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Quad Summit: रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर चीन की तानाशाही पर हुई चर्चा, क्वाड नेता बोले- आतंकवादी समूहों के खिलाफ करेंगे ठोस कार्रवाई

Tue, 24 May 2022 07:13 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 24 May 2022 07:13 PM IST
सार

क्वाड नेताओं के बीच, रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर चीन की तानाशाही तक के मुद्दे उठाए गए। इस दौरान सभी देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए दृढ़ संकल्पित हुए।
 

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Quad leaders issue joint statement after convening the Quad Summit 24th May
क्वाड समिट 2022 - फोटो : Social media

विस्तार

जापान की राजधानी टोक्यो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन, जापान के पीएम फूमिओ किशिदा और ऑस्ट्रेलिया के नए पीएम एंथनी अल्बानीज ने मंगलवार को बहुपक्षीय सुरक्षा संवाद (क्वाड) की दूसरी सामने-सामने की बैठक में हिस्सा लिया। क्वाड नेताओं की दूसरी व्यक्तिगत बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और ऑस्ट्रेलिया के नव-निर्वाचित प्रधान मंत्री एंथनी अल्बनीस ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के विकास और वैश्विक मुद्दों के बारे में आपसी हितों को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया। इस बैठक को लेकर चारों देशों के नेताओं ने साझा बयान जारी किया है। 

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हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती हठधर्मिता पर हुई चर्चा
बयान के मुताबिक, भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के नेताओं ने मंगलवार को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में यथास्थिति को बदलने और तनाव बढ़ाने की कोशिश करने वाली किसी भी जबरदस्ती, भड़काऊ या एकतरफा कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। साथ ही इन देशों के नेताओं ने हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती हठधर्मिता के बीच अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था को कायम रखने के अपने संकल्प की पुष्टि की। बयान के मुताबिक, क्वाड सदस्य देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के लिए 50 बिलियन अमेरिकी डालर आवंटित करने का संकल्प लिया है।बैठक के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि 'क्वाड' के स्तर पर हमारे आपसी सहयोग से मुक्त, खुले और समावेशी 'इंडो पैसिफिक क्षेत्र' को प्रोत्साहन मिल रहा है। जो हम सभी का साझा उद्देश्य है। 
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गौरतलब है कि ये क्वाड शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हुआ जब चीन और क्वाड सदस्य देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। बीजिंग तेजी से लोकतांत्रिक मूल्यों को चुनौती दे रहा है। बीजिंग द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ कई विवादित क्षेत्रों में हजारों सैनिकों को तैनात करने और पूर्वी लद्दाख में 2020 में हुए गतिरोध के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में गिरावट आई है।
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क्वाड में सदस्य देशों ने हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य चाल की पृष्ठभूमि में एक स्वतंत्र और संपन्न हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करने की आवश्यकता के बारे में बात की। जारी हुए साझा बयान में सदस्य देशों ने कहा कि हम स्वतंत्रता, कानून के शासन, लोकतांत्रिक मूल्यों, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांतों का पुरजोर समर्थन करते हैं। बिना धमकी या बल के उपयोग के विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, यथास्थिति को बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास, और नेविगेशन और ओवरफ्लाइट की स्वतंत्रता का समर्थन करते हैं। जो सभी हिंद-प्रशांत क्षेत्र और दुनिया की शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए जरूरी है।

कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने पर भी हुई चर्चा
क्वाड, इस क्षेत्र और उसके बाहर इन सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए निर्णायक रूप से एक साथ कार्य करना जारी रखेगा। इस बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन जहां रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर पुतिन पर बरसे तो ऑस्ट्रेलियाई के नए पीएम एंथनी अल्बानीज ने कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने पर बात की। उन्होंने कहा कि हम इस बात को स्वीकार करते हुए कार्य करेंगे कि प्रशांत महासागर के द्वीप राष्ट्रों के लिए जलवायु परिवर्तन मुख्य आर्थिक और सुरक्षा चुनौती है। मेरी सरकार 2030 तक उत्सर्जन में 43% की कमी करने का एक नया लक्ष्य निर्धारित करेगी और 2050 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लिए ट्रैक पर लाएगी। उन्होंने कहा कि जैसा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र ने नया आकार दिया है, क्वाड साझेदारी की अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है। इस क्षेत्र में खासा ध्यान देने की जरूरत है। 

रूस यूक्रेन युद्ध पर हुई चर्चा
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भी क्वाड नेताओं के बीच वार्ता हुई। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि पुतिन एक संस्कृति को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। यह केवल यूरोप का मुद्दा नहीं है बल्कि वैश्विक मुद्दा है। रूस ने यूक्रेन पर गेहूं निर्यात करने की पाबंदी लगा दी है जिससे पूरी दुनिया में भोजन संकट पैदा हो सकता है। इस दौरान क्वाड देशों ने यूक्रेन की मदद करने सहित दोनों देशों के बीच शांति बहाल करने के प्रयास, कूटनीति से युद्ध का समाधान निकालने में अपनी प्रतिबद्धता जताई।


आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई रहेगी जारी
क्वाड नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा है कि हम फिर से पुष्टि करते हैं कि वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में, हम सभी आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करेंगे, इसमें वे व्यक्ति और संस्थाएं शामिल हैं, जिन्हें यूएनएससी के प्रस्ताव 1267(1999) के अनुसार नामित किया गया है। क्वाड नेताओं ने आगे कहा कि हम मुंबई में हुए 26/11 हमलों और पठानकोट हमलों सहित अन्य आतंकवादी हमलों की एक बार फिर निंदा करते हैं। हम यूएनएससी के प्रस्ताव 2593 (2021) की भी पुष्टि करते हैं, जो मांग करता है कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल फिर कभी किसी देश को धमकी देने या हमला करने, आतंकवादी हमलों को वित्तपोषित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। 
 

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