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Canada: कनाडा में पोप ने मूल निवासियों के बच्चों पर अत्याचारों के लिए माफी मांगी, हजारों बच्चों की हुई थी मौत

Tue, 26 Jul 2022 12:10 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, मास्क्वासिस।
पीटीआई, मास्क्वासिस। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 26 Jul 2022 12:10 AM IST
सार

पोप की ओर से जारी की गई ऐतिहासिक माफीनामे में कहा गया है कि यहां के मूल निवासियों को जबरन ईसाई समाज में आत्मसात करने से उनकी संस्कृति नष्ट हो गई, अलग-अलग परिवारों और हाशिए पर रहने वाली पीढ़ियों को आज भी महसूस किया जा रहा है। फ्रांसिस ने कहा, "मैं इसके लिए माफी मांगता हूं।"

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Pope Francis apologizes for devastating policy of forced assimilation in boarding schools
पोप फ्रांसिस। - फोटो : facebook/ConElPapa

विस्तार

कनाडा में पोप फ्रांसिस ने कैथोलिक चर्च के आवासीय विद्यालयों में बच्चों के साथ यौन दुराचार सहित कई तरह के अत्याचारों के लिए सोमवार को माफी मांगी। पोप ने यहां के स्थानीय लोगों से माफी मांगते हुए कहा कि अत्याचार की यह घटनाएं एक विनाशकारी नीति का नतीजा थीं। वह रविवार को अल्बर्टा प्रांत के एडमॉन्टन पहुंचे थे। यहां प्रधानमंत्री जस्टिन त्रूडो और गवर्नर जनरल मैरी मे साइमन ने उनका स्वागत किया।

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पोप की ओर से जारी की गई ऐतिहासिक माफीनामे में कहा गया है कि यहां के मूल निवासियों को बलपूर्वक ईसाई समाज में समाहित कराने से उनकी संस्कृति तबाह हो गई, उन्हें परिवारों से दूर होना पड़ा। अलग-अलग परिवारों और हाशिए पर रहने वाली पीढ़ियों को आज भी महसूस किया जा रहा है। फ्रांसिस ने कहा, ‘‘मैं उन सभी अत्याचारों के लिए माफी मांगता हूं जो कई इसाइयों ने मूल निवासियों पर ढाए।’’
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अल्बर्टा प्रांत के एडमॉन्टन के दक्षिण में एक पूर्व आवासीय स्कूल में बचे लोगों और स्वदेशी समुदाय के सदस्यों की तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कनाडा में फ्रांसिस के सप्ताह भर चलने वाले "प्रायश्चित तीर्थयात्रा" का पहला कार्यक्रम शुरू हुआ। पोप 24 से 30 जुलाई की यात्रा के दौरान पीड़ितों और उनके परिवारों से माफी मांगेंगे।
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कनाडा पहुंचने के बाद फ्रांसिस ने चार क्री (उत्तर अमेरिकी मूलनिवासी लोग, जो पहले कनाडा में रहते थे) देशों की भूमि पर एक समाधि स्थल पर जाकर प्रार्थना की। इसके बाद फ्रांसिस पूर्व एर्मिंस्किन इंडियन रेजिडेंशियल स्कूल की जगह पर पहुंचे, जो अब काफी हद तक टूट गया है। यहां उन्होंने कहा, "मैं स्वदेशी लोगों के खिलाफ ईसाइयों द्वारा की गई बुराई के लिए विनम्रतापूर्वक क्षमा मांगता हूं।"

उनके शब्द मिशनरियों के "निंदनीय" कृत्यों के लिए उनकी पिछली माफी से परे थे। साथ ही उन्होंने "विनाशकारी" आत्मसात नीति के साथ चर्च के संस्थागत सहयोग की जिम्मेदारी ली, जिसे  कनाडा के सत्य और सुलह आयोग ने "सांस्कृतिक नरसंहार" की राशि बताया।


डेढ़ लाख से ज्यादा बच्चों को किया गया था जबरन भर्ती
1800 से 1990 के बीच पूरे कनाडा में कैथोलिक चर्च के 139 आवासीय विद्यालयों में  मूलनिवासी, मेटिस और इनुइट समुदायों के डेढ़ लाख से ज्यादा बच्चों को जबरन भर्ती किया गया। उन्हें कैथोलिक रीति-रिवाजों को आत्मसात करने का प्रशिक्षण दिया गया। इन्हें उनकी मूल संस्कृति से अलग कर दिया जाता।इसका उद्देश्य उन्हें मुख्यधारा के समाज में ईसाई बनाना और आत्मसात करना था, जिसे पिछली कनाडाई सरकारें श्रेष्ठ मानती थीं। उन्हें मातृभाषा बोलने की भी अनुमति नहीं थी। इन बच्चों में से छह हजार से ज्यादा अत्याचारों के कारण मारे गए।

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