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बड़ा संकट: गहराती आर्थिक बदहाली के कारण तेजी से श्रीलंका में बढ़ रही है गरीबी, गंभीर हो रहे हालात
Tue, 01 Mar 2022 10:48 PM IST
Atul Sinha
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलंबो
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: Atul Sinha
Updated Tue, 01 Mar 2022 10:48 PM IST
सार
श्रीलंका में जिन लोगों के पास रोज 3.20 डॉलर खर्च करने की क्षमता नहीं है, विश्व बैंक उन्हें गरीबी रेखा के नीचे मानता है। उसके अनुमान के मुताबिक अब श्रीलंका में 25 लाख 60 हजार लोग इस रेखा के नीचे पहुंच गए हैं।
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श्रीलंका का ध्वज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आर्थिक हालत लगातार बिगड़ने के कारण श्रीलंका के आम लोगों में मायूसी बढ़ती जा रही है। ऐसी खबरें मीडिया में लगातार छप रही हैं कि लोगों ने घर चलाने के लिए अपने जेवरात बेच दिए। कर्ज का बोझ भी आम लोगों पर बढ़ता जा रहा है। अब मक्का और धान की पैदावार अच्छी न होने का अनुमान लगाया गया है। इससे कृषि क्षेत्र में संकट गहराने की संभावना है।
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वेबसाइट निक्कईएशिया डॉट कॉम ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि श्रीलंका के कृषि क्षेत्र में हताशा फैल रही है। जबकि देश की दो करोड़ 20 लाख आबादी में से एक करोड़ 60 लाख लोग खेती पर ही निर्भर हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इस हाल के लिए सीधे तौर पर राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे की नीतियां जिम्मेदार हैं।
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राष्ट्रपति ने पिछले साल अप्रैल में रासायनिक खाद के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। उन्होंने किसानों को ऑर्गैनिक उवर्रकों का इस्तेमाल करने को कहा था। लेकिन जब इस नीति का खराब परिणाम हुआ, तो पिछले नवंबर में उन्होंने अचानक नीति बदल दी। तब उन्होंने किसानों को मुफ्त रासायनिक खाद मुहैया कराने का वादा किया।
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श्रीलंका की पेरादिनिया यूनिवर्सिटी में फसल विज्ञान के प्रोफेसर बुद्धि माराम्बे ने कहा है कि किसान आम तौर पर अपनी उपज का 35 फीसदी हिस्सा अगले सीजन में बीज के रूप में इस्तेमाल के लिए रखते हैं। ऐसे में इस बार खराब फसल होने का नतीजा यह होगा कि जितनी असल पैदावार होगी, उसकी तुलना में बाजार में कम चावल पहुंचेगा।
श्रीलंका तमाम शहरों में अनाज की कीमत में तेजी से चढ़ी है। कई खाद्य पदार्थों की किल्लत का सामना भी लोगों को करना पड़ रहा है। इस साल दिसंबर में टमाटर की कीमत 463 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। जबकि उसके साल भर पहले ये कीमत 149 रुपये प्रति किलो थी। दिसंबर में कुल मुद्रास्फीति दर 20 फीसदी थी, जो इस वर्ष जनवरी में 24.4 फीसदी तक पहुंच गई। हालांकि फरवरी में यह गिर कर 16.8 फीसदी पर आई, लेकिन पूरे दक्षिण एशिया में पाकिस्तान के बाद सबसे ज्यादा महंगाई दर श्रीलंका में ही है।
इस बीच विश्व बैंक ने श्रीलंका सरकार को चेतावनी दी है कि देश में बढ़ रही आर्थिक मुश्किलों का असर सामाजिक अशांति के रूप में सामने आ सकता है। श्रीलंका स्थित विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर फारिस हडाड जेर्वोस ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- 2002 के बाद से श्रीलंका ने गरीबी घटाने में अच्छी प्रगति की थी। लेकिन अब इसमें बढ़ोतरी हुई है और देश की आबादी का 11.7 फीसदी हिस्सा अब गरीबी रेखा के नीचे जी रहा है।
कोलंबो यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर सिरिमल अबेयरत्ने ने कहा है- ‘इस देश ने एक साथ इतने प्रकार के संकट पहले कभी नहीं देखे। पहले जब आर्थिक संकट आया, तो विदेशी मुद्रा की कमी नहीं थी। इसलिए हम विदेशी कर्ज ले सकते थे। अब विदेशी कर्ज इतना ज्यादा हो चुका है कि श्रीलंका की ऋण साख खतरे में है।’