{"_id":"603bb71768be416092166163","slug":"psychologist-tomas-stull-says-atheists-and-believers-have-same-opinion-on-the-need-for-morality","type":"story","status":"publish","title_hn":"नया अध्ययनः नैतिकता की जरूरत पर नास्तिक और आस्तिकों में है एक राय","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
नया अध्ययनः नैतिकता की जरूरत पर नास्तिक और आस्तिकों में है एक राय
Sun, 28 Feb 2021 09:02 PM IST
संजीव कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sun, 28 Feb 2021 09:02 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आस्तिक और नास्तिक एक दूसरे को गहरे विरोध भाव के नजरिए से देखते हैं। लेकिन एक ताजा सर्वेक्षण का निष्कर्ष है कि जहां तक नैतिक उसूलों में यकीन का सवाल है, नास्तिकों और आस्तिकों में ज्यादा फर्क नहीं होता। इस सर्वे का विश्लेषण मनोवैज्ञानिक टॉमस स्टल ने किया है। इस बारे में अब मीडिया में रिपोर्ट छपी है।
विज्ञापन
टॉमस स्टल ने वेबसाइट रशियाटुडे.कॉम से कहा कि धार्मिक और नास्तिक दोनों तरह लोग काफी हद तक लगभग एक जैसी नैतिकता में ही यकीन करते हैं। लेकिन अंतर यह होता है कि नास्तिक नैतिकता को अलग खाके में रखते हैं। धार्मिक लोग जिन कारणों से नैतिकता में यकीन करते हैं, नास्तिकों के इनमें विश्वास करने के तर्क अलग होते हैं।
विज्ञापन
ये सर्वे स्टल की देखरेख में ही हुआ। इस अध्ययन के लिए चार ऑनलाइन सर्वे पूरे में अमेरिका और स्वीडन कराए गए। स्टल के मुताबिक उन्होंने अमेरिका का चयन इसलिए किया, क्योंकि उसे अपेक्षाकृत अधिक धार्मिक देश माना जाता है। जबकि स्वीडन की छवि अलग है।
विज्ञापन
उसे धर्मनिरपेक्ष देश समझा जाता है। जो चार सर्वे कराए गए, उनमें दो में अमेरिकी लोगों के यकीन, उसूल, जीवन कथाओं और उनके राजनीतिक रूझानों की पड़ताल की गई। दूसरा सर्वे अमेरिका और स्वीडन दोनों देशों में कराया गया। उसमें भी पहले सर्वे जैसे सवाल ही पूछे गए। बाद दोनों सर्वेक्षणों में आए जवाबों की तुलना की गई।
सर्वे के दौरान कुछ सवाल पूछे गए, जिनका जवाब हां या ना में देने को कहा गया। इनमें एक सवाल यह था- अगर यह मेरे कायमाब होने में मददगार हो, तो मैं अनैतिक होने को तैयार हूं। इस सवाल का दोनों देशों में ज्यादातर लोगों ने ना में जवाब दिया। इसकी व्याख्या करते हुए स्टल ने कहा कि इससे जाहिर होता है कि दुनिया में लोग उतनी बुरी सोच के नहीं हैं, जितना आम तौर पर समझा जाता है।
सभी सर्वेक्षणों में लोगों ने नैतिकता को ऊंचा दर्जा दिया। उनकी राय में व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता और सुरक्षा हर मामले में नैतिकता की जरूरत है। स्टल के मुताबिक इससे जाहिर होता है कि लोग चाहे नास्तिक हों या आस्तिक, वे नैतिकता की एक जैसी जरूरत महसूस करते हैं। मनोवैज्ञानिक रूप से इसका अर्थ यह है कि चाहे आस्तिक हों या नास्तिक वो यही मानते हैं कि समाज अच्छी तरह तब चलता है, जब लोग अपने जीवन और अपने कामकाज के बारे में अपनी जिम्मेदारी अधिक मानते हैं।
स्टल के मुताबिक जो लोग धर्म में यकीन नहीं करते, उनमें यह मानने की प्रवृत्ति ज्यादा होती है कि सामुदायिक वफादारी, सत्ता के लिए सम्मान या धार्मिक भावना का नैतिकता के लिए कोई महत्त्व है। स्टल की राय में भय ऐसा प्रमुख पहलू है, जिसकी वजह से लोग धर्म में आस्था रखते हैं।
ऐसे लोग सोचते हैं कि दुनिया एक खतरनाक जगह है। इसलिए वे एक खास धार्मिक समुदाय और एक खास ढंग की नैतिकता के दायरे में रहकर जीना चाहते हैं। इसके विपरीत नास्तिक व्यक्तिवाद को ज्यादा अहमियत देते हैं। वे व्यक्ति की हर गतिविधि का परीक्षण करने पर जोर देते हैं। यानी वे यह नहीं मानते कि नैतिकता को कोई ऐसा मानदंड है, जो मनुष्य के लिए पूर्व निर्धारित है।