इंडोनेशिया: मुस्लिम आबादी वाले सबसे बड़े देश में राष्ट्रपति, संसदीय चुनाव के लिए हुआ मतदान
- दुनिया के तीसरी सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में हाथियों से पहुंचाए गए बैलेट बॉक्स
- 2,45,000 रिकॉर्ड प्रत्याशी आजमा रहे हैं चुनाव में अपनी किस्मत
- 8,00,000 से ज्यादा मतदान केंद्र बनाए गए हैं पूरे द्वीप समूहों के लिए
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दुनिया में मुस्लिम आबादी वाले सबसे बड़े देश इंडोनेशिया में राष्ट्रपति और सांसदों को चुनने के लिए होने वाले मतदान में इस बार मुख्य मुकाबला मौजूदा राष्ट्रपति जोके विडोडो और उनके प्रतिद्वंद्वी पूर्व जनरल प्राबोवो सुबिआंतो के बीच है। सुमात्रा के लोगों तक हाथियों से बैलेट बॉक्स पहुंचाने से लेकर पापुआ के मतदाताओं को विद्रोहियों से बचाने तक इंडोनेशिया इस कोशिश में है कि एक दिन में होने वाला यह चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हो जाए। चुनाव परिणामों का एलान मई में होगा। अनधिकृत जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति इस मतदान में पर्याप्त अंतर से आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
सुमात्रा के आचेह प्रांत में हाथियों पर बैलेट बॉक्स आए हैं तो जावा द्वीप के दक्षिणपूर्वी इलाकों में बैलेट बॉक्स पहुंचाने के लिए बारिश और कीचड़ के चलते घोड़ों की मदद ली गई है। भारत और अमेरिका के बाद दुनिया के तीसरे सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में राष्ट्रपति विडोडो ने मुस्लिम धर्मगुरु मारूफ अमीन को रनिंग मेट बनाया है जबकि प्राबोवो ने पूर्व व्यवसायी व जकार्ता के डिप्टी गवर्नर सैंडिआगा सलाउद्दीन उनो के साथ जोड़ी बनाई है।
विडोडो ने आर्थिक स्थिरता और व्यापार के अनुकूल माहौल के महत्व को चुनावी मुद्दा बनाया है, जबकि प्राबोवो ने लोगों की खुशहाली के लिए संरक्षणवाद के नजरिए को अहम माना है। इस बार के चुनाव प्रचार में इंडोनेशिया में धार्मिक मुद्दे ज्यादा हावी रहे। हालांकि चुनावी सर्वेक्षण की मानें तो इस बार भी विडोडो ही बाजी मार सकते हैं।
चुनाव आयोग के सामने कई चुनौतियां
चुनाव आयोग के सामने भारी बरसात, वोटरों की जालसाजी और साइबर हमले की भी चुनौती है। करीब 4,899 किलोमीटर क्षेत्र में फैले द्वीप समूहों के कोने कोने तक कार्डबोर्ड के बैलेट बॉक्स पहुंचाने के लिए अधिकारियों को हाथियों से लेकर मोटरबाइक, स्पीडबोट और विमान तक का सहारा लेना पड़ रहा है।
चीन-रूस से साइबर हमलों की आशंका
उम्मीदवारों की तादाद इतनी ज्यादा है कि उनके बारे में वोटरों को जानकारी देना भी बड़ा सिरदर्द है। ऐसे में एक मोबाइल एप बनाया गया है। लेकिन विपक्षी दलों ने मतदान में बाधा डालने के लिए साइबर हमलों की आशंका जताई जा रही है, जिनके पीछे चीन या रूस का हाथ हो सकता है।