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रायसीना डायलॉग: जनरल रावत बोले- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विघटनकारियों को मौका नहीं मिलना चाहिए
Thu, 15 Apr 2021 05:20 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 15 Apr 2021 05:20 PM IST
सार
- ऑस्ट्रेलिया के पीएम ने किया दृढ़ता का आह्वान
- किसी देश का नाम नहीं लिया, इशारा ड्रेगन की ओर
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सीडीएस जनरल बिपिन रावत
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्काट मॉरिसन ने बृहस्पतिवार को कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र सामरिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन गया है। उन्होंने आह्वान किया कि समान विचार वाले देशों को विविध चुनौतियों से अपने साझा हितों की सुरक्षा करने के लिए अधिक दृढ़ता और एकरूपता के साथ काम करना होगा। वहीं भारत की ओर से सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने गुरुवार को रायसीना डॉयलॉग में हिस्सा लेते हुए कहा कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद ऐसा खालीपन नहीं बनना चाहिए कि विघटनकारियों को वहां पहुंचने का मौका मिल जाए।
कोरोना से हुआ नए अवसरों का सृजन
दिल्ली में आयोजित 'रायसीना डायलॉग' में वर्चुअल तरीके से हिस्सा लेते हुए मॉरिसन ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थायी सामरिक संतुलन बनाने के लिए नए अवसरों को लेकर नई संभावना पेश की है।
किसी देश का नाम नहीं लिया
किसी देश का नाम लिए बिना ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने क्षेत्रीय दावों को लेकर बढ़ते तनाव और क्षेत्र में सैन्य आधुनिकीकरण की अभूतपूर्व रफ्तार का भी उल्लेख किया। डिजिटल माध्यम से अपने संबोधन में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कहा, 'लोकतांत्रिक संप्रभु देशों को विदेशी हस्तक्षेप के जरिये धमकाया और मजबूर किया जा रहा है। साइबर हमले अधिक आधुनिक रूप ले चुके हैं, जिसमें सरकार पोषित कारक भी शामिल हैं। मॉरिसन ने कहा कि आर्थिक दबाव को नीतिगत उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उदारवादी नियमों एवं मानदंडों को निशाना बनाया जा रहा है और एक बड़े ध्रुवीकरण के खतरे की ओर हमारी दुनिया बढ़ रही है।
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उदार लोकतंत्र ने दुनिया को काफी दिया
उन्होंने कहा कि सत्तावादी शासन और उदारवादी लोकतंत्रों के बीच ध्रुवीकरण हो रहा है। उन्होंने कहा कि उदारवादी लोकतंत्र और उदारवादी मूल्यों ने वैश्विक व्यवस्था को आधार प्रदान किया है और दुनिया को काफी कुछ दिया है। समान विचार वाले देशों को अपने साझे हितों की सुरक्षा के लिए अधिक दृढ़ता और एकरूपता के साथ काम करने की जरूरत है । मॉरिसन ने कहा कि हिंद प्रशांत ऐसा क्षेत्र है जो हमारी सुरक्षा, समृद्धि, हमारी नियति, व्यक्तिगत भाव एवं सामूहिकता को आकार प्रदान करेगा। उन्होंने कहा, हिन्द प्रशांत क्षेत्र सामरिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र है।
गौरतलब है कि चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता के मद्देनजर हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक ताकतों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है। भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने चतुर्गुट या क्वाड समूह तैयार किया है जिसका मकसद हिन्द प्रशांत क्षेत्र को मुक्त एवं समावेशी बनाना है।
विघटनकारियों को मौका नहीं मिलना चाहिए: जनरल रावत
भारत के प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने गुरुवार को रायसीना डॉयलॉग में हिस्सा लेते हुए कहा कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद ऐसा खालीपन नहीं बनना चाहिए कि विघटनकारियों को वहां पहुंचने का मौका मिल जाए। उन्होंने कहा कि भारत अफगानिस्तान में संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है।
जनरल रावत ने रायसीना संवाद में कहा कि अफगानिस्तान के विकास में भारत जो भी मदद दे सकता है और वहां शांति बहाल करने में जो कर सकता है, ऐसा करने में उसे खुशी होगी। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका की राय है कि उसके सैनिकों तथा नाटो सहयोगियों के बलों की वापसी से अफगानिस्तान में शांति आएगी तो भारत ऐसी स्थिति उभरते हुए देखकर खुश होगा।
जनरल रावत ने डिजिटल सम्मेलन में कहा, लेकिन हमारी चिंता है कि जो निर्वात बनेगा उसमें विघटनकारियों के घुसने की जगह नहीं होनी चाहिए और इस तरह अफगानिस्तान में हिंसा जारी नहीं रहनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि विघटनकारियों से उनका आशय किससे है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने बुधवार को घोषणा की कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया 11 सितंबर तक पूरी होगी।
