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नेपाल में सत्तारूढ़ दल के प्रचंड-नेपाल गुट का संसद भंग के खिलाफ प्रदर्शन, पार्टी और चुनाव चिह्न पर किया दावा
Sat, 26 Dec 2020 04:08 AM IST
Amit Mandal
अतुल मिश्र
अतुल मिश्र
Published by: Amit Mandal
Updated Sat, 26 Dec 2020 04:08 AM IST
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केपी शर्मा ओली और माधव कुमार नेपाल
नेपाल में सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के असंतुष्ट प्रचंड-नेपाल गुट ने संसद भंग किए जाने के विरोध में शुक्रवार को प्रदर्शन किया। केंद्रीय समिति की बृहस्पतिवार को हुई बैठक में संसद भंग के खिलाफ आंदोलन संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया था। इस बीच असंतुष्ट गुट ने चुनाव आयुक्त के समक्ष एनसीपी और चुनाव चिह्न ‘सूर्य’ पर वैधता का दावा किया है। वहीं समाजवादी विद्यार्थी यूनियन ने राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का पुतला भी फूंका।
पुष्पकमल दहल प्रचंड और माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व में केंद्रीय समिति के सदस्य और सांसद माइतीघर मंडला में एकत्र हुए। इन सभी लोगों ने सड़क पर धरना देकर ओली सरकार के कदम का विरोध किया। इसके बाद ये सभी लोग निर्वाचन आयोग भी गए। प्रचंड ने कहा कि हमारे दो तिहाई केंद्रीय सदस्य निर्वाचन आयोग में उपस्थित होने को तैयार हैं। उन्होंने आयोग को समिति की बैठक में 315 लोगों के मौजूद होने की जानकारी भी दी। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के छात्र संगठन विद्यार्थी संघ ने सुप्रीम कोर्ट के बाद प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने संसद भंग किए जाने को असांविधानिक बताया और इस फैसले को रद्द करने की मांग की। पुलिस ने 7 लोगों को हिरासत में भी लिया।
बागमती प्रांत के मुख्यमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, तीन मंत्रियों का इस्तीफा
प्रतिनिधि सभा भंग किए जाने के बाद शुक्रवार को बागमती प्रांत के मुख्यमंत्री डारमणि पौडेल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया। यह प्रस्ताव एनसीपी प्रदेश संसदीय दल के उपनेता और गृह मंत्री शालिकराम जम्माकटेल की अगुवाई में लाया गया। प्रस्ताव पर 46 जन सांसदों के हस्ताक्षर हैं। प्रांतीय सरकार के तीन मंत्रियों ने अपने पदों से इस्तीफ दे दिया है। इनमें गृह मंत्री शालिकराम जम्माकटील, उद्योग मंत्री अरुण नेपाल और सामाजिक विकास मंत्री युबराज दुलाल हैं। बागमती प्रदेश की 110 सदस्यीय प्रांतीय विधानसभा में सत्तारूढ़ एनसीपी के 80 जन सांसदहैं, जिनमें पुष्प कमल दहल गुट के 46 जन सांसद शामिल हैं, जबकि ओली गुट के 34 जन सांसद हैं।
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पुष्पकमल दहल प्रचंड और माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व में केंद्रीय समिति के सदस्य और सांसद माइतीघर मंडला में एकत्र हुए। इन सभी लोगों ने सड़क पर धरना देकर ओली सरकार के कदम का विरोध किया। इसके बाद ये सभी लोग निर्वाचन आयोग भी गए। प्रचंड ने कहा कि हमारे दो तिहाई केंद्रीय सदस्य निर्वाचन आयोग में उपस्थित होने को तैयार हैं। उन्होंने आयोग को समिति की बैठक में 315 लोगों के मौजूद होने की जानकारी भी दी। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के छात्र संगठन विद्यार्थी संघ ने सुप्रीम कोर्ट के बाद प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने संसद भंग किए जाने को असांविधानिक बताया और इस फैसले को रद्द करने की मांग की। पुलिस ने 7 लोगों को हिरासत में भी लिया।
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बागमती प्रांत के मुख्यमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, तीन मंत्रियों का इस्तीफा
प्रतिनिधि सभा भंग किए जाने के बाद शुक्रवार को बागमती प्रांत के मुख्यमंत्री डारमणि पौडेल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया। यह प्रस्ताव एनसीपी प्रदेश संसदीय दल के उपनेता और गृह मंत्री शालिकराम जम्माकटेल की अगुवाई में लाया गया। प्रस्ताव पर 46 जन सांसदों के हस्ताक्षर हैं। प्रांतीय सरकार के तीन मंत्रियों ने अपने पदों से इस्तीफ दे दिया है। इनमें गृह मंत्री शालिकराम जम्माकटील, उद्योग मंत्री अरुण नेपाल और सामाजिक विकास मंत्री युबराज दुलाल हैं। बागमती प्रदेश की 110 सदस्यीय प्रांतीय विधानसभा में सत्तारूढ़ एनसीपी के 80 जन सांसदहैं, जिनमें पुष्प कमल दहल गुट के 46 जन सांसद शामिल हैं, जबकि ओली गुट के 34 जन सांसद हैं।
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