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क्वाड शिखर बैठक: टोक्यो में सबकी निगाहें टिकी हैं नए ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री पर

Mon, 23 May 2022 06:06 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 23 May 2022 06:06 PM IST
सार

पर्यवेक्षकों की निगाहें इस ओर टिकी हैं कि ऑस्ट्रेलिया में नई सरकार बनने और नए प्रधानमंत्री की प्राथमिकताओं को लेकर चीन क्या रुख अपनाता है। इस बीच यह साफ है कि मॉरिसन की हार से चीन में खुशी महसूस की गई है...

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Quad summit: US President Biden praised the decision to leave for Japan soon after the swearing-in of Australia new PM Anthony Albanese
ऑस्ट्रेलिया के नए पीएम एंथनी अल्बानीज - फोटो : Agency

विस्तार

ऑस्ट्रेलिया में बनी लेबर पार्टी की सरकार के रुख पर पश्चिमी देशों और चीन दोनों की नजर टिकी हुई है। पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के कार्यकाल में ऑस्ट्रेलिया और चीन के संबंध काफी बिगड़ गए थे। रविवार शाम तक यह साफ हो गया कि इस बार ऑस्ट्रेलिया में स्पष्ट बहुमत के साथ एंथनी अल्बानीज के नेतृत्व में लेबर पार्टी की सरकार बनेगी। लेबर पार्टी ने इसके पहले ही एलान कर दिया कि नए प्रधानमंत्री अपने पहले कार्यक्रम के रूप में क्वाड्रैंगुलर सिक्योरिटी डायलॉग (क्वाड) की शिखर बैठक में भाग लेने के लिए टोक्यो जाएंगे।

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मॉरिसन के कार्यकाल में पिछले वर्ष ऑस्ट्रेलिया ऑकुस (ऑस्ट्रेलिया- यूनाइटेड किंग्डम- यूनाइटेड स्टेट्स) सैन्य गठबंधन का हिस्सा बना। साथ ही उनके शासनकाल में ऑस्ट्रेलिया ने क्वाड में भी सक्रिय भूमिका बनाई थी। इन दोनों समूहों को मोटे तौर पर चीन को नियंत्रित करने की अमेरिकी कोशिश का हिस्सा समझा जाता है। बतौर प्रधानमंत्री अल्बानीज का सबसे पहले क्वाड शिखर सम्मेलन में शामिल होने को महत्त्वपूर्ण समझा गया है। ये बैठक मंगलवार को टोक्यो में होगी, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा भाग लेंगे।

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बाइडन ने की तारीफ

प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद अल्बानीज के जापान रवाना होने के निर्णय की अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन तारीफ की है। विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अल्बानीज के शासनकाल में भी ऑस्ट्रेलिया यूक्रेन युद्ध और चीन के मामले में अमेरिकी रणनीति के साथ उतनी ही निकटता से जुड़ा रहे, जितना मॉरिसन के समय था।

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पर्यवेक्षकों की निगाहें इस ओर टिकी हैं कि ऑस्ट्रेलिया में नई सरकार बनने और नए प्रधानमंत्री की प्राथमिकताओं को लेकर चीन क्या रुख अपनाता है। इस बीच यह साफ है कि मॉरिसन की हार से चीन में खुशी महसूस की गई है। चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स के टीकाकार हु शिजिन ने कहा है- मॉरिसन सरकार ने चीन के नजरिए से कई बुरे काम किए। लेबर सरकार की चीन नीति भी संभवतः बहुत बेहतर नहीं होगी। लेकिन मॉरिसन और उनके साथियों की हार खुशी की बात है।

वैसे कुछ चीनी विशेषज्ञों ने सतर्क नजरिया अपनाया है। थिंक टैंक चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेंपरेरी इंटरनेशनल रिलेशंस में शोधकर्ता गुओ चुनमेई ने कहा है- लेबर पार्टी के सत्ता में आने से कम से कम जनता के स्तर पर संपर्क और सामाजिक आदान-प्रदान में दोनों देशों के रिश्ते सुधरने की संभावना पैदा होगी।

ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों के मुताबिक अल्बानीज चीन के प्रति रुख सख्त रुख अपनाएंगे। लेकिन एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ रहे प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए वे कूटनीति पर ज्यादा निर्भर करेंगे। दक्षिण पूर्व एशिया में वे इंडोनेशिया से मजबूत संबंध बनाना उनकी प्राथमिकता होगी।

अल्बानीज बाद में जाएंगे जकार्ता

चुनाव से पहले अल्बानीज ने कहा था कि प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल की शुरुआत टोक्यो में क्वाड की बैठक में भाग लेकर करेंगे। उसके बाद वे जकार्ता जाना चाहेंगे। उन्होंने राय जताई थी- ‘इंडोनेशिया दुनिया की एक बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित होगा। हम ऐसे क्षेत्र में रहते हैं, जहां भविष्य में हमारे सामने चीन, भारत और इंडोनेशिया बड़ी ताकत के रूप में मौजूद होंगे। हमें उनसे आर्थिक भागीदारी मजबूत करनी होगी।’



पर्यवेक्षकों के मुताबिक पश्चिमी और चीनी विशेषज्ञों की निगाहें टोक्यो में अल्बानीज की भूमिका और उनके रुख पर टिकी होंगी। उसके बाद ही दोनों जगहों पर नई ऑस्ट्रेलियाई सरकार के बारे में ठोस राय बनेगी।

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