शांति और स्थिरता की प्रक्रिया में भारत बड़ा साझेदार
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने बीती रात ट्वीट किया था कि उन्होंने बाइडन से बात की और उनका देश अमेरिका के फैसले का सम्मान करता है। जनरल रावत ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद कई देश मौके का फायदा उठाने के लिए अफगानिस्तान में घुसना चाह रहे हैं। हालांकि उन्होंने देशों का नाम नहीं लिया। अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता की प्रक्रिया में भारत बड़ा साझेदार है।
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कोरोना से हुआ नए अवसरों का सृजन
दिल्ली में आयोजित 'रायसीना डायलॉग' में वर्चुअल तरीके से हिस्सा लेते हुए मॉरिसन ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थायी सामरिक संतुलन बनाने के लिए नए अवसरों को लेकर नई संभावना पेश की है।
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किसी देश का नाम नहीं लिया
किसी देश का नाम लिए बिना ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने क्षेत्रीय दावों को लेकर बढ़ते तनाव और क्षेत्र में सैन्य आधुनिकीकरण की अभूतपूर्व रफ्तार का भी उल्लेख किया। डिजिटल माध्यम से अपने संबोधन में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कहा, 'लोकतांत्रिक संप्रभु देशों को विदेशी हस्तक्षेप के जरिये धमकाया और मजबूर किया जा रहा है। साइबर हमले अधिक आधुनिक रूप ले चुके हैं, जिसमें सरकार पोषित कारक भी शामिल हैं। मॉरिसन ने कहा कि आर्थिक दबाव को नीतिगत उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उदारवादी नियमों एवं मानदंडों को निशाना बनाया जा रहा है और एक बड़े ध्रुवीकरण के खतरे की ओर हमारी दुनिया बढ़ रही है।
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उदार लोकतंत्र ने दुनिया को काफी दिया
उन्होंने कहा कि सत्तावादी शासन और उदारवादी लोकतंत्रों के बीच ध्रुवीकरण हो रहा है। उन्होंने कहा कि उदारवादी लोकतंत्र और उदारवादी मूल्यों ने वैश्विक व्यवस्था को आधार प्रदान किया है और दुनिया को काफी कुछ दिया है। समान विचार वाले देशों को अपने साझे हितों की सुरक्षा के लिए अधिक दृढ़ता और एकरूपता के साथ काम करने की जरूरत है । मॉरिसन ने कहा कि हिंद प्रशांत ऐसा क्षेत्र है जो हमारी सुरक्षा, समृद्धि, हमारी नियति, व्यक्तिगत भाव एवं सामूहिकता को आकार प्रदान करेगा। उन्होंने कहा, हिन्द प्रशांत क्षेत्र सामरिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र है।
गौरतलब है कि चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता के मद्देनजर हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक ताकतों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है। भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने चतुर्गुट या क्वाड समूह तैयार किया है जिसका मकसद हिन्द प्रशांत क्षेत्र को मुक्त एवं समावेशी बनाना है।
विघटनकारियों को मौका नहीं मिलना चाहिए: जनरल रावत
भारत के प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने गुरुवार को रायसीना डॉयलॉग में हिस्सा लेते हुए कहा कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद ऐसा खालीपन नहीं बनना चाहिए कि विघटनकारियों को वहां पहुंचने का मौका मिल जाए। उन्होंने कहा कि भारत अफगानिस्तान में संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है।
जनरल रावत ने रायसीना संवाद में कहा कि अफगानिस्तान के विकास में भारत जो भी मदद दे सकता है और वहां शांति बहाल करने में जो कर सकता है, ऐसा करने में उसे खुशी होगी। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका की राय है कि उसके सैनिकों तथा नाटो सहयोगियों के बलों की वापसी से अफगानिस्तान में शांति आएगी तो भारत ऐसी स्थिति उभरते हुए देखकर खुश होगा।
जनरल रावत ने डिजिटल सम्मेलन में कहा, लेकिन हमारी चिंता है कि जो निर्वात बनेगा उसमें विघटनकारियों के घुसने की जगह नहीं होनी चाहिए और इस तरह अफगानिस्तान में हिंसा जारी नहीं रहनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि विघटनकारियों से उनका आशय किससे है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने बुधवार को घोषणा की कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया 11 सितंबर तक पूरी होगी।
शांति और स्थिरता की प्रक्रिया में भारत बड़ा साझेदार
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने बीती रात ट्वीट किया था कि उन्होंने बाइडन से बात की और उनका देश अमेरिका के फैसले का सम्मान करता है। जनरल रावत ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद कई देश मौके का फायदा उठाने के लिए अफगानिस्तान में घुसना चाह रहे हैं। हालांकि उन्होंने देशों का नाम नहीं लिया। अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता की प्रक्रिया में भारत बड़ा साझेदार है।