Tokyo: राजनाथ और जयशंकर ने जापान के मंत्रियों के साथ की 2+2 वार्ता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर दिया जोर
विदेश मंत्रालय ने कहा कि मंत्रियों ने द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग में नवंबर 2019 में पिछली बैठक के बाद हुई प्रगति पर खुशी जताई, जो भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
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भारत और जापान बृहस्पतिवार को सैन्य अभ्यास, रक्षा व सुरक्षा सहयोग को और बढ़ाने पर सहमत हुए। इस सहयोग में दोनों देशों के बीच पहली वायुसेना लड़ाकू विमानों का अभ्यास भी शामिल है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने टोक्यो दूसरे भारत-जापान मंत्रिस्तरीय 2 प्लस 2 वार्ता में शिरकत की। इसमें जापान के रक्षा मंत्री यासुकाजु हमादा व विदेश मंत्री योशीमासा हायाशी शामिल हुए।
बैठक के बाद संयुक्त बयान में कहा गया, दोनों देशों के विदेश व रक्षा मंत्रियों ने सभी देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक, बिना किसी धमकी या ताकत का इस्तेमाल किए या यथास्थिति में एकतरफा बदलाव की कोशिश, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान तलाशने की आवश्यकता पर जोर दिया। रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग की पृष्ठभूमि में जयशंकर ने कहा कि संघर्षों और जलवायु परिवर्तन की घटनाओं ने वैश्विक आर्थिक हालात को और बढ़ा दिया है।
इससे ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को लेकर गहरी चिंताएं उत्पन्न हुई हैं। ताइवान के खिलाफ चीन के आक्रामक रुख पर उन्होंने कहा कि ऐसी चुनौतियों को देखते हुए भारत और जापान के लिए विदेश नीति और सुरक्षा सवालों पर और अधिक घनिष्ठता से काम करने का मसला और भी मजबूत हो गया है।
विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का अनुसरण कर रहे दोनों देश : राजनाथ
रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि भारत और जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का अनुसरण कर रहे हैं, जोकि मुक्त, स्वतंत्र, नियमबद्ध और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह साझेदारी संप्रभुता और देशों की क्षेत्रीय अखंडता पर आधारित है। उनका यह बयान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत व दखल के संदर्भ में है।
- उन्होंने कहा, दोनों देशों को क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा करने का अवसर मिला है और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर सहमति जताई।
- सिंह ने कहा, एशिया के दो संपन्न लोकतंत्रों के तौर पर हम एक विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का अनुसरण कर रहे हैं। भारत का हिंद-प्रशांत महासागर पहल (आईपीओआई) की जापान के मुक्त व स्वतंत्र हिंद-प्रशांत (एफओआईपी) के साथ बहुत सी समानताएं हैं।
- रक्षा मंत्री ने कहा, दोनों देशों के बीच आम सहमति है कि संप्रभुता और देशों की क्षेत्रीय अखंडता आधारित भारत-जापान के संबंध मुक्त, स्वतंत्र, नियम आधारित और समावेशी हिंद-प्रशांत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
नई चुनौतियों, संघर्षों से निपटने को सामूहिक प्रयास जरूरी : जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कोरोना महामारी और ताइवान के खिलाफ चीन के आक्रामक रुख समेत जारी संघर्षों से उत्पन्न नई चुनौतियों से निपटने के लिए जापान के साथ सामूहिक प्रयासों की अपील की। भारत-जापान 2 प्लस 2 मंत्रिस्तरीय वार्ता में उन्होंने कोरोना महामारी और दुनिया के कई हिस्सों में जारी विवादों, नई चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने इन्हें समझकर समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। अपने शुरुआती संबोधन में विदेश मंत्री ने कहा कि हाल के समय में हम बहुत ही गंभीर घटनाक्रमों के गवाह रहे हैं, खासकर 2019 के बाद से। कोरोना महामारी और जारी संघर्षों की मांग है कि हम इन नई चुनौतियों का समाधान निकालें।
- जयशंकर ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा विशेष रूप से अहम मुद्दों के रूप में उभरे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के एक जिम्मेदार सदस्य के रूप में भारत ने मानवीय मदद, दवाओं, टीकों, अन्य अनाज और खाद्य पदार्थों की सहायता पहुंचाने के लिए अथक प्रयास किया है। हम नई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, ऐसे में यह महत्वपूर्ण है कि संवाद व राजनयिक माध्यम से समाधान निकालने के लिए सामूहिक रूप से काम करें।
- ताइवान के खिलाफ चीन के आक्रामक रवैये और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते दखल के बीच विदेश मंत्री ने कह, 2 प्लस 2 मंत्रिस्तरीय वार्ता द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग को प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता और भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी की ताकत को दर्शाता है। भारत-जापान की साझेदारी अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पीएम फुमियो किशिदा के बीच हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, हमारे नेताओं की हालिया बैठक ने हमारे संबंधों की निरंतरता और मजबूती दिखाई है।