ईरान को अमेरिका से प्रकोप से बचाना होगी रूस की चुनौती, चीन कर सकता है शांति बहाली में मदद
- अमेरिका के रूख पर निर्भर करेगी आगे की स्थिति
- रूस और चीन की खामोशी बढ़ा रही है रहस्य
- ईरान ने कहा कि वह युद्ध नहीं चाहता
- भारत ने फिलहाल इराक में रह रहे लोगों के लिए जारी की एडवाइजरी
- अनिश्चतता के भंवर में है पश्चिम एशिया के हालात
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विस्तार
लेकिन इस तनावपूर्ण स्थिति में भी रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन, विदेशमंत्री सर्गेई लावरोव और चीन तथा उसके राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। दोनों देशों की चुपी जहां रहस्य बढ़ा रही है, वहीं भारत ने इराक में रह रहे भारतीयों के लिए सीमित, संतुलित एडवाइजरी जारी की है।
क्या है संभावना
भारतीय विदेश मंत्रालय ने नागरिकों के लिए जारी एडवाइजरी को देखते हुए अमेरिका और इईरान के बीच में युद्ध की संभावना कम नजर आ रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने भी कहा है कि हमने इराक में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए सीमित एडवाइजरी जारी की है। उन्हें सतर्क रहने, अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है।
भारत की यह एडवाइजरी एक उम्मीद बांध रही है कि जल्द सब ठीक हो जाएगा। क्योंकि इस एडवाइजरी में भारत ने नागरिकों से देश लौटने के लिए नहीं कहा है। इतना ही नहीं यह एडवाइजरी अन्य खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों के लिए नहीं है। केवल इराक के लिए है।
युद्ध की संभावना कम
ललित मान सिंह अमेरिका में भारत के राजदूत रहे हैं। अमर उजाला से विशेष बातचीत में ललित मान सिंह ने कहा कि उन्हें अभी दो देशों के बीच में टकराव, तनाव दिखाई दे रहा है, लेकिन युद्ध की संभावना कम नजर आ रही है। ललित मान सिंह का कहना है कि अमेरिका को युद्ध की अनुमति अमेरिकी कांग्रेस से लेनी होगी। मुझे लग रहा है कि अभी अमेरिकी कांग्रेस किसी युद्ध के पक्ष में नहीं है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी युद्ध के पक्ष में नहीं दिखाई देते। ईरान भी युद्ध नहीं चाहेगा।
ललित मान सिंह का कहना है कि अभी ईरान बेहद गुस्से में है। जनरल सुलेमानी के अमेरिकी हमले में मारे जाने के बाद उसका गुस्सा था। इसकी प्रतिक्रिया में उसने बगदाद में अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागी हैं। लेकिन अगर इसके बाद भी ईरान आगे सैन्य हमले या अमेरिका के ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश करता है, तब हालात युद्ध की दिशा में जा सकते हैं।
क्यों नहीं है युद्ध की संभावना?
ईरान और रूस विश्वसनीय मित्र हैं। ईरान का सीरिया के साथ अच्छा तालमेल हैं। चीन से अच्छे रिश्ते हैं। माना जा रहा है कि रूस मित्र देश ईरान को अमेरिकी प्रकोप का शिकार होने से बचाने के लिए पहल कर सकता है। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि रूस, अमेरिका और ईरान के तनाव पर कुछ इन्हीं कारणों से प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है। रूस के लिए ईरान का साथ देना या उसके बचाव में खड़ा होना चुनौती है। अमेरिका भी इस चुप्पी को समझ रहा है।
विदेश और रक्षा मामलों के जानकार रंजीत कुमार का कहना है कि रूस ही नहीं चीन भी ईरान को अमेरिकी प्रकोप का हिस्सा नहीं बनने देगा। ललित मान सिंह का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच में हालात युद्ध जैसे भले हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को इससे बहुत बड़ा झटका लगेगा। इसलिए मुझे नहीं लगता कि यह तनाव युद्ध की शक्ल ले पाएगा, लेकिन इन सबके बाद कुछ भी कहना मुश्किल है।
फिर किया हमला तो देंगे जवाब
ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने बगदाद में दो अमेरिकी सैन्य बैस पर हुए हमले को आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताया है। वहीं ईरान की सरकारी मीडिया ने इसे जनरल सुलेमानी की हत्या का बदला करार दिया है। ईरान ने कहा कि वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन यदि युद्ध थोपा गया तो वह इसका पूरी ताकत से जवाब देगा।
ईरान के नेताओं का कहना है कि उसके मिसाइल हमले के बाद यदि अमेरिका ने फिर हमला किया, तो उनका देश जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है। इस क्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सधी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अभी तक सब अच्छा है। उनके देश के पास एक ताकतवर सेना है। वह बुधवार को इस संदर्भ में बयान जारी करेंगे।