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Sri Lanka: रानिल विक्रमसिंघे ने ली शपथ, उठाएंगे श्रीलंका को आर्थिक संकट से उबारने का बीड़ा

Fri, 22 Jul 2022 01:28 AM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 22 Jul 2022 01:28 AM IST
सार

श्रीलंका भयावह आर्थिक संकट से जूझ रहा है। विक्रमसिंघे के सामने सबसे बड़ी चुनौती और अग्नि परीक्षा देश को इस संकट से निकाल कर फिर पटरी पर लाना है। 

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Ranil Wickremesinghe took oath, will take the initiative to rescue Sri Lanka from economic crisis
रानिल विक्रमसिंघे श्रीलंका के आठवें राष्ट्रपति बने - फोटो : ANI

विस्तार

श्रीलंका के शीर्ष राजनेता रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को देश के आठवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली। उन्हें बुधवार को संसद ने नया राष्ट्रपति चुना था। विक्रमसिंघे इससे पहले लंबे समय तक देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

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73 वर्षीय विक्रमसिंघे को श्रीलंका के प्रधान न्यायाधीश जयंत जयसूर्या ने राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। श्रीलंका भयावह आर्थिक संकट से जूझ रहा है। विक्रमसिंघे के सामने सबसे बड़ी चुनौती और अग्नि परीक्षा देश को इस संकट से निकाल कर फिर पटरी पर लाना है।
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गोतबाया राजपक्षे के देश छोड़कर भागने और फिर इस्तीफा देने के बाद विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया था। देश के संविधान के अनुसार संसद द्वारा चुने जाने वाले वे पहले श्रीलंकाई राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले स्वर्गीय डी बी विजेतुंगा मई 1993 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रेमदासा के निधन के बाद निर्विरोध निर्वाचित हुए थे।
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225 सदस्यीय श्रीलंका की संसद ने कल विक्रमसिंघे नया राष्ट्रपति चुना था। उन्हें 134 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी और असंतुष्ट सत्तारूढ़ दल के नेता दुल्लास अल्हाप्परुमा को 82 वोट मिले। त्रिकोणीय मुकाबले में वामपंथी जनता विमुक्ति पेरामुना के नेता अनुरा कुमारा दिसानायके को सिर्फ तीन वोट मिले थे। 

जल्द बनाएंगे मंत्रिमंडल
विक्रमसिंघे के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती श्रीलंका को उसके आर्थिक संकट से बाहर निकालने और महीनों के बड़े विरोध के बाद कानून व्यवस्था बहाल करने की है। डेली मिरर अखबार के अनुसार राष्ट्रपति विक्रमसिंघे अगले कुछ दिनों में 20-25 सदस्यों का एक मंत्रिमंडल बनाएंगे। 

राजपक्षे परिवार की अब भी मजबूत पकड़
विक्रमसिंघे को पूर्ववर्ती राष्ट्रपति राजपक्षे की पार्टी श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (एसएलपीपी) के समर्थन से सहज जीत मिली है। इसने यह भी दिखा दिया है कि हाल के हफ्तों में गोतबाया राजपक्षे, पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और पूर्व वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे के इस्तीफों के बावजूद श्रीलंका की सत्ता पर राजपक्षे परिवार की मजबूत पकड़ है। 

विक्रमसिंघे के लिए भी यह खतरा
विक्रमसिंघे की जीत से एक बार फिर श्रीलंका की  स्थिति भड़क सकती है, क्योंकि सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी उन्हें पूर्ववर्ती राजपक्षे सरकार से अटूट रिश्ते रखने वाला मानते हैं। राजपक्षे परिवार को 1948 में आजादी के बाद से देश के सबसे खराब आर्थिक संकट के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। 

मैं राजपक्षे परिवार का नहीं, जनता का मित्र : राष्ट्रपति
नव निर्वाचित राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने शासन की प्रणाली में बदलाव लाने का संकल्प जताते हुए देशवासियों से कहा कि वह राजपक्षे परिवार के नहीं बल्कि जनता के मित्र हैं। राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद विक्रमिसंघे कोलंबो के सबसे पुराने बौद्ध मंदिरों में से एक गंगाराम मंदिर भी गए। यह पूछे जाने पर कि विक्रमसिंघे राजपक्षे परिवार से अलग कैसे होंगे क्योंकि वह उनके पुराने मित्र हैं, नए राष्ट्रपति ने कहा, मैं राजपक्षे का विरोध करता रहा हूं। उनके साथ काम करने का अर्थ यह नहीं कि मैं उनका मित्र हूं।

रानिल के राष्ट्रपति बनते ही जनता फिर सड़कों पर
आर्थिक और सियासी संकट के बीच श्रीलंका की संसद द्वारा बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को नया राष्ट्रपति चुनने के बावजूद जनता का सड़कों पर उनके खिलाफ प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राजपक्षे परिवार ने अपने मोहरे के रूप में विक्रमसिंघे को गद्दी पर बैठाया गया है। उन्होंने कहा कि अपनी गद्दी को बचाने के लिए राजपक्षे कुनबे ने विक्रमसिंघे के साथ डील की है जो लोगों के साथ धोखा है।

कर्ज के जाल में फंसाने की चीनी साजिश का शिकार बना श्रीलंका : सीआईए 
अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के प्रमुख बिल बर्न्स ने श्रीलंका की मौजूदा आर्थिक स्थिति के लिए कर्ज जाल में फंसाने की चीनी कूटनीति को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा है कि श्रीलंका चीन के दांव को समझ नहीं पाया और उसके जाल में फंस गया। वाशिंगटन में एस्पेन सिक्योरिटी फोरम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, श्रीलंका की आर्थिक तबाही का बड़ा कारण चीन का कर्ज के रूप में बड़ा निवेश है। श्रीलंका की इस गलती को अन्य देशों को चेतावनी के रूप में लेकर इससे सबक लेना चाहिए।


संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने जताई चिंता
श्रीलंका के आर्थिक संकट पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। उसने विश्व बिरादरी से अपील की है कि श्रीलंका को अधिक से अधिक समर्थन दिया जाना चाहिए, क्योंकि देश आर्थिक संकट और राजनीतिक उथल-पुथल का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाचेलेट ने देशभर में हुई हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि आर्थिक संकट का मानवाधिकार पर गंभीर असर पड़ा है। ऐसे में उसे उबारना जरूरी है।
 

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