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पुर्तगाल में रविवार को राष्ट्रपति चुनाव, सभी की नजरें वहां के ‘डोनाल्ड ट्रंप’ पर टिकीं
Fri, 22 Jan 2021 03:22 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लिस्बन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लिस्बन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 22 Jan 2021 03:22 PM IST
सार
चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों में वेंतुरा को 11 फीसदी वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है। चेगा पार्टी का गठन 2019 के मध्य में हुआ था। डेढ़ साल के भीतर इसके ताकतवर हो जाने को इसकी बड़ी कामयाबी माना जा रहा है...
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Portuguese President Marcelo Rebelo de Sousa
- फोटो : ANI (File)
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विस्तार
पुर्तगाल में रविवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान होगा। पुर्तगाल में यह पहला मौका है, जब आपातकालीन स्थितियों के बीच चुनाव कराया जा रहा है। इस समय देश कोरोना महामारी से बुरी तरह प्रभावित है। इसके बावजूद पुर्तगाल के चुनाव में बाकी दुनिया का ध्यान एक नई उभरी पार्टी के प्रदर्शन पर टिका है। इस धुर दक्षिणपंथी पार्टी को चुनाव अभियान के दौरान भारी समर्थन मिला है।
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इस पार्टी का नाम- चेगा (अब बहुत हो गया) है। इसके नेता आंद्रे वेंतुरा हैं। वेंतुरा ने दावा किया है कि मतदान के पहले दौर में किसी उम्मीदवार को 50 फीसदी से ज्यादा वोट नहीं मिलेंगे। इसलिए दूसरे दौर का मतदान होगा, जिसमें वे राष्ट्रपति मार्सेलो रेबोलो डी सूजा को चुनौती देंगे।
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ज्यादातर जानकारों का मानना है कि राष्ट्रपति डी सूजा दूसरे कार्यकाल के लिए चुन लिए जाएंगे। लेकिन आंद्रे वेंतुरा का प्रदर्शन मजबूत रहेगा। चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों में वेंतुरा को 11 फीसदी वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है। चेगा पार्टी का गठन 2019 के मध्य में हुआ था। डेढ़ साल के भीतर इसके ताकतवर हो जाने को इसकी बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। अक्तूबर 2019 में हुए संसदीय आम चुनाव में चेगा पार्टी ने एक सीट जीत कर सबको चौंका दिया था। जानकारों का कहना है कि तब से इस पार्टी की ताकत लगातार बढ़ी है।
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यूनिवर्सिटी ऑफ अवेरियो से संबंधित राजनीति-शास्त्री कार्लोस जलाली ने टीवी चैनल यूरो न्यूज से पुर्तगाल के समाज में असंतोष भरा हुआ है, ये बात सबको मालूम है। चेगा अब उसी असंतोष के इजहार का माध्यम बन रही है। मौजूदा हालात में इस बात की संभावना बहुत कम है कि चेगा देश की प्रमुख पार्टी बन जाएगी। इसके बावजूद इसे कोई हल्के से नहीं ले रहा है। कई जानकारों का मानना है कि चेगा और वेंतुरा के उदय के साथ अमेरिका में दिखी डोनाल्ड ट्रंप की परिघटना अब पुर्तगाल पहुंच गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक रविवार को होने वाले मतदान में गौरतलब दो प्रमुख बातें हैं- क्या साइलेंट वोटर बड़ी संख्या में मतदान करेंगे और क्या वे चेंगा का समर्थन करेंगे। दूसरी देखने की बात यह है कि कोरोना महामारी से बने हालात का किस उम्मीदवार पर सबसे खराब असर पड़ता है और किसे इसका फायदा मिलता है।
अक्तूबर 2019 के संसदीय चुनाव में हालांकि चेगा को एक सीट मिल गई थी, लेकिन उसे वोट सिर्फ 1.3 फीसदी मिला था। लेकिन राजनीति शास्त्री मरियाना एन. मेंडिस ने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स के ब्लॉग पर लिखे अपने विश्लेषण में कहा है कि चेगा का इतना वोट पा लेना भी पुर्तगाल की राजनीति में एक युग बदलने वाली घटना थी।
इसलिए कि पुर्तगाल अब तक धुर दक्षिणपंथ की लहर से बचा रहा था। इसीलिए संसदीय चुनाव में प्रदर्शन के बाद से वेंतुरा पुर्तगाल के मीडिया में छाये रहे हैं। इससे उनकी लोकप्रियता और बढ़ी है। इससे मुमकिन है कि निकट भविष्य में चेगा पुर्तगाल की चौथी या तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन जाए।
कई विश्लेषक वेंतुरा को डोनाल्ड ट्रंप की शैली का राजनेता मानते हैं। वे ट्रंप की तर्ज पर ही लफ्फाजी वाले अंदाज में टीवी बहसों में हिस्सा लेते हैं। वे पहले टीवी पर फुटबॉल के कमेंटेटर और एक क्राइम लीग शो के एंकर रह चुके हैँ। इस कारण देश में उन्हें लोग पहले से जानते थे। डोनाल्ड ट्रंप को भी पहली शोहरत रियलिटी टीवी स्टार के रूप में मिली थी।
वेंतुरा ने देश में मौजूद रोमा अल्पसंख्यकों को प्रमुख निशाना बनाया है। वे बेलाग आरोप लगाते हैं कि इन लोगों ने देश के लोगों के लिए बनाई गई कल्याण योजनाओं को हड़प लिया है, वे पुर्तगाली समाज में मिलते-जुलते नहीं हैं, और वे यहां का कानून नहीं मानते। पुर्तगाल में हुई नस्लवाद विरोधी रैलियों पर एतराज करते हुए वेंतुरा ने इनके खिलाफ अपनी रैलियां आयोजित की हैं।
राजनीति-शास्त्रियों का कहना है कि आज के दौर में इस तरह के तेवर राजनीति में कामयाबी का फॉर्मूला बन गया है। वेंतुरा उस पर ही अमल कर रहे हैं। इसीलिए ये देखना अहम है कि रविवार को अपने इस तौर-तरीके वे कितने वोट जुटा पाते हैं।