चलाकर चार जीवों (मच्छर, मक्खी, चूहा और गौरैया चिड़िया) को मारने का आदेश दिया था। उनका कहना था ये चारों जीव किसानों की मेहनत बेकार कर देते हैं, खेतों में मौजूद उनके सारे अनाज खा जाते हैं। इस अभियान में सर्वाधिक गौरेया मारीं गईं।
गौरैया के न होने से टिड्डों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई। नतीजतन सारी फसलें बर्बाद हो गईं और चीन में भयानक अकाल पड़ गया। लगातार अन्न की कमी को देखते हुए कम्यूनिस्ट सरकार ने पोल्ट्री फॉर्मिंग को बढ़ावा देना शुरू किया।
इस क्षेत्र का निजीकरण कर बड़े उद्योग घरानों से पशुपालन करवाया, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर होने के चलते छोटे किसान अपनी समस्या से नहीं उबर पाए और सांप, कछुए, चमगादड़ जैसे जंगली जानवरों को पालने और मारकर उनका मांस बेचने को मजबूर हो गए। सरकार ने भी आंख बंद कर सबकुछ होने दिया, क्योंकि उनका मकसद किसी भी तरह से गरीबी हटाना था।
यहां जानवरों का मांस नहीं बीमारी मिलती है
बड़ी जनसंख्या के लिए बड़े पैमाने पर जंगली जानवरों की मंडी सजने लगी। सांप, मछली, झींगे चमगादड़, कुत्ते और कछुए तक सीमित बाजार में अब बिल्ली, कोआला, भेड़िये का बच्चा, झींगुर, चूहा, गिलहरी, लोमड़ी, सीविट तक खुलेआम बिकने लगे।
जानवरों को इन बाजारों में एक के ऊपर एक पिंजरे में बंद करके रखा जाता। बेहद कम जगह में कई प्रकार के वन्य प्राणियों में संक्रमण का खतरा बना रहताा, इससे कई बीमारी एक जानवर से दूसरे जानवर और फिर इंसानों तक फैलती। विषाणुओं को एक शरीर से दूसरे शरीर तक पहुंचने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती।
गंदगी, रखरखाव में कमी और इन जानवरों को भोजन में शामिल करने की जिद्द का खामियाजा चीन ने 2002 में झेला। जब SARS यानी कोविड-19 विषाणु परिवार के ही कोरोना वायरस ने 8 हजार लोगों को संक्रमित कर दिया। 37 देशों तक पांव पसार चुकी इस बीमारी से 774 लोगों की मौत हुई थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बीमारी भी चमगादड़ों से ही इंसानों में फैली थी। तब अस्थायी रूप से इस मार्केट को बंद कर दिया गया था।
कौन खरीदता है ये महंगे जानवर?
ऐसे जानवरों का अंग या मांस सिर्फ संभ्रात परिवार ही खरीद पाता था। अमीरों के बीच वेट मार्केट इंडस्ट्री यह बात पहुंचाने में सफल रही कि इन जानवरों के मांस से यौन शक्ति बढ़ती है। शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता में बढोतरी होती है। परिणाम स्वरूप इन जानवरों का तेल, पाउडर और अन्य उत्पाद खाद्य सामग्री के रूप में भी बिकने लगे। धीरे-धीरे यह जिम जाने वालों के बीच भी लोकप्रिय हो गया।
वेट मार्केट पर प्रतिबंध लगाने की मांग तेज
कोरोना वायरस के इस घातक दंश के बावजूद दोबारा खुल चुके वेट मार्केट को बंद कराने के लिए 200 से अधिक वन्यजीव संरक्षण संस्थाओं ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को पत्र लिखा है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने भी संयुक्त राष्ट्र सं से चीनी वेट मार्केट के खिलाफ कार्रवाई की अपील की है। मॉरिसन ने कहा कि चीन के मांस बाजार बाकी दुनिया और लोगों की सेहत के लिए 'गंभीर खतरा' हैं।
इससे पहले अमेरीकी राष्ट्रपति WHO को फंड रोकने तक की धमकी दे चुके हैं। दरअसल, कोरोना वायरस फैला जरूर चीन से हो, लेकिन सर्वाधिक नुकसान अमेरिका को हुआ है, जहां मरने वालोें की संख्या 15 हजार के करीब पहुंचने वाली है, जो चीन से लगभग पांच गुना ज्यादा है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि, 'जब हमने ट्रैवल पर बैन लगाया था, तो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसकी आलोचना की थी, उन्होंने कोरोना संक्रमण को लेकर बहुत सारी गलतियां की हैं उन्हें और पहले इस बीमारी के बारे में चेतावनी जारी करनी चाहिए थी।'